खत्म हुआ इंतजार, अब देहरादून से देखिए हिमालय

CM Photo 06, dt.03 February, 2016देहरादून के झाझरा, विज्ञान धाम परिसर में मुख्यमंत्री हरीश रावत और केन्द्रीय मंत्री महेश शर्मा ने लगभग 12.5 करोड रुपए की लागत से नवनिर्मित आंचलिक विज्ञान केन्द्र का उद्घाटन किया। देश का यह सबसे नवीनतम विज्ञान केन्द्र है, जिसमें पहली बार हिमालय से जुड़ी पुरातन जानकारियों एवं हिमालय की प्रकृति एवं प्रवृति को आम आदमी की भाषा में रोचक तरीके से प्रदर्शित किया गया है। साथ ही आंचलिक विज्ञान केन्द्र की स्थापना से आम जनता व बच्चों को नवीनतम वैज्ञानिक खोजों, प्रयोगों, तकनीकियों एवं प्रौद्योगिकी की जानकारी मिल सकेगी।

CM Photo 02, dt.03 February, 2016इस मौके पर मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि राज्य सरकार यूकॉस्ट द्वारा किए जा रहे कार्यों को हर संभव सहयोग देगी। साथ ही बताया कि प्रदेश स्तरीय आचंलिक विज्ञान केन्द्र की ही तर्ज पर जनपद स्तर के प्रथम उप क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्र, अल्मोडा के लिए भी भूमि का चयन कर लिया गया है और इसका निर्माण कार्य भी शीघ्र शुरू कर दिया जाएगा।

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केन्द्रीय संस्कृति मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ महेश शर्मा ने कहा कि विज्ञान की मूलभूत समझ को आम जनता में पहुंचाने के लिए देश भर के आंचलिक विज्ञान केन्द्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहें हैं, इसी क्रम में उत्तराखण्ड में पहला आंचलिक विज्ञान केन्द्र जहां एक ओर देश दुनिया में हो रही वैज्ञानिक प्रगति का प्रदर्शन करेगा, वहीं स्थानीय जन जीवन में विकसित लोक विज्ञान को भी प्रचारित एवं प्रसारित करेगा।

प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, सुरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (यूकॉस्ट) के संयोजन में राष्ट्रीय संग्रहालय परिषद् (एनसीएसएम), कोलकाता द्वारा झाझरा, विज्ञान धाम परिसर में आंचलिक विज्ञान केन्द्र की स्थापना की गयी है। आंचलिक विज्ञान केन्द्र के निर्माण में वित्तीय सहयोग के रूप में भागेदारी 50 प्रतिशत केन्द्र एवं 50 प्रतिशत प्रदेश सरकार की रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इस विज्ञान केन्द्र को आम जनता की सरल पहुंच में लाने के लिए अति शीघ्र नगर के प्रमुख स्थलों से सिटी बस की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

CM Photo 04, dt.03 February, 2016यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ राजेन्द्र डोभाल ने बताया कि विज्ञान के मौलिक सिद्वान्तों के गूढ़ रहस्यों को सार्वजनिक कराने के साथ नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकी-प्रौद्योगिकी का प्रर्दशन यह केन्द्र कराएगा। हिमालय की रचना के भू-गर्भीय पुरातन इतिहास और संपूर्ण पारिस्थिकीय तंत्र का सजीव साक्षात्कार ‘हिमालय गैलरी’ में किया गया है। जिसमें हिमालय के शिखर, नदियां, नैसर्गिक सुन्दरता, मानव एवं पशु-पक्षियों के सह-अस्तित्व, लोक जीवन, उत्पादकता के विभिन्न स्वरूप, मिथक एवं प्रश्नों के उत्तर इस गैलरी में देने का प्रयास किया गया है। ‘अमरनाथ गुफा’ में शिवलिंग के बनने की वैज्ञानिक प्रक्रिया को दिखाते हुए उसके प्रतिरूप को देखा जा सकता है।

CM Photo 03, dt.03 February, 2016यह विज्ञान केन्द्र तमाम आधुनिक वैज्ञानिक सुविधाओं एवं साज-सज्जा से युक्त है। इसमें आडिटोरियम, तारामण्डल, थ्री-डी थियेटर, व्याख्यान हाल एवं कक्ष, इनोवेशन हब, पुस्तकालय, हिमालयन गैलरी, फन सांइस गैलरी, फ्रंटियरर्स ऑफ टैक्नोलॉजी गैलरी, विज्ञान उद्यान, साइंस डिमोस्ट्रेशन कक्ष आदि अत्याधुनिक तकनीकी और सुविधाओं को लिए हुए संसाधन विकसित किए गए हैं। महत्वपूर्ण यह है कि देश का यह 16वां आंचलिक विज्ञान केन्द्र है जो कि 8.5 एकड़ में फैला है।

उदघाटन के बाद मुख्यमंत्री रावत एवं केन्द्रीय मंत्री डॉ शर्मा ने आंचलिक विज्ञान केन्द्र परिसर भ्रमण भी किया। मुख्यमंत्री रावत ने 3 डी फिल्म शो देखने के साथ ही प्रदर्शनी हॉल व द हिमालयंस का अवलोकन भी किया।