जियो ग्राफिकल गर्वर्नेस में अल्मोड़ा ने प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया

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almorAशिक्षा के क्षेत्र में अग्रणीय भूमिका निभाने वाला जनपद अल्मोड़ा ने जियो ग्राफिकल गर्वर्नेस यानि (जी0 गर्वर्नेंस) में प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है यह बात जिलाधिकारी सविन बंसल ने आज विकास भवन में जी0आई0एस0 सैल के शुभारम्भ पर कही। उन्होंने कहा कि जी0आई0एस0 के माध्यम से संशाधनोें के समुचित विकास बेहतर प्रबन्धन, नियोजन, मानव संशाधनों की कमी को दूर करने के लिए व आपदा प्रबन्धन को त्वरित कदम उठाने में हमे सहायता मिलेगी। जिलाधिकारी ने कहा कि अत्याधुनिक सूचना तकनीक पर आधारित भौगोलिक सूचना जी0आई0एस0 का अपना तन्त्र विकसित कर लिए जाने के बाद हिमालयी प्रदेश में बेहतर नियोजन, प्रबन्धन, मानव संशाधन जुटाने से लेकर संभावित आपदा से निपटने की राह काफी हद तक आसान हो जायेगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के सूचना एवं प्रौद्यागिकी विभाग के द्वारा वित्त पोषित इस योजना का कुमाऊॅ  विश्वविद्यालय परिसर अल्मोड़ा में कार्य विगत वर्ष 2009 से किया जा रहा है जिसमें अभी तक जनपद के 22 विभागो की सूचनायें संकलित कर उनका डाटाबेस तैयार किया गया है जिसे अद्यतन सूचना से अपडेट किये जाने की प्रक्रिया गतिमान है।

जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद के समस्त विकासखण्डों में विभिन्न योजनाओं एवं अन्य अभिलेखों से सम्बन्धित सूचना को जी0आई0एस0 के माध्यम से तैयार किये जाने के लिए अभिनव प्रयोग के रूप में विकासखण्ड ताड़ीखेत एवं द्वाराहाट में प्रथम चरण में चुना गया है। उन्होंने सभी विभागो के अधिकारियों से कहा कि वे अपने विभाग से सम्बन्धित सूचना को अद्यतन रूप में संकलित कर जी0आई0एस0 सैल के माध्यम से अपलोड करें। जिलाधिकारी ने बताया कि शीघ्र ही जिला मुख्यालय में जी0आई0एस0 सैल की स्थापना की जा रही है ताकि सभी विभागों की सूचना संकलित करने में सुविधा हो सके।

निदेशक सेण्टर आफ एक्सीलेंट फार नेचुरल रिसोर्सेस डाटा मेनेजमेंट सिस्टम इन उत्तराखण्ड प्रो0 जे0एस0 रावत द्वारा आज लोक निर्माण विभाग, आपदा प्रबन्धन, चिकित्सा, राजस्व, निर्वाचन, जल निगम, जल संस्थान, खाद्य आपूर्ति, पुलिस सहित अन्य विभागो के नियोजन तथा प्रशासनिक कार्यों के क्रियान्वित करने के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जनपद अल्मोड़ा पहला जनपद है जो जी0आई0एस0 का उपयोग नियोजन व प्रशासनिक कार्यों में करेगा। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। वास्तव में उत्तराखण्ड में भौगोलिक सूचना विज्ञान की अत्याधुनिक तकनीक विकसित किये जाने की सख्त जरूरत थी इसमें हम सफल रहे आने वाले समय समुचित व नियोजित विकास, बेहतर प्रबन्धन, नियोजन, मानव संशाधनों की कमी दूर करने के साथ ही आपदाकाल में इस तकनीक के सहारे त्वरित कार्यवाही होगी। उन्होंने कहा कि एन0आ0एस0ए0 हैदराबाद, आई0आर0आर0एस0 व सर्वे आफ इण्डिया देहरादून तथा नाटमो कोलकत्ता और अब अल्मोड़ा कुमाऊॅ विश्वविद्यालय में इसकी शुरूआत हो चुकी है। इसके अलावा उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों से कहा कि वे अपने विभाग से सम्बन्धित सूचना को तैयार कर लें इसमें कोई कठिनाई उन्हें आयेगी तो कुमाऊॅ विश्वविद्यालय भूगोल विभाग उन्हें पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।