नारी निकेतन यौन शोषण मामले की होगी न्यायिक जांच, CM हरीश रावत ने दिए निर्देश

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नारी-निकेतन-देहरादूनदेहरादून के चर्चित नारी निकेतन मामले की अब न्यायिक जांच होगी। सरकार की किरकिरी कराने वाले इस मामले की मुख्यमंत्री हरीश रावत ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री रावत के निर्देश के बाद प्रदेश के मुख्य सचिव शत्रुघन सिंह ने नैनीताल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केएम जोजफ को पत्र लिखकर सिटिंग या रिटायर्ड जज नामित करने का अनुरोध किया है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि नारी निकेतन में वर्ष 2009 से ही संवासिनियों की मृत्यु के मामले होते रहे है। परंतु किसी ने भी नारी निकेतनों की दशा सुधारने की तरफ ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि संवासिनियों की मृत्यु दुखद है। हमने प्रदेश के सभी नारी निकेतनों व बाल आश्रमों की व्यवस्था सुधारने के लिए बहुत से अहम निर्णय लेकर उन पर काम भी किया है। हम नारी निकेतन में विक्षिप्त महिलाओं को सामान्य संवासिनियों से अलग रखने का प्रबंध कर रहे हैं। मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि संवासिनी मामले में पुलिस व मजिस्ट्रेट जांच करवाई जा चुकी है। राज्य महिला आयोग से कहा गया है कि यदि आवश्यक समझे तो अपनी एसआईटी बनाकर भी जांच करवा जा सकती है। चाहें तो इसमें मीडिया व समाजसेवा से जुड़े कुछ लोगों के ग्रुप से भी जांच करवाई जा सकती है। वहीं इस मामले को लेकर लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रही भारतीय जनता पार्टी अब भी इस मामले की सीबीआई जांच की अपनी मांग पर अड़ी हुई है।

क्या है पूरा मामला –

नवंबर 2015 में देहरादून स्थित नारी निकेतन में संवासिनी के यौन उत्पीड़न की ख़बर ने सबके होश उड़ा दिए थे। नारी निकेतन में ना सिर्फ संवासिनी का यौन उत्पीड़न हुआ बल्कि गुपचुप तरीके से उसका गर्भपात भी करा दिया गया। मामले का खुलासा होने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एसपी सिटी अजय सिंह के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी। एसआईटी ने तीन दिन में न केवल संवासिनी को ढूंढा, अपितु उसका भ्रूण भी बरामद कर लिया। मेडिकल आधार पर पहले संवासिनी के गर्भपात की पुष्टि के बाद दूधली गांव के जंगल से बरामद भ्रूण का डीएनए मिलान कराया गया। डीएनए मिलान के माध्यम से यह साबित किया गया कि भ्रूण सफाई कर्मचारी गुरदास का है।