मेरा उत्तराखंड

मेरा उत्तराखंड

जानिए कैसे होगा ‘कलयुग’ का अंत, इस गुफा में छिपा है ये राज !

धरती पर एक जगह ऐसी भी है जहां एक ही स्थान पर पूरी सृष्टि के दर्शन होते हैं। सृष्टि की रचना से लेकर कलयुग...

जायका उत्तराखंड का | जानिए कैसे बनती है लाजवाब ‘झंगोरा की खीर’

जायका उत्तराखंड का में आज हम बात करेंगे झंगोरा झंगोरा की खीर की, जिसका न सिर्फ स्वाद लाजवाब होता है बल्कि ये सेहत के...

नीलकंठ महादेव | भगवान शिव ने यहीं पिया था विष का प्याला

ऋषिकेश से समीप मणिकूट पर्वत पर नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकला विष शिव ने इसी स्थान...

क्या आपको पता है काफल की ये कहानी ?

देवभूमि उत्तराखंड आने वाले शख्स ने अगर यहां के फलों का स्वाद नहीं लिया, तो समझिए उसने कुछ मिस कर दिया। ऐसा ही...

उत्तराखंड | जानिए अपने लोक नृत्य को : छोलिया मतलब छल !

छोलिया, कुमाऊं का प्रसिद्ध परम्परागत लोक नृत्य है जिसका इतिहास सैकड़ों-हजारों वर्ष पुराना है। पुराने वक्त से ही छोलिया नृत्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान...

औली | ‘बर्फ का सागर’ देखना है तो चले आइए

उत्तराखंड का मशहूर और खूबसूरत पर्यटन स्थल ‘औली’ है। प्राकृतिक सुंदरता से ओतप्रोत औली भारत का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। सूर्य की किरणें जब यहां की...

स्थापना दिवस | 9 नवंबर को अस्तित्व में आया था ‘अपना उत्तराखंड’

एक अलग राज्य के रूप में उत्तराखण्ड 9 नवम्बर 2000 को अस्तित्व में आया। इससे पूर्व यह उत्तर प्रदेश राज्य का एक भाग था। अलग...

‘कॉमन पीकॉक’ को मिला उत्तराखंड की ‘राज्य तितली’ का दर्जा

अपने उत्तराखंड के अब पांच प्रतीक चिन्ह होंगे। राज्य के वन्यजीव बोर्ड ने कॉमन पीकॉक को उत्तराखंड की राज्य तितली का दर्जा देने पर...

विश्व धरोहर ‘फूलों की घाटी’ में इस साल पहुंचे रिकार्ड पर्यटक

चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी का दीदार पर्यटक सिर्फ 31 अक्टूबर तक की कर सकेंगे। 31 अक्टूबर को फूलों की...

रहस्यमयी मंदिर : सालों से जहां देवता हैं कैदखाने में बंद

देवभूमि उत्तराखंड कई मायनों में दूसरी जगहों से अलग है। यहां की संस्कृति, रीति-रिवाज, मान्यताएं इसे ना सिर्फ अद्भुत बनाती हैं बल्कि यहां आने...

अद्भुत : यहां है भटके हुए देवता का मंदिर

क्या आपने कभी भटके हुए देवताओं के मंदिर के बारे में सुना है ? अगर नहीं तो पहुंचिए धार्मिक नगरी हरिद्वार और देख आइये...

पढ़ें- क्यों यहां सोमवार को भी नहीं पूजे जाते शिव ?

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से लगभग छः किलोमीटर दूर गांव बल्तिर में स्थित है, हथिया देवाल, यहां दूर-दूर से लोग आते हैं, लेकिन पूजा करने...