Home मेरा उत्तराखंड धार्मिक स्थल

धार्मिक स्थल

जानिए उत्तराखंड में कहां पर है भगवान गणेश का कटा हुआ सिर ?

देहरादून भगवान गणेश को विघ्‍नहर्ता भी कहा गया है। हिन्‍दू धर्म में मान्‍यता है कि किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। क्या आप गणपति के जन्‍म की...

उत्तराखंड के पंचप्रयाग : जहां स्नान करने से धुल जाते हैं सारे पाप

देहरादून (शालिनि तिवारी) प्रयाग का अर्थ है नदियों का संगम। भारत में कुल 14 संगम या यूं कहें प्रयाग स्थित है। इनमें से 5 प्रयाग अकेले उत्तराखंड में हैं। इन्हें पंच प्रयाग के नाम से जाना जाता है।...

नि:संतान दंपत्ति की झोली भरती हैं माता अनसूया, दर्शन मात्र से पूरी होती है...

चमोली  शहर के कोलाहल से दूर, प्रकृति की गोद में, हिमालय के शिखर पर स्थित अनुसूया मंदिर तक पहुंचना किसी रोमांच से कम नहीं है। उत्तराखंड के चमोली में स्थित अनसूया माता मंदिर हिमालय की ऊंची पहड़ियों पर स्थित...

पंचकेदार में सर्वोपरी है मदमहेश्वर धाम, शिव की नाभि की होती है पूजा

रुद्रप्रयाग  यूं तो शिव के हज़ारों मंदिर भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व में आपको मिल जाएंगे लेकिन मदमहेश्वर के दर्शन निस्संदेह अलौकिक और सर्वोपरि है।(उत्तराखंड पोस्ट के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं, आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी...

भगवान बदरीनाथ की महिमा | दर्शन मात्र से ही मनुष्य मोक्ष को प्राप्त होता...

बदरीनाथ धाम को भारत के चार पवित्रों धामों में सबसे प्राचीन बताया गया है। सतयुग, द्वापर, त्रेता और कलियुग इन चार युगों की शास्त्रों में जो महिमा कही गयी है उसके अनुसार उत्तर में सतयुग का बदरीनाथ, दक्षिण में...

बारह ज्योर्तिलिंगों में श्रेष्ठ केदारनाथ में साक्षात शिव निवास करते हैं

बारह ज्योर्तिलिंगों में श्रेष्ठ केदारनाथ में साक्षात शिव निवास करते हैं। केदार उन अनगढ़ शिलाओं और शिखरों को भी कहते हैं जिनमें भगवान शिव का निवास माना जाता है। अब ख़बरें एक क्लिक पर इस लिंक पर क्लिक कर Download...

गंगोत्री | करोड़ों लोगों की आस्था की केंद्र है गंगा, जानिए महिमा

विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है भारतीय संस्कृति। इस संस्कृति के आरंभ से लेकर वर्तमान तक जितने भी परिवर्तन हुए हैं उन सब की साक्षी है गंगा। अब ख़बरें एक क्लिक पर इस लिंक पर क्लिक कर Download...

जानिए कैसे होगा ‘कलयुग’ का अंत, इस गुफा में छिपा है ये राज !

धरती पर एक जगह ऐसी भी है जहां एक ही स्थान पर पूरी सृष्टि के दर्शन होते हैं। सृष्टि की रचना से लेकर कलयुग का अंत कब और कैसे होगा इसका पूरा वर्णन यहां पर है। अब ख़बरें एक क्लिक पर...

नीलकंठ महादेव | भगवान शिव ने यहीं पिया था विष का प्याला

ऋषिकेश से समीप मणिकूट पर्वत पर नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकला विष शिव ने इसी स्थान पर पिया था। विष पीने के बाद उनका गला नीला पड़ गया, इसलिए उन्हें नीलकंठ...

रहस्यमयी मंदिर : सालों से जहां देवता हैं कैदखाने में बंद

देवभूमि उत्तराखंड कई मायनों में दूसरी जगहों से अलग है। यहां की संस्कृति, रीति-रिवाज, मान्यताएं इसे ना सिर्फ अद्भुत बनाती हैं बल्कि यहां आने वाले हर शख्स को मंत्र-मुग्ध भी कर देती हैं। देवभूमि में कई ऐसे मंदिर हैं...

अद्भुत : यहां है भटके हुए देवता का मंदिर

क्या आपने कभी भटके हुए देवताओं के मंदिर के बारे में सुना है ? अगर नहीं तो पहुंचिए धार्मिक नगरी हरिद्वार और देख आइये भटके हुए देवता का मंदिर। दरअसल यहां मनुष्य ही है भटका हुआ देवता। मनुष्य योनि श्रेष्ठ...

पढ़ें- क्यों यहां सोमवार को भी नहीं पूजे जाते शिव ?

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से लगभग छः किलोमीटर दूर गांव बल्तिर में स्थित है, हथिया देवाल, यहां दूर-दूर से लोग आते हैं, लेकिन पूजा करने नहीं बल्की मंदिर की अनूठी स्थापत्य कला को निहारते लोग पहुंचते हैं।  यहां शिवलिंग मौजूद...

MOST READ