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धार्मिक स्थल

उत्तराखंड के पंचप्रयाग : जहां स्नान करने से धुल जाते हैं सारे पाप

देहरादून प्रयाग का अर्थ है नदियों का संगम। भारत में कुल 14 संगम या यूं कहें प्रयाग स्थित है। इनमें से 5 प्रयाग अकेले उत्तराखंड में हैं। इन्हें पंच प्रयाग के नाम से जाना जाता है। देवप्रयाग, रुद्रप्रयाग,...

गोलू देव | न्याय के देवता के दरबार में हर अर्जी होती है पूरी,...

अल्मोड़ा (उत्तराखंड पोस्ट ब्यूरो) गोलू देवता उत्तराखंड के न्याय के देवता हैं। इस मंदिर की कुमाऊं में न्याय देवता के मंदिर के रूप में मान्यता है। जिसे कहीं कोई न्याय नहीं मिलता और जो नाउम्मीद हो चुका होता है, न्यायालय से,...

गंगोत्री | मां गंगा का उद्गम स्थल

विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है भारतीय संस्कृति। इस संस्कृति के आरंभ से लेकर वर्तमान तक जितने भी परिवर्तन हुए हैं उन सब की साक्षी है गंगा। ये वही गंगा है जिसे लोग भागीरथी, मंदाकिनी, सुरसरिता, देवनदी...

रहस्यमयी मंदिर : सालों से जहां देवता हैं कैदखाने में बंद

देवभूमि उत्तराखंड कई मायनों में दूसरी जगहों से अलग है। यहां की संस्कृति, रीति-रिवाज, मान्यताएं इसे ना सिर्फ अद्भुत बनाती हैं बल्कि यहां आने वाले हर शख्स को मंत्र-मुग्ध भी कर देती हैं। देवभूमि में कई ऐसे मंदिर हैं...

उत्तराखंड की रक्षक देवी | दिन के दौरान अपना रूप बदलती है ये देवी

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट ब्यूरो) माता धारी देवी को उत्तराखंड की रक्षक देवी के रूप में जाना जाता है। देवी का यह पवित्र मंदिर बद्रीनाथ रोड पर श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है । धारी...

यमुनोत्री | यहीं से शुरु होती है चार धाम यात्रा

पुराणों में यमुनोत्री का विशेष महत्व है। असित मुनि की निवास स्थली यमुनोत्री धाम 3235 मी० की ऊंचाई पर स्थित है। चार धाम की यात्रा में सर्वप्रथम यमुनोत्री के ही दर्शन किये जाते हैं। यमुनोत्री में एक ओर यमुना...

नि:संतान दंपत्ति की झोली भरती हैं माता अनसूया, दर्शन मात्र से पूरी होती है...

चमोली  शहर के कोलाहल से दूर, प्रकृति की गोद में, हिमालय के शिखर पर स्थित अनुसूया मंदिर तक पहुंचना किसी रोमांच से कम नहीं है। उत्तराखंड के चमोली में स्थित अनसूया माता मंदिर हिमालय की ऊंची पहड़ियों पर स्थित...

मां धारी देवी : प्राचीन काल से कर रही हैं उत्तराखंड की रक्षा

पौड़ी (उत्तराखंड पोस्ट ब्यूरो) धारी मां के चमत्कार से कौन नहीं परिचित है। मां धारी देवी प्राचीन काल से ही उत्तराखंड की रक्षा करती आ रही हैं। कहते हैं उत्तराखंड के जितने भी तीर्थ स्थल हैं उनकी रक्षा मां धारी...

यहां छिपा है राज़ | जानिए कैसे होगा कलयुग का अंत ?

गंगोलीहाट (पिथौरागढ़) (उत्तराखंड पोस्ट ब्यूरो) धरती पर एक जगह ऐसी भी है जहां एक ही स्थान पर पूरी सृष्टि के दर्शन होते हैं। सृष्टि की रचना से लेकर कलयुग का अंत कब और कैसे होगा इसका पूरा वर्णन यहां पर है। अब ख़बरें...

पंचकेदार में सर्वोपरी है मदमहेश्वर धाम, शिव की नाभि की होती है पूजा

रुद्रप्रयाग  यूं तो शिव के हज़ारों मंदिर भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व में आपको मिल जाएंगे लेकिन मदमहेश्वर के दर्शन निस्संदेह अलौकिक और सर्वोपरि है।(उत्तराखंड पोस्ट के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं, आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी...

नीलकंठ महादेव | भगवान शिव ने यहीं पिया था विष का प्याला

ऋषिकेश से समीप मणिकूट पर्वत पर नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकला विष शिव ने इसी स्थान पर पिया था। विष पीने के बाद उनका गला नीला पड़ गया, इसलिए उन्हें नीलकंठ...

पढ़ें- क्यों यहां सोमवार को भी नहीं पूजे जाते शिव ?

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से लगभग छः किलोमीटर दूर गांव बल्तिर में स्थित है, हथिया देवाल, यहां दूर-दूर से लोग आते हैं, लेकिन पूजा करने नहीं बल्की मंदिर की अनूठी स्थापत्य कला को निहारते लोग पहुंचते हैं।  यहां शिवलिंग मौजूद...