‘कॉमन पीकॉक’ को मिला उत्तराखंड की ‘राज्य तितली’ का दर्जा

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common-peacockअपने उत्तराखंड के अब पांच प्रतीक चिन्ह होंगे। राज्य के वन्यजीव बोर्ड ने कॉमन पीकॉक को उत्तराखंड की राज्य तितली का दर्जा देने पर अपनी मुहर लगा दी है।

राज्य वन्य जीव बोर्ड के इस मुहर के साथही उत्तराखंड राज्य में अब चार की बजाए पांच प्रतीक चिन्ह हो गए हैं।

नीचे जानिए उत्तराखंड के प्रतीक चिन्हों के बारे में –

kasturiकस्तूरी मृगहै उत्तराखंड का राज्य वन्य पशु | कस्तूरी मृग उत्तराखंड का राज्य वन्य पशु है। कस्तूरी मृग प्रकृति के सुन्दरतम जीवों में है। इसका वैज्ञानिक नाम ‘मास्कस क्राइसोगौस्टर” (Moschus Chrysogaster) है। भारत में कस्तूरी मृग, जो कि एक लुप्तप्राय जीव है, कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के केदार नाथ, फूलों की घाटी, हरसिल घाटी तथा गोविन्द वन्य जीव विहार एवं सिक्किम के कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रह गया है। इसे हिमालयन मस्क डियर के नाम से भी जाना जाता है। इस मृग की नाभि में अप्रतिम सुगन्धि वाली कस्तूरी होती है, जिसमें भरा हुआ गाढ़ा तरल पदार्थ अत्यन्त सुगन्धित होता है। कस्तुरी ही इस मृग को विशिष्टता प्रदान करती है। हिमालय क्षेत्र में यह देवदार, फर, भोजपत्र एवं बुरांस के वनों में लगभग 3600 मीटर से 4400 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। कंधे पर इसकी ऊंचाई 40 से 50 सेमी होती है।

monalमोनालहै उत्तराखंड का राज्य पक्षी | ‘मोनाल’ उत्तराखंड का राज्य पक्षी है। हिमालय के मोर नाम से प्रसिद्ध मोनाल उत्तराखंड ही नहीं अपितु विश्व के सुन्दरतम पक्षियों में से एक है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाला पक्षी मोनाल या हिमालयी मोनाल ‘लोफोफोरस इम्पीजेनस’  (Lophophorus Impejanus) अति सुन्दर और आकर्षक पक्षी है। यह ऊंचाई पर घने जंगलों में पाया जाता है। यह अकेले अथवा समूहों में रहता है। नर का रंग नीला भूरा होता है एवं सिर पर तार जैसी कलगी होती है। मादा भूरे रंग की होती है। यह भोजन की खोज में पंजों से भूमि अथवा बर्फ खोदता हुआ दिखाई देता है। कंद, तने, फल-फूल के बीज तथा कीड़े-मकोड़े इसका भोजन है। मोनाल उन पक्षियों में है जिसके दर्शन विशिष्ट स्थानों पर भी कम संख्या में होते हैं। यह नेपाल का राष्ट्रीय पक्षी भी है। मोनाल को स्थानीया भाषा में ‘मन्याल’ व ‘मुनाल’ भी कहा जाता है।

Buransh2बुरांसहै उत्तराखंड का राज्य वृक्ष | बुरांस उत्तराखंड का राज्य वृक्ष है। बुरांस मध्यम ऊंचाई का सदापर्णी वृक्ष है। यह हिमालय क्षेत्र से लगभग 1500 मीटर से 3600 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। इसकी पत्तियां मोटी एवं पुष्प घंटी के आकार के लाल रंग के होते हैं। मार्च-अप्रैल में जब इस वृक्ष में पुष्प खिलते हैं तब यह अत्यन्त शोभावान दिखता है।  इसके पुष्प औषधीय गुणों से परिपूर्ण होते हैं जिनका प्रयोग कृषि यन्त्रों के हैन्डल बनाने तथा ईंधन के रुप में करते हैं। इसके फूलों से बनाया गया शर्बत हृदय रोगियों के लिये लाभदायक माना जाता है। इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है। इसके फूलों का उपयोग रंग बनाने में भी किया जाता है। बुरांस पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष वृक्ष हैं जिसकी प्रजाति अन्यत्र नहीं पाई जाती है। घने हरे पेड़ों पर बुरांस के सुर्ख लाल रंग के फूल जंगल को जैसे लाल जोड़े में लपेट देते हैं। बुरांस सुंदरता का, कोमलता का और रूमानी भावनाओं का संवाहक फूल माना जाता है। बुरांस में सौंदर्य के साथ महत्व भी जुड़ा है। इन फूलों का दवाइयों में इस्तेमाल के बारे में तो सब जानते ही हैं, पर्वतीय इलाकों में पानी के स्रोतों को बनाए रखने में इनकी बड़ी भूमिका है।

brahmaब्रह्म कमलहै उत्तराखंड का राज्य पुष्प | ब्रह्म कमल उत्तराखंड का राज्य पुष्प है। ब्रह्म कमल का उल्लेख वेदों में भी मिलता है। जैसा कि नाम से ही विदित है, ब्रह्म कमल नाम उत्पत्ति के देवता ब्रह्मा जी के नाम पर रखा गया है। इसे “सौसूरिया अब्वेलेटा” (Saussurea Obvallata) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक बारहमासी पौधा है। यह ऊंचे चट्टानों और दुर्गम क्षेत्रों में उगता है। यह कश्मीर, मध्य नेपाल, उत्तराखण्ड में  फूलों की घाटी, केदारनाथ-शिवलिंग क्षेत्र आदि स्थानों में बहुतायत में होता है। यह 3600 से 4500 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। पौधे की ऊंचाई 70-80 सेंटीमीटर होती है।