उत्तराखंड | इन इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा, सभी जिलाधिकारों को ये निर्देश जारी

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड सरकार ने मानसून से पहले आपदा प्रबंधन से संबंधित सभी तरह की तैयारियों पूरी करने के निर्देश सभी जिलाधिकारियों को दिए हैं।

शासन से जारी निर्देशों के तहत जिलाधिकारियों को बाढ़, भूस्खलन के संभावित खतरे वाले संवेदनशील स्थानों के चिन्हीकरण और प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में सतर्कता और खतरे से निपटने के हर तरह के उपायों की तैयारी रखने को कहा गया है।

जनपदों में प्राथमिकता के आधार पर भूस्खलन, बाढ़ से संबंधित संवेदनशील स्थानों के चिन्हीकरण, मानसून के दौरान आपातकालीन परिचालन केंद्रों की स्थापना और बाढ़ नियंत्रण केंद्रों को 24 घंटे सक्रिय रखने पर भी जोर दिया गया है।

शासन ने मानसून के दौरान नदियों के जलस्तर को लेकर खास सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। निगरानी के लिए केंद्रीय जल आयोग, आपदा न्यूनीकरण केंद्र, सिंचाई विभाग व मौसम विभाग के बीच समन्यव से नदियों के बहाव व जलस्तर पर लगातार निगाह रखने को कहा गया है।

प्रदेश के मैदानी जनपदों मसलन हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में बाढ़ सुरक्षा से संबंधित तैयारी की कार्ययोजना तैयार रखने को कहा गया है। प्रदेश के कपकोट, धारचूला, मुनस्यारी, रुद्रप्रयाग जनपद, मोरी, नैटवाड़, चमोली जनपद के कुछ इलाकों के भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील होने के कारण उन पर खास निगाह रखने को कहा गया है। भूस्खलन से मार्ग बाधित होने पर वैकल्पिक मार्ग की कार्ययोजना भी तैयार करनी होगी।

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