त्रिवेंद्र जी, हमारे फैसले पलटिए, आप डबल इंजन की सरकार हैं: हरीश रावत

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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) पूर्व सीएम हरीश रावत ने देहरादून के जौलीग्रांट हवाई अड्डे का नाम बदले जाने को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है।

हरीश रावत ने कहा कि राज्य सरकार माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के नाम पर जौलीग्रांट हवाईअड्डे का नाम रखे जाने का संकल्प लेकर के विधानसभा में आ रही है। नामकरण के लिए किसी संकल्प की आवश्यकता नहीं है। हमने सैकड़ों नामकरण किए, यदि हर नामकरण के लिए संकल्प की आवश्यकता पड़े, ये तो प्रशासनिक निर्णय है, प्रशासनिक निर्णयों पर विधानसभा की मोहर लगवाने की कोई आवश्यकता नहीं है।

रावत ने आगे कहा कि आप हमारे उस निर्णय को पलटना चाहते हैं जिसमें हमने जौलीग्रांट हवाईअड्डे का नाम आदिगुरु शंकराचार्य जी के नाम पर रखने का निर्णय लिया है। आप बदलिए, आप निर्वाचित सरकार हैं और डबल इंजन की सरकार हैं, मगर उसके लिए विधानसभा के संकल्प की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि केंद्र सरकार ने हमारे प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी थी।

पूर्व सीएम ने अपनी तत्कालीन सरकार के इस फैसले पर तर्क देते हुए कहा कि हमने इसलिए आदिगुरु शंकराचार्य के नाम पर जौलीग्रांट क्योंकि प्रवेश द्वार है केदारनाथ के लिए, रखा था ताकि ये संदेश जाए कि कृतज्ञ उत्तराखंड उस महापुरुष जिसने उत्तराखंड में आकर के हमको संस्कारित करने का काम किया, हम लोगों को मर्यादित करने का काम किया, जीवन का रास्ता दिखाने का काम किया, हम उनको स्मरण कर सकें, उनको प्रणाम कर सकें और देश और दुनिया को ये संदेश जाए जो भी हवाई अड्डे पर उतरे कि हां उत्तराखंड आदिगुरु के प्रति समर्पित है।

उन्होंने आगे कहा कि बहरहाल मैं अटल जी का महत्व कम नहीं समझता हूं उत्तराखंड के लिए मगर उसके लिए अच्छा होता कि आप हमारे सिडकुल, सिडकुल रुद्रपुर, सिडकुल हरिद्वार या सिडकुल सितारगंज का नामकरण आप अटल बिहारी वाजपेयी जी और नारायण दत्त तिवारी जी के नाम पर कर देते क्योंकि इन लोगों के समय में इस सिडकुल की नीति क्रियान्वित हुई। यूं तो ये नीति नार्थ ईस्ट के लिए और हिमालयन स्टेट्स के लिए डॉ. मनमोहन सिंह जी ने वित्त मंत्री के रूप में बनाई थी, ये कांग्रेस सरकार की नीति थी। मगर लागू करने का समय तब आया हमारे लिए जब हम राज्य बन पाए तो वो राज्य बनने के बाद ये निर्णय लागू करवाने में अटल जी की सदाशयता और तिवारी जी के प्रयास, प्रयास तो हमलोगों ने भी किये थे, हमारी मांग तो राज्य आंदोलन के एजेंडे में ही सम्मिलित थी जब हम कहते थे कि हमको राज्य दो, तो उस समय हमने ये भी मांगा था कि हमको स्पेशल इकोनामिक और इंडस्ट्रियल पैकेज दिया जाए, जो नॉर्थईस्ट पर लागू है, वो हम पर भी लागू किया जाएगा।

बहरहाल उन दो महापुरुषों के नाम पर इन सिडकुलों के नाम रखे जा सकते थे, उसके लिए कोई आवश्यक नहीं था कि आप जौलीग्रांट हवाई अड्डे का ही चयन करते। बहरहाल आप सत्तारूढ़ है आपको जो अच्छा लग रहा है करिए।

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