यदि मैं पहले का हरीश रावत होता तो अभी तक…

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देहरादून [अमित तिवारी] पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बारिश और भूस्खलन से प्रभावित लोगों को पूर्ण मुआवजा न मिलने की बात कही है। रावत ने कहा कि हमने अपनी सरकार में मुआवजे की राशि को तीन गुना तक बढ़ा दिया था लेकिन भाजपा सरकार में ऐसा नहीं हो रहा है।

हरीश रावत ने इस संबंध में अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि बरसात में पहाड़ों में भूस्खलन और उसमें दबकर के मरने की घटनाएं हर वर्ष होती है। मानवीय संवेदना का उच्चतम रूप भी देखने को मिलता है जब राज्य सरकार और निजी संस्थायें मदद के लिए आगे आते है। उत्तराखंड का मुनस्यारी का भूभाग इस समय भयंकर भूस्खलन और प्लैश फ्लड से पीड़ित है। कई लोग दबकर के मर गए है। यदि मैं पहले का हरीश रावत होता तो अभी तक उन गांवों में पंहुच गया होता। मैं उम्मीद करता हूं मेरे साथी कांग्रेस जन उन दुखी परिवारों के साथ खड़े होकर उनकी मदद कर रहे होंगे। मैं राज्य सरकार से भी प्रार्थना करना चाहता हूं कि वो तत्परता से ऐसे परिवारों की सहायता के लिए आगे आएं।

मुझे खुशी है कि हमने 2016 में आपदा के सहायता के मानक पूरी तरीके से जनोन्मुखी बना दिये थे। कई मामलों में मुवावजे की राशि को ढाई गुना/ तीन गुना तक बढ़ा दिया था। जहां किसी के घर में दरार होती थी, उसको आंशिक क्षति माना जाता था, हमने कहा नहीं यदि दरार से भवन की स्थिरता खतरे में है तो ऐसे को पूर्ण क्षतिग्रस्त माना जाएगा और भवन बनाने के लिए धनराशि को तीन गुना हमने बढ़ा दिया।

रावत ने आगे लिखा कि हमने जो प्लैश फ्लड में घरों में मलवा जाता है उसकी मुआवजा की राशि बर्तनों, खाने का सामान दूसरे जो साज-सामान घर के अंदर के है उन सबके मुआवजा की अलग-अलग राशियां बना दी थी। पशुधन की राशि भी हमने पहले से बढ़ा दी थी। लेकिन मुझे पता चला है कि कोटद्वार में अभी तक उस बढ़ी हुई धनराशि के अनुरूप मुआवजा कोटद्वार के आपदा पीड़ितों को नहीं मिल रहा है।

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