12 ज्योर्तिलिंगों में श्रेष्ठ केदारनाथ में साक्षात शिव निवास करते हैं

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केदारनाथ (उत्तराखंड पोस्ट ब्यूरो) बारह ज्योर्तिलिंगों में श्रेष्ठ केदारनाथ में साक्षात शिव निवास करते हैं। केदार उन अनगढ़ शिलाओं और शिखरों को भी कहते हैं जिनमें भगवान शिव का निवास माना जाता है।

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सम्पूर्ण पापों का नाश करने वाली मोक्षदायिनी केदार भूमि के वर्णन से धर्मशास्त्र भरे हैं। शिव पुराण, पद्म पुराण, कूर्म पुराण, स्कन्द पुराण, वाराह पुराण, सौर पुराण, वामन पुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण तथा लिंग पुराण आदि में केदार तीर्थ को मनुष्य के सम्पूर्ण पापों का नाशक और मोक्षदायक बताया गया है।

उत्तराखंड का ‘केदार खण्ड’ भाग ऊंची पर्वत श्रेणियों में हिमालय की गोद में फैला हुआ है। इसी सम्भाग से गंगा यमुना का उद्गम होने से इसका महत्व आदि काल से ही रहा है। प्रथम देव आत्मा ऋषि कुल शिरोमणि शिव की साधना स्थली इस भू-भाग से सम्बन्ध्ति रही। यह शिव धम और भगवान रूप में पूजा का तीर्थ धाम मान कर पूजा जाता रहा।

महाभारत के युद्ध के बाद अपने परिजनों के वध का दंश झेल रहे पांडव जब अपने गोत्र वध के पाप से मुक्ति के लिए आए तो भगवान शिव भैंसे का रूप धरण कर वहा से चले गये। पाण्डवों द्वारा पाप मुक्ति की प्रार्थना पर भगवान शिव भैंसे के पिछले धड़ के रूप में वहाँ प्रकट हुए जो आज भी केदारनाथ में विद्यमान है। व्यास स्मृति में कहा गया है कि केदार तीर्थ करने से मनुष्य सब प्रकार के पापों से छूट जाता है।

kedarnath

केदारनाथ का मंदिर पांडवों का बनाया हुआ प्राचीन मन्दिर है। श्रद्धालु सबसे पहले केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद ही बद्रीनाथ के दर्शन करने जाते हैं।

समुद्र की सतह से तीन हजार पांच सौ 81 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस तीर्थ में प्रकृति का अनुपम सौन्दर्य मन को मोह लेता है।

कहते हैं कि इसके दर्शन करने से महापापी भी पापों से छूट जाता है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों के से एक केदारनाथ के पूर्वी ओर अलकनन्दा तथा पश्चिम की ओर मन्दाकिनी नदी बहती है। मान्यता है कि नर-नारायण ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने प्रकट होकर यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में वास करना स्वीकार किया। यहां सबसे पहले पाण्डवों ने मन्दिर निर्माण करवाया। बाद में आदि शंकराचार्य, नेपाल नरेश और ग्वालियर के राजा ने अलग अलग समय पर इसका जीर्णोद्धार करवाया। यहां भगवान शंकर शिवलिंग के रूप के बजाय तिकोनी शिला के रूप में हैं। केदारनाथ की श्रृंगारमूर्ति पंचमुखी है जो हर समय वस्त्रों व आभूषणों से अलंकृत रहती है। सर्दियों में मन्दिर के कपाट बन्द रहने पर केदारनाथ के चलविग्रह को ऊखीमठ ले जा कर लगभग छः माह तक वहां के ओंकारेश्वर मन्दिर में भगवान की पूजा की जाती है।

केदारनाथ मन्दिर के बाहरी प्रासाद में पार्वती, पांडव, लक्ष्मी आदि की मूर्तियां हैं। मन्दिर के समीप हंसक कुण्ड है जहां पितरों की मुक्ति हेतु श्राद्-तर्पण आदि किया जाता है। मंदिर के पीछे अमृत कुण्ड है तथा कुछ दूर पर रेतस कुण्ड है। ऐसा सुना जाता है कि उसके जल पीने मात्र से ही मनुष्य शिव रूप हो जाता है।

तो फिर देर किस बात की आप भी चले आईए भोले बाबा के दर्शन के लिए केदारनाथ…केदार बाबा आपके सारे कष्ट हर लेंगे।

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