जानिए इन छह सीटों पर क्यों मुश्किल है BJP की जीत की राह ?

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उत्तराखंड में सत्ता परिवर्त का दावा कर रही भाजपा के दावे पर उनकी ही पार्टी के बागी नेता पानी फेर सकते हैं। भाजपा के 17 बागी 16 विधानसभा सीटों पर पार्टी की जीत का गणित गड़बड़ा सकते हैं। अब ख़बरें एक क्लिक पर इस लिंक पर क्लिक कर Download करें Mobile App –https://play.google.com/store/apps/details?id=app.uttarakhandpost

इन 16 विधानसभा सीटों मे से 10 सीटें गढ़वाल मंडल की हैं और 6 सीटें कुमाऊं मंडल की हैं। खास बात ये है कि तमाम ओपिनियन पोल में भाजपा को कुमाऊं की अपेक्षा गढ़वाल में बढ़त लेते हुए दिखाया जा रहा है लेकिन गढ़वाल की 10 विधानसभा सीटों पर पार्टी के बागी नेता पार्टी की चाल को बिगाड़ने का काम कर सकते हैं।

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गढ़वाल की इन सीटों पर डटे हैं भाजपा के बागी

  • गंगोत्री से सूरत राम नौटियाल
  • केदारनाथ से आशा नौटियाल
  • घनसाली से धनीलाल शाह और प्रेमला त्रिकुटिया
  • नरेन्द्रनगर से ओम गोपाल रावत
  • प्रतापनगर से राजेश्वर प्रसाद
  • सहसपुर से लक्ष्मी अग्रवाल
  • ऋषिकेश से संदीप गुप्ता
  • खानपुर से रविन्द्र पनियाल
  • लक्सर से कुशलपाल सैनी
  • चौबट्टाखाल से कविन्द्र इष्टवाल

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इन दस विधानसभा सीटों में बागियों की ताकत का अंदाजा लगाया जाए तो सामने आता है की तीन विधानसभा सीटों गंगोत्री, केदारनाथ और नरेन्द्रनगर विधानसभा में ताल ठोक रहे सूरत राम नौटियाल, आशा नौटियाल और ओम गोपाल रावत अच्छा जनाधार रखते हैं और इन तीन सीटों पर मजबूत स्थिति में हैं। ऐसे में कम से कम इन तीन सीटों पर भाजपा के लिए जीत हासिल करना आसान नहीं होगा। हालांकि समीकरण तो बागी बाकी की सात विधानसभा सीट पर भी बिगाड़ सकते हैं।

KUMAOUN

वहीं कुमाऊं मंडल की अगर बात करें तो तमाम ओपिनियन पोल में कुमाऊं में भाजपा की अपेक्षा कांग्रेस को मजबूत दिखाया जा रहा है। ऐसे में कुमाऊं की 6 विधानसभा सीटों पर भाजपा के बागियों का ताल ठोकना पार्टी के माथे पर पसीना ला दिया।

कुमाऊं की इन सीटों पर डटे हैं भाजपा के बागी

  • डीडीहाट से किशन सिंह
  • रानीखेत से प्रमोद नैनवाल
  • नैनीताल से हेम आर्या
  • कालाढूंगी से हरेन्द्र सिंह
  • जसपुर से सीमा चौहान
  • काशीपुर से राजीव अग्रवाल

कुमाऊं की इन 6 विधानसभा सीटों में बागियों की ताकत का अंदाजा बताता है कि इनमें से तीन विधानसभा सीटें रानीखेत, नैनीताल और कालाढूंगी ऐसी सीटें हैं जहां पर बागियों को नजरअंदाज करना भाजपा को भारी पड़ सकता है।हालांकि बागियों को बाकी की बची तीन विधानसभा जसपुर, काशीपुर और डीडीहाट में भी कमतर समझना गलत होगा।

चुनाव में जीत हार के लिए एक-एक वोट की कीमत है। एक ही वोट से जीत भी होती है और एक ही वोट से हार भी। ऐसी स्थिति में 16 विधानसभा सीटों पर भाजपा के बागियों का डटे रहना राज्य की सत्ता में वापसी का सपना देख रही भाजपा के लिए खतरे की घंटी की तरह है, देखना रोचक होगा कि 11 मार्च को जब ईवीएम खुलेंगी तो किसकी किस्मत खुलेगी।