NGT ने पूछा- चारधाम परियोजना के काम पर रोक क्यों नहीं लगाई जाए

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नई दिल्ली (उत्तराखंड पोस्ट ब्यूरो) राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने गुरुवार को केंद्र और उत्तराखंड सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि चारधाम राजमार्ग परियोजना पर चल रहे काम पर रोक क्यों नहीं लगनी चाहिए।

यह राजमार्ग राज्य के चार पवित्र शहरों गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ को सभी मौसमों में जोड़ेगा। न्यायमूर्ति जवाद रहीम की अध्यक्षता वाली पीठ ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय तथा उत्तराखंड सरकार से 12 मार्च तक जवाब मांगा है।

इससे पहले एक अर्जी दायर कर आरोप लगाया गया था कि वन भूमि के 356 किलोमीटर लंबे रास्ते को मिलाने के लिए 25 हजार पेड़ों को काट दिया गया हैय़ यह वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 और पर्यावरण प्रभाव आंकलन अधिसूचना 2006 का पूरी तरह से उल्लंघन है।

अधिकरण देहरादून के एनजीओ सिटिजन्स फॉर ग्रीन दून और अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रहा था,जिसमें चारधाम परियोजना पर रोक लगाने की मांग की गई है। साथ में उन स्थानों की पहचान करने की भी मांग की गई है, जहां पर हाल में काटे गए पेड़ों की वजह से भूस्खलन आ सकता है। इसमें आरोप लगाया गया है कि उत्तराखंड में केदारनाथ, बद्रीनाथ यमुनोत्री और गंगोत्री को जोड़ने के लिए सड़क चौड़ा करने का काम पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है।

बता दें कि उत्तराखंड में आई बाढ़ के बाद चारधाम से संपर्क बाधित हुआ है। इसमें कई परेशानियां थीं और इनकी पहचान की गई है, इसके विकास के लिए विशेषज्ञों के एक दल की नियुक्ति की गई है जिसमें आईआईटी के सलाहकार भी शामिल हैं। इस सड़क परियोजना में सुरंगों, पुल, बाईपास और वायाडक्टों का निर्माण किया जाना शामिल है।

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