इमरजेंसी की याद दिलाते हुए मोदी का कांग्रेस पर वार, कहा- आप इतने ऊंचे चले गए कि जमीन दिखनी बंद हो गई

नई दिल्ली (उत्तराखंड पोस्ट) प्रधानमंत्री मोदी ने आज लोकसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दिया. प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के अभिभाषण का धन्यवाद दिया ही साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर भी जमकर हमला बोला. प्रधानमंत्री ने कहा कि आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि जमीन दिखना बंद हो गई है. आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि जो जमीन पर हैं वो दिखना बंद हो गए हैं. उन्होंने कहा कि मेरी कामना है कि आप और ऊंचे हों. प्रधानमंत्री मोदी के भाषण से पहले लोकसभा में मोदी मोदी के नारे भी लगे.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण की शुरूआत करते हुए कहा, ”राष्ट्रपति जी ने अपने भाषण में हम भारत को कहां ले जाना चाहते हैं, कैसे ले जाना चाहते हैं, भारत के सामान्य मानवीय की आशा, आक्षाओं की पूर्ति के लिए किन चीजों को प्राथमिकता देना चाहते हैं उसका एक खाका खींचने का प्रयास किया है. राष्ट्रपति जी का भाषण देश के सामान्य मानवीय ने जिस आशा और आकांक्षाओं के साथ भेजा है उसकी प्रतिध्वनि है. इसलिए राष्ट्रपति जी के भाषण का धन्यवाद देश के कोटि कोटि जनों का भी धन्यवाद है.

एक सशक्त, सुरक्षित, संवृद्ध, समावेशी राष्ट्र का सपना हमारे देश के कई महापुरुषों ने देखा है. उसको पूर्ण करने के लिए संकल्पवद्ध होकर के अधिक गति के साथ हम सब को मिल जुलकर आगे बढ़ना है. यह समय की मांग है और देश की अपेक्षा है. आज के वैश्विक वातावरण में यह अवसर भारत को खोना नहीं चाहिए. इस चर्चा में करीब 60 सांसदों ने हिस्सा लिया. जो पहली बार आए हैं उन्होंने अच्छे से अपनी बात रखने का प्रयास किया, चर्चा को सार्थक बनाने का प्रयास किया. जो अनुभवी हैं उन्होंने अपने अपने तरीके से चर्चा को आगे बढ़ाया.”

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शुरुआती भाषण में किसी का नाम लिए बिना विपक्ष पर तंज कसा. उन्होंने कहा, ”यह बात सही है कि हम सब मनुष्य़ हैं, तीस दिन में मन में जो छाप रहती है उससे निकलना कठिन रहता है. इसलिए चुनावी भाषणों का असर भी देखने को मिला और वो बाते भी यहां देखने को मिल रही थीं. अध्यक्ष जी आप नए हैं, लोगों के प्रयास होता है कि जब आप नए हों तो शुरू में ही थोड़ी परेशानी में डाल दिया जाए. लेकिन आपने बहुत अच्छे ढंग से इन सब चीजों को चलाया. इसके लिए आपको बहुत बहुत बधाई देता हूं.”

पूर्ण बहुमत वाले जनादेश के लिए प्रधानमंत्री ने देश की जनता को धन्यवाद दिया, उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है. प्रधानमंत्री ने कहा, ”कई दशकों के बाद देश ने एक मजबूत जनादेश दिया है, एक सरकार को दोबारा फिर से लाए हैं. पहले से अधिक शक्ति देकर लाए हैं. आज के सामान्य वातावरण में, भारत जैसे लोकतंत्र में हर भारतीय के लिए गौरव का विषय है कि हमारा मतदाता कितना जागरुक है. वह अपने से ज्यादा अपने देश को प्यार करता है. देश के लिए निर्णय करता है, यह चुनाव में साफ साफ नजर आया. देश के मतदाता अभिनंदन के अधिकारी हैं. 2014 में हम पूरी तरह नए थे लेकिन उन स्थितियों से बाहर निकलने के लिए एक प्रयोग के लिए हमें मौका दिया. लेकिन 2019 का जनादेश पूरी तरह कसौटी पर कसने के बाद दोबारा हमें बैठाया है. यह लोकतंत्र की बहुत बड़ी जीत है.”

नीचे क्लिक कर सुनिए पीएम मोदी की पूरी स्पीच- 

प्रधानमंत्री ने कहा, ”पूर्ण रूप से सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाए की इन नीतियों को लागू करने का सफल प्रयास को लोगों ने फिर से एक बार अपना अनुमोदन देकर देश की सेवा करने के लिए दोबारा बैठाया है. एक व्यक्ति के लिए उसके जीवन में इससे बड़ा संतोष नहीं होता है जब जनता जनार्दन जो ईश्वर का रूप होती है वो आपके काम को अनुमोदित करती है. यह चुनावी हार जीत या आंकड़ों का खेल नहीं है, ये जीवन की आस्था की चीज है. कौन हारा कौन जीता इस दायरे में इस चुनाव को देखना मेरी सोच का हिस्सा नहीं हो सकता.”

प्रधानमंत्री ने कहा, ”2014 में जब देश की जनता ने मौका दिया, तब सेंट्रल हॉल में मैंने सहज भाव से कहा था कि मेरी सरकार गरीबों को समपर्ति है. आज यह बात मैं बड़े संतोष के साथ कह सकता हूं, यह संतोष जनता ने ईवीएम के बटन को दबाकर भी व्यक्त किया है. जब चर्चा शुरू हुई तब पहली बार सदन में आए प्रताप सारंगी जी ने और हिना गावी जी ने जिस तरह से बात को रखा उसके बाद मैं कुछ भी ना कहूं तब भी समझता हूं कि बात पहुंच गई.”

प्रधानमंत्री ने कहा, ”देश के तमाम महापुरुषों ने अंत्योदय की बात कही, आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति की बात कही. पिछले पांच साल के कार्यकाल में हमारे मन में यही भाव रही कि जिसका कोई नहीं उसके लिए सिर्फ सरकार होती है. हमने देश के आजादी के बाद जाने अनजाने में ऐसा कल्चर स्वीकार कर लिया जिसमें सामान्य मानवी को अपने हक के लिए जूझना पड़ता है. क्या वो इस आजादी के लिए निकला था? उसे कुछ मिले ना मिले लेकिन हमने मान लिया था कि चीजें ऐसे ही चलती हैं. मैं संतोष के साथ कह सकता हूं हमने कठिनाइयों के बाद भी दिशा को छोड़ा नहीं हैं. ना डायवर्ट ना डायल्यूट….हम उस मकसद से चलते रहे और देश दूध का दूध और पानी का पानी भली भांति कर सकता है.”

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि आप इतने ऊंचे हो गए हैं कि आपको नीचे का दिखना बंद हो गया है. प्रधानमंत्री ने कहा, ”यहां बहुत अच्छी बातें बताई गईं, ज्यादातर चुनावी छाया वाली बातें बताई गईं. यहां कहा गया कि हमारी ऊंचाई को कोई कम नहीं कर सकता. ऐसी गलती हम कर बी नहीं सकते. हम किसी की लकीर छोटी नहीं कर सकते हम अपनी लकीर को बढ़ाने के लिए जीवन कपा देते हैं. आपको आपकी ऊंचाई मुबारक हो क्योंकि आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि जमीन दिखना बंद हो गई है. आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि जो जमीन पर हैं वो दिखना बंद हो गए हैं. इसीलिए आपकी ऊंचाई मेरे लिए अत्यंत संतोष की बात है. मेरी कामना है कि आप और ऊंचे बढ़ें. हमारी कोई स्पर्धा है कि हमारा सपना जड़ों से जुड़ने का है. हमारा रास्ता जड़ों से जुड़कर देश को आगे ले जाने का है.”

कांग्रेस पर हमलावर होते हुए प्रदानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस की तरफ से बोलने वाले किसी नेता ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम तक नहीं लिया. प्रधानमंत्री ने कहा, ”कुछ लोगों लगता है कि उनका नाम नहीं आया तो उनको परेशानी हो जाती है. ऐसा होना नहीं चाहिए लेकिन होता है. मैं चुनौती देता हूं कि 2004 से पहले देश में अटल जी की सरकार थी. लेकिन 2004 से लेकर 2014 तक शासन में बैठे हुए लोगों ने अधिकृत कार्यक्रम में अटल जी के अच्छे कामों का उल्लेख किया हो उसे सदन के पटल में रखें. इतना ही नहीं नरसिम्हा राव की सरकार की तारीफ की हो वो रखें. इतना ही नहीं अभी के भाषण में एक बार भी मनमोहन सिंह जी की नाम बोले होते तो मुझे अच्छा लगता. वे सब बड़े लोग थे मैं उनकी बराबरी में कुछ नहीं हूं. शायद मैं पहला प्रधानमंत्री हूं जिसने दो बार कहा है कि आजादी से लेकर आज तक केंद्र और राज्य में जितनी सरकारें हुईं देश को आगे ले जाने में प्रयास रहा. मैंने सदन में भी कहा है आज फिर कह रहा हूं. हम किसी के योगदान को नकार नहीं रहे.”

कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमने प्रणब मुखर्जी को उनके काम के लिए भारत रत्न दिया. प्रधानमंत्री ने कहा, ”हमें सुनाने का हक उन्हीं को है जिन्होंने कभी किसी को स्वीकार किया हो. वर्ना देश को लगता था कि उनके कार्यकाल में नरसिम्हा राव को भारत रत्न मिलता. मनमोहन सिंह के पहले टर्म के बाद भारत रत्न मिलता लेकिन परिवार के बाहर किसी को कुछ नहीं मिलता. यह हम हैं और हमारी सोच है कि प्रणब दा किस दल से हैं और उन्होंने पार्टी के लिए जावन खपाया ये ना देखकर उनके देश के लिए दिए योगदान के आधार पर निर्णय लिया. बार बार हमें सुनाया जाता है इसलिए मैं कह रहा हूं.”

प्रधानमंत्री ने आज इमरजेंसी की बरसी के बहाने भी कांग्रेस पर हमला बोला, उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा दाग है जो कभी मिट नहीं सकता. प्रधानमंत्री ने कहा, ”आज 25 जून है, बहुत लोगों को जानकारी भी नहीं है कि 25 जून क्या है. अगल बगल में पूछना पड़ता है. 25 जून की उस रात को देश की आत्मा को कुचल दिया गया था. भारत में लोकतंत्र संविधान से पैदा नहीं हुआ भारत में लोकतंत्र हमारी आत्मा में है. इसलिए देश की आत्मा को कुचल दिया गया था. देश के महापुरुषों को जेल की सलाखों के पीछे बंद कर दिया गया था. आज 25 जून को हम लोकतंत्र के प्रति अपना संकल्प को और मजबूती से बताना होगा. ”

प्रधानमंत्री ने कहा, ”उस समय जो जो भी इस के भागी थे, यह दाग मिटने वाला नहीं है. इस दाग को इसलिए याद करने की जरूरत है जिससे देश में फिर कोई ऐसा पैदा ना हो जिसे पिर इस रास्ते पर जाने की इच्छा हो जाए. उस समय जब मीडिया पर ताले लग चुके थे, हर किसी को लगता था कि पुलिस आकर गिरफ्तार कर लेगी. देश ने उस समय जाति, धर्म से ऊपर उठकर लोकतंत्र को स्थापित किया था. इस बार फिर जाति धर्म और संप्रदाय से ऊपर उठक देश के लिए मतदान किया गया.”

पीएम मोदी अपने भाषण के दौरान शायराना भी हुए. प्रधानमंत्री ने कहा, ”जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का फिर देखना फिजूल है कद आसमान का. इस मिजाज के साथ हमें आगे के लिए नए हौसले के साथ आगे बढ़ना है. अभी तो सरकार को सिर्फ तीन सप्ताह हुए हैं. हमारे यहां कहावत है कि पुत्र के लक्षण पालने में ही दिख जाते हैं. हमें भी लगता था कि हम जाकर मालाएं पहनें. तीन हफ्ते में कितने महत्वपूर्ण निर्णय लिए सरकार ने…छोटे किसान हों, छोटे दुकानदार हों. सबके लिए निर्णय हुआ.”

प्रधानमंत्री ने कहा, ”सरदार सरोवर डैम, यह 1961 में पंडित नेहरू ने उसकी नींव रखी थी. वो सरदार पटेल का सपना था. दशकों तक मंजूरी नहीं मिली. उस समय जो 6 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट था वो बढ़कर 60-70 हजार करोड़ पर पहुंच गया. सोचिए क्या सेवा की देश की. इतना ही नहीं यूपीए सरकार के समय भी उसे रोकने का प्रयास किया. हमने आकर उसे पूरा किया, मुझे उसके लिए अनशन पर बैठना पड़ा. आज करीब चार करोड़ लोगों को पानी मिल रहा है.”

देश इस वक्त जल संकट से जूझ रहा है, पीएम ने अपने भाषण में इस जल संकट का भी जिक्र किया. प्रधानमंत्री ने कहा, ”पानी की तकलीफ क्या होती है वो राजस्थान और गुजरात के लोग ज्यादा जानते हैं. इसलिए हमने अलग से जलशक्ति मंत्रालय बनाया. जलसंकट को गंभीरता से लेने होगा. इस सीजन में हम जितना बल जल संचय पर दे सकते हैं हमें देना चाहिए. पानी बचाना है इस काम को करके हम सामान्य मानवीय के जीवन को बचाने का काम कर सकते हैं. हर घर को जल, इस मंत्र को लेकर आगे बढ़ना है. यह कठिन काम है लेकिन किसी को इसमें हाथ लगाना पड़ेगा, हमने लगाया है. सरकारी दायरे से बाहर जाकर पानी बचाना चाहिए.”

प्रधानमंत्री ने कहा, ”जब अर्थव्यवस्था में हम 11 या 12 नंबर पर पहुंचे थे तो इसी सदन में इसे बहुत बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया था. लेकिन जब 6 पर पहुंचे तो ऐसा लगा कि ऐसा क्यों हो गया. देश वही है, हम देश के लोग हैं, जब 11 पर आने पर खुशी हुई तो 6 पर आने पर क्यों नहीं होनी चाहिए. कब तक इतने ऊंचे रहेंगे कि नीचे दिखाई ही ना दे. इसीलिए 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हम सबका लक्ष्य होना चाहिए. इससे किसका नुकसान होने वाला है, हम सभी का फायदा होगा. भारत दुनिया की पहली पांच अर्थव्यवस्था में कैसे शामिल हो, इसका प्रयास होना चाहिए. स्टार्टअप की दुनिया में हमारे नौजवान बहुत कुछ कर रहे हैं. जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और अब जय अनुसंधान….हम देश में इन चीजों को कैसे बल दें इसका प्रयास होना चाहिए.”

प्रधानमंत्री ने कहा, ”हमें इसलिए कोसा जा रहा है कि फलाने को जेल में क्यों नहीं डाला. यह इमरजेंसी नहीं है सरकार किसी को भी जेल में डाल दे यह काम न्यायपालिका का है. हम कानून से चलने वाले लोग हैं. अगर किसी को जमानत मिलती है तो उसे एंज्वाय करें. बदले के भाव से काम नहीं होना चाहिए लेकिन भ्रस्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी. देश ने हमें इतना दिया है कि हमें गलत रास्ते पर जाने की जरूरत नहीं है.”

 

 

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद का मुद्दे पर भी सभी से मिलकर लड़ने की अपील की. पीएम ने कहा, ”आतंकवाद पर देश में अलग अलग मत क्यों होने चाहिए. यह मानवता के लिए बहुत बड़ा संकट है, यह मानवता को चुनौती है. जो भी मानवता में विश्वास रहते हैं उन्हें इसके खिलाफ लड़ना होगा.”

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में तीन तलाक बिल का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, ”महिला सशक्तिकरण की बात करें तो कांग्रेस को इतने मौके मिले. लेकिन वो शायद इतने ऊंचे हैं कि कई चीजें छुप जाती हैं. जब यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात चल रही थी तब कांग्रेस उसे मिल कर गई और हिंदू कोड बिल लाकर अपनी गाड़ी चला ली. उसके 35 साल बाद फिर शाह बानों के मामले में फिर अवसर मिला लेकिन ऊंचाई ने नीचे की चीजें देखने से मना कर दिया. आज 35 साल बाद फिर एक बार कांग्रेस के पास मौका आया है, हम बिल लेकर आए है, हम इस देश की नारी के गौरव के लिए बिल लेकर आए हैं. जब शाह बानों का मामला चल रहा था उस समय के एक मंत्री ने टीवी इंटरव्यू में एक चौंकाने वाली बात कही. उन्होंने कहा कि मुसलमानों के उत्थान की जिम्मेदारी कांग्रेस की नहीं है. अगर वो गटर में रहना चाहते हैं तो रहें.”

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण को खत्म करते हुए कहा, ”आइए हम सब मिलकर एक नए भारत के निर्माण के लिए, राजनीति की सीमाओं से ऊपर देश होता है. देश के करोड़ों लोगों की आक्षाओं को पूरा करते हुए, राष्ट्रपति जी ने जो मार्गदर्शन दिया है उसके लिए उनका धन्यवाद करते हैं. हम सिर्फ उनके भाषण का धन्यवाद ही नहीं, बल्कि उसे जी करके राष्ट्रहित में कुछ करके सच्चे अर्थ में धन्यवाद पारित करें. इस चर्चा में शामिल हुए सभी सदस्यों का धन्यवाद करता हूं.”

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