वीडियो | जो लौट के घर न आए, उत्तराखंड के इन वीर सपूतों को शत् शत् नमन

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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड को वीरों की भूमि यूं ही नहीं कहा जाता। 14 फरवरी से लेकर 19 फरवरी तक 5 दिनों में उत्तराखंड के चार जांबाजों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

दो सीआरपीएफ जवान शहीद | पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिल पर हुए आतंकी हमले में उत्तराखंड के दो जांबाजों ने भी शहादत दी।  ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा के रहने वाले जवान वीरेन्द्र सिंह और उत्तरकाशी के रहने वाले जवान मोहन लाल इस आतंकी हमले में शहीद हो गए।

दो युवा मेजर शहीद | वहीं 16 फरवरी को देहरादून के रहने वाले मेजर चित्रेश बिष्ट जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान की बार्डर एक्शन टीम (बैट) की ओर से बिछाई गई आईईडी को डिफ्यूज करते समय हुए विस्फोट में शहीद हो गए। 18 फरवरी को पुलवामा सीआरपीएफ काफिले पर आतंकि हमले के मास्टरमाइंड के एनकाउंटर के दौरान मेजर विभूति ढौंडियाल ने शहादत दी।

शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल – 55 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात शहीद मेजर का आवास देहरादून के नेश्विवला रोड के 36 डंगवाल मार्ग में है। शहीद मेजर तीन बहनों के इकलौते भाई थे। एक साल पहले ही मेजर विभूति की शादी निकिता से हुई थी। उनके पिता का 6 साल पहले ही निधन हो चुका था। घर पर उनकी मां और पत्नी है।

जिस ऑपरेशन में देहरादून के मेजर समेत तीन अन्य जवानों ने अपनी शहादत दी है, इस ऑपरेशन में शहीद जवानों के साथियों ने पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड को मार गिराया है। गाजी के साथ सुरक्षाबलों ने दो और आतंकवादी को ढ़ेर किया है। अंतिम विदाई से पहले शहीद की बहादुर पत्नी ने प्यार से अपने पति का माथा चूमा और कहा- मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हैं…जय हिंद मेरे हीरो। उन्होंने आगे कहा कि सबको पता है कि मैं आपको बहुत प्यार करती हूं। हमेशा आपकी फिक्र रहती थी। आप मुझे मेरी जान से भी प्यारे हो। आप मुझे ही नहीं बल्कि पूरे देश से प्यार करते थे। सबसे प्यार करते थे। आपने देश के लिए अपनी जिंदगी दे दी।

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उन्होंने कहा कि मैं सभी से निवेदन करती हूं कि वे सहानुभूति न रखें, बल्कि बहुत मजबूत बनें, क्योंकि यह वीर हमारे यहां खड़े किसी भी व्यक्ति की तुलना में बहुत बड़ा है। देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहूति दे दी। आप सच में हीरो हो। मेरे लिए बेहद गर्व की बात है कि मैं आपकी पत्नी हूं। मेरा पति वीर है। मेरा ही नहीं बल्कि पूरे देश का हीरो है। आज जा रहे हो लेकिन याद रखना आप मुझसे कभी दूर नहीं हो सकते। हमेशा मेरे साथ रहोगे। एक अमर प्रेम की तरह। जब तक मेरी सांस चलेगी, तब तक मैं सिर्फ आपको ही प्यार करूंगी। मैं सबसे प्रार्थना करती हूं कि वह इस वीर की शहादत पर सुहानूभुति न जताएं। इस नौजवान की कुर्बानी, जिम्मेदारी, देश के प्रति अहसास को समझें। यूआर माई हीरो, आई लव यू। जय हिंद।

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शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट- जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान की बार्डर एक्शन टीम (बैट) की ओर से बिछाई गई आईईडी को डिफ्यूज करते समय हुए विस्फोट में मेजर चित्रेश बिष्ट शहीद हुए। रानीखेत के पीपली गांव के रहने वाले मेजर चित्रेश का परिवार देहरादून की नेहरू कॉलोनी में रहता है। मेजर चित्रेश की सात मार्च को शादी होने वाली थी। इसके लिए शादी के निमंत्रण पत्र भी बंट चुके थे।

शनिवार को भी पिता एसएस बिष्ट अपने पैतृक गांव शादी के कार्ड बांटने गए थे। वहां से लौटकर आए तो उन्हें मेजर बेटे के साथी की फोन कॉल से खबर मिली कि उनका बेटा चित्रेश ने भारत मां के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी है। चित्रेश के शहीद होने की खबर से शादी की तैयारियों वाले घर में मातम छा गया। शहीद मेजर चित्रेश की शादी आन वाले 7 मार्च को होनी थी लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

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शहीद वीरेन्द्र सिंह – आतंकी हमले में शहीद हुए खटीमा के जवान वीरेंद्र सिंह 20 दिन की छुट्टी के बाद ड्यूटी पर जा रहे थे मगर रास्ते में ही वह शहीद हो गए। शहादत के बाद उनके पिता दीवान सिंह ने कहा के कि उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है। बेटे को याद करते-करते उनकी आंखें कभी डबडबा कर छलक पड़तीं तो कभी भिंचे ओठ पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश दर्शाते हैं। शहीद जवान के ने कहा कि ‘आतंकी देशन से त बदलो लेना चाहिए। मेरा देश इन हमलों का बदला जरूर लेगा।’ शहीद के बड़े भाई जयराम सिंह और राजेंद्र भाई की शहादत से सदमे में हैं।

शहीद जवान विरेंद्र सिंह राणा (36) क्षेत्र के मोहम्मदपुर भुड़िया निवासी दीवान सिंह (80) के पांच बेटों और बेटियों में सबसे छोटे थे। उनकी माता सावित्री देवी का सात वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। बड़े भाई जयराम सिंह वर्ष 2017 में बीएसएफ से सेवानिवृत्त हैं। विरेंद्र के दो मासूम बच्चे बड़ी बेटी रोही (4) और ढाई वर्षीय पुत्र बयान सिंह हैं। बेटी रोही ब्राइट एकेडमी प्रतापपुर में कक्षा एक में पढ़ती है।

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शहीद मोहन लाल – शहीद जवान मोहन लाल रतूड़ी उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के बनकोट गांव के रहने वाले थे। शहीद मोहन लाल रतूड़ी बहुत ही मिलनसार एवं धार्मिक प्रवृत्ति के थे। सेना में भर्ती होने से पहले वे गांव की रामलीला में भगवान राम का पात्र निभाते थे। देश सेवा की इच्छा के चलते वह पारंपरिक कृषि एवं पुरोहित कार्य छोड़कर सेना में भर्ती हुए थे।

बच्चों को पढ़ाई के लिए परिवार को देहरादून ले जाने के बावजूद उन्होंने गांव से नाता नहीं तोड़ा। आजकल वे गांव में अपना नया मकान बनवा रहे थे। इसकी देखरेख के लिए बीते दिसंबर में वे गांव आए थे। तब उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद गांव लौट कर खेती-बागवानी तथा समाजसेवा करने की इच्छा जताई थी लेकिन उनकी ये इच्छा पूरी नहीं हो पाई।

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