सुषमा स्वराज की भाषण शैली का हर कोई था कायल, कई बार की पाकिस्तान की बोलती बंद, देखिए वीडियो

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नई दिल्ली (उत्तराखंड पोस्ट) मंगलवार रात को दिल का दौरा पड़ने से पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में निधन हो गया। सुषमा के अचानक निधन की खबर से देश सदमे में है.

दरअसल चुनावी अभियान हो या संसद या फिर कोई अंतरराष्ट्रीय मंच सुषमा स्वराज अपने जोरदार और सटीक भाषण के लिए जानी जाती थीं। उनकी भाषण कला के मुरीद विपक्षी दल के नेता भी थे। आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त राष्ट्रसंघ के मंच पर सुषमा ने पाकिस्तान को ऐसे घेरा था कि पाकिस्तान के अंदर खलबली मच गई थी।

एक बार सुषमा ने मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर नवाज शरीफ को करारा जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि जिनके अपने घर शीशे के हैं, वे दूसरे पर पत्थर न फेंके। लगे हाथों उन्होंने बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेनाओं द्वारा हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन का मामला उठाकर दुनिया का ध्यान एक बार फिर ना सिर्फ पाकिस्तान की तरफ आकर्षित किया था।

सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 72वें सत्र को संबोधित करते हुए जोरदार भाषण दिया था। इस्लामाबाद पर कटाक्ष करते हुए सुषमा ने कहा था कि जो देश विश्व में विनाश, मौत और निर्दयता का सबसे बड़ा निर्यातक है, वो आज इस मंच से मानवता का उपदेश देकर पाखंड का चैंपियन बन गया है। उन्होंने कहा कि आज भारत की पहचान दुनिया में आईटी की महाशक्ति के रूप में होती है और पाकिस्तान को आतंकवाद निर्यातक देश के रूप में जाना जाता है।

2014 से 2019 तक मोदी सरकार पार्ट-1 में सुषमा स्वराज विदेश मंत्री रही थीं, उसके बाद खराब स्वास्थ्य की वजह से 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। वह 2009 और 2014 में मध्य प्रदेश के विदिशा से चुनाव जीतकर सांसद बनी थीं. उन्होंने 2009 से 2014 तक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की भी भूमिका अदा की थी।

सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1953 को हुआ था। वह बीजेपी की वरिष्ठ नेता होने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट की पूर्व वकील भी थीं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बाद सुषमा स्वराज दूसरी महिला थीं, जिन्होंने विदेश मंत्रालय संभाला था। मात्र 25 वर्ष की उम्र में 1977 में वह पहली बार केंद्रीय कैबिनेट में शामिल हुई थीं। वह दिल्ली की मुख्यमंत्री भी रही थीं।

पंजाब के अंबाला छावनी में जन्मी सुषमा स्वराज ने पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से कानून की डिग्री ली। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पहले जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। आपातकाल का पुरजोर विरोध करने के बाद वे सक्रिय राजनीति से जुड़ गई थीं। सुषमा स्वराज भारतीय संसद की प्रथम और एकमात्र ऐसी महिला सदस्या थीं, जिन्हें आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंटेरियन सम्मान मिला।

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