पहाड़ की संस्कृति, धार्मिक स्थलों को संरक्षित करना जरूरी: रावत

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123मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रविवार को अल्मोड़ा में तीन दिवसीय गोलू महोत्सव का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री रावत ने कहा है कि उत्तराखंड प्रदेश अपनी धार्मिक आस्था के लिए पूरे विश्व में अलग पहचान रखता है। इसलिए पहाड़ की संस्कृति, धार्मिक महत्व के स्थलों को संरक्षित करने के लिए गंभीरता से प्रयास करने होंगे।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री रावत ने चितई में स्थापित सांस्कृतिक परिसर का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों की धार्मिक मान्यताएं जहां के लोगों के जीवन का हिस्सा हैं। रावत ने कहा कि हम अपनी संस्कृति और पौराणिक परम्पराओं को जीवित रख सकें। इसके लिए सभी को मिलजुल कर प्रयास करने होंगे।

Captureमुख्यमंत्री रावत ने कहा कि शिल्प कला को आगे बढ़ाने के लिए शिल्प रत्न पुरस्कार देने का निर्णय हमने लिया अब सृजनात्मक कला साहित्य के क्षेत्र में कार्य करने वालो के लिए भी राज्य सरकार ने पुरस्कार देने की योजना बनायी है। यही नहीं कलाकारों को पेंशन देने के साथ उनके पारश्रमिक में बढ़ोत्तरी करने का निर्णय हमारे द्वारा लिया गया है। मेलो व उत्सवों को बढ़ावा देने के लिए और उनका संरक्षण देने के लिए हमने 500 से भी अधिक स्थानों पर मेलों के आयोजनो की शुरूआत की है। अब हमने यह निर्णय लिया है कि बंजर भूमि में जिनके द्वारा काम किया जायेगा उनको भी बोनस दिया जायेगा। कला संस्कृति और यहां की वादियों को भी पर्यटन से जोड़ने के लिए हमने निर्णय लिये है इस तरह के आयोजन कर अल्मोड़ा शहर जो सांस्कृतिक नगरी के रूप में जाना जाता है उसे और विकसित करना होगा। दश्तकारी, एैपण आदि के कार्य के लिए महिलाओं को प्रोत्साहित करने के साथ ही पारम्परिक खेती के लिए हमें काम करना होगा। इस अवसर पर उन्होंने अल्मोड़ा में कौसी में स्थित बैराज में फिल्टरेशन लगाने की बात कही और कहा कि शीघ्र ही इसके लिए ठोस निर्णय लिया जायेगा। रावत ने महोत्सव में पहुंचे ग्रामीणों से खेती को अपनी आय का जरिया बनाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार पूरे पूरे प्रयास कर रही है।