उत्तराखंड | 16 जनवरी से रोडवेज कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, जानें पूरा मामला

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 देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट)शुक्रवार देर शाम रोडवेज कर्मियों की सचिव परिवहन शैलेश बगोली के साथ दो घंटे चली वार्ता विफल हो गई। इस पर रोडवेज कर्मचारी 16 जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं।आंदोलन के तहत 15 जनवरी की मध्य रात्रि 12 बजे से पूरे राज्य में बसों का संचालन ठप कर दिया जाएगा।

आपको बता दें कि सरकार ने गत 12 दिसंबर को कुमाऊं में राष्ट्रीयकृत मार्गो पर निजी बसों को चलाने की मंजूरी देते हुए इस पर आपत्तियां मागी थी। इसका पता लगते ही रोडवेज कर्मियों का पारा चढ़ गया और कर्मियों ने सरकार के विरुद्ध आंदोलन का बिगुल फूंक दिया।इसी क्रम में सभी यूनियनों का उत्तराखंड रोडवेज अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा बनाया गया। मोर्चा ने परमिट और विभिन्न मांगों को लेकर गत चार जनवरी को परेड ग्राउंड से सचिवालय कूच एवं 16 जनवरी से बेमियादी हड़ताल का एलान किया था।

चिंतित सरकार ने आनन-फानन में प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर तीन जनवरी को रोडवेज कर्मियों को वार्ता के लिए बुला लिया। कर्मियों के आगे शासन को लचीला रवैया अपनाने को मजबूर होना पड़ा।जनकल्याणकारी योजना के लंबित देयको समेत सरकार पर बकाया करीब 80 करोड़ रुपए में से शासन ने 22 करोड़ रुपये तत्काल जारी करने पर मंजूरी देकर फौरी तौर पर कर्मियों को सचिवालय कूच टालने के लिए मना लिया।

Strikeनिजी बसों के परमिट का निस्तारण नहीं होने पर कर्मी 16 जनवरी से बेमियादी हड़ताल के फैसले पर अडिग रहे।इसके लिए सरकार ने सचिव परिवहन की अध्यक्षता में हाईपावर कमेटी गठित कर दी थी व 11 जनवरी को दोबारा बैठक बुलाई थी। तय कार्यक्रम के तहत सचिव परिवहन के साथ शुक्रवार को रोडवेज संयुक्त मोर्चा की सचिवालय में दो घंटे तक लंबी बैठक चली।

दरअसल, कर्मियों की तीन ही मुख्य मांगें हैं। इनमें सरकार पर बकाया 79.75 करोड़ रुपये के भुगतान, कुमाऊं मंडल में रोडवेज के रूटों पर निजी बस संचालन के प्रस्ताव को खारिज करना व पर्वतीय मार्गो पर संचालन से हो रहे घाटे को सरकार के जरिए प्रतिपूर्ति करना शामिल है।बैठक में अपर सचिव परिवहन एचसी सेमवाल, रोडवेज के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार संत, वित्त नियंत्रक पंकज तिवारी व महाप्रबंधक दीपक जैन सरकार की ओर से शामिल रहे।

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