विशेष | जानिए वास्तु से कैसे पा सकते हैं धन और वैभव ?

vastu-tipsवास्तु का अर्थसंस्कृत में वास्तु का अर्थ है। घर बनाने की जगह वास्तु शब्द वस्तु से बना है। वस्तु अर्थात् जो है जो सामाने आंखों से दिखाता है उसे वास्तु कहते हैं। और जो वास्तु का ज्ञान कराता है उसे वास्तु शास्त्र कहते हैं।

पैसा, धन, रुपए की जरूरत आज सभी को है, इसे हासिल करने के लिए कई प्रकार के जतन किए जाते हैं। कई लोगों के भाग्य में थोड़ी मेहनत के बाद ही काफी धन प्राप्त हो जाता है लेकिन कुछ लोग कड़ी मेहनत करते हैं फिर भी उन्हें पर्याप्त पैसा नहीं मिल पाता है। ऐसे में वास्तु के अनुसार कुछ ऐसी युक्तियां बताई गई हैं जिससे आपके परिवार की ओर महालक्ष्मी की कृपा बढ़ेगी, फिर मिलेगा धन ही धन।

उत्तर दिशा – उत्तर दिशा का स्वामी बुध है। यह दिशा विजय, धन व वृद्धि को प्रभावित करती है।घर की इस दिशा में कैश व आभूषण जिस अलमारी में रखते हैं, वह अलमारी भवन की उत्तर दिशा के कमरे में दक्षिण की दीवार से लगाकर रखना चाहिए। इस प्रकार रखने से अलमारी उत्तर दिशा की ओर खुलेगी, उसमें रखे गए पैसे और आभूषण में हमेशा वृद्धि होती रहेगी।

ईशान कोण – पूर्वोत्तर दिशा ( इशान कोण)का स्वामी बृहस्पति है। घर का यह भाग साफ-सुथरा तथा अनुकूल होने पर सभी कामनाओं की पूर्ति करते हुए आनंद देता है।यहाँ पैसा, धन और आभूषण रखे जाएँ तो यह दर्शाता है कि घर का मुखिया बुद्धिमान है और यदि यह उत्तर ईशान में रखे हों तो घर की एक कन्या संतान और यदि पूर्व ईशान में रखे हों तो एक पुत्र संतान बहुत बुद्धिमान और प्रसिद्ध है।

पूर्व दिशा पूर्व दिशा का स्वामी सूर्य है। इस दिशा में भवन शास्त्र के अनुसार उचित प्रकार से बना हो, इस दिशा का विकिरण घर में आता हो, कोई दोष नहीं हो तो उस घर में निवास करने वाले व्यक्तियों को उत्तम स्वास्थ्य, धन-धान्य की प्राप्ति होती है। निर्माण दोषपूर्ण होने पर व्यक्ति इनसे वंचित रहता है। रोगी होने की आशंका अधिक रहती है।यहाँ घर की संपत्ति और तिजोरी रखना बहुत शुभ होता है और उसमें बढ़ोतरी होती रहती है।

आग्नेय कोणअग्निकोण( आग्नेय कोण) का स्वामी शुक्र ग्रह है, यह ग्रह भौतिक सुख व भौतिक उन्नति देता है। यह दिशा शास्त्रानुसार होने पर धन, प्रसिद्धि, भौतिक सुख, इच्छाओं की पूर्ति सुगमता से होती है। घर के इस भाग में गंदगी, कचरा-कूड़ा, शौचालय आदि नहीं होना चाहिए। इसे लक्ष्मी का स्थान भी कहा गया है।यहाँ धन रखने से धन घटता है, क्योंकि घर के मुखिया की आमदनी घर के खर्चे से कम होने के कारण कर्ज की स्थिति बनी रहती है।

दक्षिण दिशादक्षिण की दिशा मंगल की है, इसका सबसे अधिक प्रभाव गृहस्वामी पर होता है, उसकी स्वास्थ्य व प्रगति मुख्यतः इसी दिशा पर आधारित है। इस दिशा में धन, सोना, चाँदी और आभूषण रखने से नुकसान तो नहीं होता परंतु बढ़ोत्तरी भी विशेष नहीं होती है।

नैऋत्य कोणनैऋत्य दिशा राहु की है। यह दोषपूर्ण होने पर कलह कराती है तथा पितृ का स्थान होने से वंशवृद्धि को प्रभावित करती है। यहाँ धन, महँगा सामान और आभूषण रखे जाएँ तो वह टिकते जरूर है, किंतु एक बात अवश्य रहती है कि यह धन और सामान गलत ढंग से कमाया हुआ होता है।

पश्चिम दिशा  – पश्चिम दिशा का स्वामी शनि है। इसका प्रभाव बंधु, पुत्र, धान्य तथा उत्कृष्ट उन्नति पर अधिक होता है। यहाँ धन-संपत्ति और आभूषण रखे जाएँ तो साधारण ही शुभता का लाभ मिलता है। परंतु घर का मुखिया अपने स्त्री-पुरुष मित्रों का सहयोग होने के बाद भी बड़ी कठिनाई के साथ धन कमा पाता है।

वायव्य कोणपश्चिमोत्तर दिशा का स्वामी चंद्रमा है। चंद्रमा चंचलता का, मन का, गति का प्रतीक है। यह दिशा नौकर, वाहन, गमन तथा पुत्र को प्रभावित करती है। यहाँ धन रखा हो तो खर्च जितनी आमदनी जुटा पाना मुश्किल होता है। ऐसे व्यक्ति का बजट हमेशा गड़बड़ाया रहता है और कर्जदारों से सताया जाता है। घर की तिजोरी के पल्ले पर बैठी हुई लक्ष्मीजी की तस्वीर जिसमें दो हाथी सूंड उठाए नजर आते हैं, लगाना बड़ा शुभ होता है। तिजोरी वाले कमरे का रंग क्रीम या आफ व्हाइट रखना चाहिए। सीढ़ियों के नीचे तिजोरी रखना शुभ नहीं होता है। सीढ़ियों या टायलेट के सामने भी तिजोरी नहीं रखना चाहिए। तिजोरी वाले कमरे में कबाड़ या मकड़ी के जाले होने से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है जो परिवार की खुशहाली में बाधा उत्पन्न करती है।

घर के अंदर से देखने पर घर के आगे के भाग के दाएँ हाथ की खिड़की पर स्थित कमरे में घर के जेवर, गहने, सोने-चाँदी के सामान, लक्जरी आर्टिकल्स रखे जाते हों, उस घर की मालकिन को सुख-सुविधाएँ पसंद होती हैं और उसे बहुत खुशियाँ प्राप्त होती हैं। उसका पैसा बेमतलब की वस्तुओं पर खर्च होता है और स्वास्थ्य हमेशा नरम-गरम चलता रहता है।

यदि ड्राइंग हॉल को पति-पत्नी अपने बेडरूम की तरह उपयोग में लें और उसका कोई भाग घर के पैसे और गहने रखने के काम में आ रहा हो तो ऐसे घर की महिला बुद्धिमान, सुंदर, बातचीत से प्रभावित करने वाली होती है और घर का मुखिया व्यापार में जमीन-जायदाद में बहुत अच्छा पैसा सरलता से कमाता है और लग्जरी के सब सुख-साधनों का उपभोग करता है। पति पत्नी को प्यार करता है और दोस्तों से अच्छे संबंध रखता है, पत्नी भी बहुत बुद्धिमान और संवेदनशील रहती है। यदि हॉल के अंदर इस तरह लोहे की तिजोरी में पैसा रखा जाए तो यह मानिए की यह बहुत शुभ और अच्छा होता है।

घर के खाद्यान्न रखने के कमरे में यदि घर के गहने, पैसे, आभूषण, कपड़े इत्यादि रखे जाएँ या यह सामान रखने का ही एक भाग हो तो ऐसे लोग पैसे उधार देने का काम करते हैं या ऐसे लोग लग्जरी आइटम या बड़े सौदों का काम कर पैसा कमाते हैं।

शयनकक्ष या तिजोरी वाले कमरे के प्रवेश द्वार के सामने वाली दीवार के बाएँ कोने में संपत्ति एवं भाग्य का क्षेत्र होता है। यह कोना कभी भी कटा हुआ नहीं होना चाहिए और यहाँ पर धातु की कोई चीज रखना या लटकाना धन वृद्धि में सहायक होता है।

इस प्रकार से हम देखते हैं कि घर का प्रत्येक हिस्सा महत्वपूर्ण है तथा अलग-अलग दिशा अलग-अलग बातों को विशेष रूप से प्रभावित करती है। इसलिए घर का प्रत्येक भाग उचित रूप से बना होना चाहिए। पूर्व तथा उत्तर की किरणें घर में सीधे प्रवेश करें तो उसमें निवास करने वाले उत्तरोत्तर प्रगति करते हुए लक्ष्य प्राप्त करते हुए सुखी जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

वास्तु के अनुसार सबसे अधिक जरूरी है कि घर सभी चीजे सही जगह पर रखी रहें अन्यथा गरीबी का निवास बहुत जल्दी हो जाता है। इसलिए इन बातों को अपनाएं…

कौन सी वस्तु कहां रखें-

  • सोते समय सिर दक्षिण में पैर उत्तर दिशा में रखें। या सिर पश्चिम में पैर पूर्व दिशा में रखना चाहिए।
  • अलमारी या तिजोरी को कभी भी दक्षिणमुखी नहीं रखें।
  • पूजा घर ईशान कोण में रखें।
  • रसोई घर मेन स्वीच, इलेक्ट्रीक बोर्ड, टीवी इन सब को आग्नेय कोण में रखें।
  • रसोई के स्टेंड का पत्थर काला नहीं रखें।
  • दक्षिणमुखी होकर रसोई नहीं पकाए।
  • शौचालय सदा नैर्ऋत्य कोण में रखने का प्रयास करें।
  • फर्श या दिवारों का रंग पूर्ण सफेद नहीं रखें।
  • फर्श काला नहीं रखें।
  • मुख्य द्वार की दाएं ओर शाम को रोजाना एक दीपक लगाएं।

वास्तु शास्त्र को अपनाकर तथा अपने घर में आप थोड़े से परिवर्तन करके धन और सुख प्राप्त कर सकते हैं, आइये देखें की राशि के अनुसार किस दिशा में रखें अपने घर का दरवाजा –

  • कर्क, वृश्चिक, मीन हो तो पूर्व दिशा में मुख्य द्वार रखें।
  • वृषभ, तुला, कुंभ हो तो पश्चिम में मुख्य द्वार रखें।
  • मेष, सिंह, धनु हो तो उत्तर में द्वार।
  • मिथुन, कन्या, मकर हो तो दक्षिण में द्वार रखें।

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