उत्तराखंड | परिवार के 5 सदस्यों को बेरहमी से उतारा था मौत के घाट,मिली सजा-ए-मौत

देहरादून के आदर्श नगर में साल 7 साल पहले दिवाली की रात एक ही परिवार के 5 सदस्यों की हत्या के दोषी हरमीत सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई है। देहरादून की एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज आशुतोष कुमार मिस्र की अदालत द्वारा सुनाई गई। उसे 302 के तहत फांसी, 307 और 316 में दस साल की कैद व एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।

 
 
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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट ) देहरादून के आदर्श नगर में साल 7 साल पहले दिवाली की रात एक ही परिवार के 5 सदस्यों की हत्या के दोषी हरमीत सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई है। देहरादून की एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज आशुतोष कुमार मिस्र की अदालत द्वारा सुनाई गई। उसे 302 के तहत फांसी, 307 और 316 में दस साल की कैद व एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।

आपको बता दें कि देहरादून के आदर्श नगर में एक ही परिवार के पांच सदस्यों को मौत के घाट उतारने वाले आरोपी हरमीत सिंह को बीते दिन बहुचर्चित हत्याकांड में पंचम अपर न्यायाधीश आशुतोष मिश्र की अदालत ने दोषी करार दिया था। वहीं आज हरमीत की सजा पर सुनवाई थी। हरमीत को सजा-ए-मौत दी गई।

आपको बता दें कि हरमीत ने संपत्ति के लिए 2014 यानी 7 साल पहले दीपावली के दिन पिता जय सिंह, सौतेली मां कुलवंत कौर, बहन हरजीत कौर और भांजी सुखमणि की चाकूओं से गोदकर हत्या कर दी थी। उसकी सजा पर अदालत आज अपना फैसला सुनाया। इस मामले में हरजीत के बेटे कमल की गवाही सबसे अहम मानी गई। वह इस जघन्य वारदात का एकमात्र चश्मदीद है। हरमीत ने कमल पर भी हमला किया था, मगर वह बच गया।

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव कुमार ने बताया कि इस जघन्य वारदात के वक्त हरजीत गर्भवती थी। ऐसे में उसके गर्भ में मौजूद शिशु की मौत को भी हत्या माना गया। इस घटना का पता तब चला जब नौकरानी राजी अगले दिन घर काम करने पहुंची थी। हरमीत ने उसे घर से जाने के लिए कहा

नौकरानी ने जय सिंह के भतीजे और मुकदमे में शिकायतकर्ता अजीत सिंह को फोन करके बताया कि हरमीत घर का काम कराने से मना कर रहा है। अजीत ने जय सिंह को फोन किया, लेकिन फोन कट गया। दोबारा फोन किया तो हरमीत से बात हुई। अजीत ने जब जय सिंह के बारे में पूछा तो हरमीत ने कहा कि वह कहीं गए हुए हैं।

इस पर अजीत ने हरमीत से कहा कि गेट खोलो और राजी को घर का काम करने दो। हरमीत ने दरवाजा खोल दिया। राजी घर के अंदर दाखिल हुई तो हर तरफ खून बिखरा हुआ था। जय सिंह, कुलवंत कौर, हरजीत कौर और सुखमणि खून से लथपथ पड़े थे। राजी चीखते हुए बाहर आ गई और इसकी सूचना अजीत को दी।   इस मामले में कैंट कोतवाली में हरमीत के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

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