उत्तराखंड | भांजे को बैड दिलाने के लिए जूझते रहे कैबिनेट मंत्री, कही बड़ी बात

देश में जहां एक तरफ दवाई और ऑक्सीजन की कमी से लोग जूझ रहे है तो वहीं उत्तराखंड सरकार ये दावा कर रही है कि यहां हर सुविधा है ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा है। साथ ही सरकार ने पर्याप्त बेड होने का भी दावा किया लेकिन एक खबर सामने आयी है जिसने इस पूरे दावे का सच सामने लाकर रख दिया है।

 
उत्तराखंड | भांजे को बैड दिलाने के लिए जूझते रहे कैबिनेट मंत्री, कही बड़ी बात

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) देशभर में कोरोना का कहर जारी है। पिछले 24 घंटे में एक बार फिर देश में कोरोना का विस्फोट हुआ है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक बीते 24 घंटे में कोरोना के 3,49,691 नए मामले सामने आए हैं. वहीं 2,767 लोगों की कोरोना के चलते मौत हुई है। बीते 24 घंटे में 2,17,113 लोग ठीक भी हुए हैं।

वहीं उत्तराखंड में लगातार कोरोना का कहर बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में लगातार कोरोना के केस बढ़ रहे है। पिछले 24 घंटे में प्रदेश में कोरोना के 5084 मामले सामने आए। इसी के साथ प्रदेश में कुल मरीजों की संख्या 147433 पहुंच गई है। वहीं 81 संक्रमित मरीजों की मौत हुई।

देश में जहां एक तरफ दवाई और ऑक्सीजन की कमी से लोग जूझ रहे है तो वहीं उत्तराखंड सरकार ये दावा कर रही है कि यहां हर सुविधा है ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा है। साथ ही सरकार ने पर्याप्त बेड होने का भी दावा किया लेकिन एक खबर सामने आयी है जिसने इस पूरे दावे का सच सामने लाकर रख दिया है।

दरअसल कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के कोरोना पीड़ित भांजे को सारे दिन किसी भी अस्पताल में आईसीयू बेड नहीं मिला। शनिवार को सुबह से शाम तक मंत्री हरक सिंह रावत अस्पतालों में फोन घुमाते रहे खुद लेकिन बेड की व्यवस्था नहीं हुई। हालांकि शाम को बामुश्किल एक निजी अस्पताल में आईसीयू मिला। बता दें कि डा. हरक रावत के कोटद्वार में रहने वाले कोरोना पीड़ित भांजे का शुक्रवार रात को ऑक्सीजन लेवल कम होने लगा। इस पर उन्हें दून में मंत्री के डिफेंस कॉलोनी आवास पर आइसोलेशन में रखा गया। लेकिन उनकी हालत खराब होने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती करवाने को कहा गया। दून से लेकर एम्स ऋषिकेश सहित किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में आईसीयू नहीं मिला। इस पर वन मंत्री ने खुद सभी अस्पतालों के प्रबंधकों और कुछ के मालिकों से फोन पर बात की। वे शाम 4 बजे तक फोन करते रहे लेकिन कहीं भी आईसीयू की व्यवस्था नहीं हो पाई। शाम को उनके भांजे को एक निजी अस्पताल में आईसीयू मिल पाया।

हरक सिंह रावत का कहना है कि भांजे को आईसीयू की जरूरत थी। मैंने खुद दून अस्पताल, एम्स ऋषिकेश सहित राजधानी के सभी बड़े निजी अस्पतालों में फोन किया। एक आईसीयू बेड नहीं मिल पाया। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों की लापरवाही से यह हाल हो रहा है। अफसर सरकार के सामने बातें ज्यादा और काम कम कर रहे हैं। अफसरों के इस रवैये से सरकार की छवि तो खराब होगी ही, साथ ही महामारी में सरकार व जनता की मुसीबतें भी बढ़ेंगी।

अब इस खबर से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर कैबिनेट मंत्री के साथ ये वाक्या हुआ है तो आम जनता के साथ क्या हो रहा है ?

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