उत्तराखंड | चुनाव से पहले के ज्वलंत मुद्दे, पार्टियों ने किए ये वादे

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव के करीब आने के साथ ही जहां पार्टियां चुनावी वादे करने में पीछे नहीं है तो वहीं इस बार प्रदेश में खासकर युवा वर्ग भी अपनी मांगों को मुहिम के रुप में आगे बढ़ा रहे हैं और सोशल मीडिया में बकायदा इसके लिए एक अभियान चल रहा है।
 
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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव के करीब आने के साथ ही जहां पार्टियां चुनावी वादे करने में पीछे नहीं है तो वहीं इस बार प्रदेश में खासकर युवा वर्ग भी अपनी मांगों को मुहिम के रुप में आगे बढ़ा रहे हैं और सोशल मीडिया में बकायदा इसके लिए एक अभियान चल रहा है। चुनाव में अभी करीब 6 महीने का वक्त है, ऐसे में कुछ मुद्दे प्रमुखता से जोर पकड़ रहे हैं। बात करेंगे ऐसे ही मुद्दों की, जो इस बार के चुनाव में छाए रहने की पूरी उम्मीद है।

सबसे पहले बात करते हैं भू – कानून की

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश में भू-कानून का मुद्दा गरमाया हुआ है। उत्तराखंड के युवा बढ़-चढ़कर भू-कानून की मांग कर रहे है। सोशल मीडिया में इसके समर्थन में बड़े- बड़े कैंपेन चल रहे हैं। युवा वर्ग से लेकर उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली बड़ी हस्तियां भी इसके समर्थन में नजर आ रही हैं। ऐसे में राजनीतिक दल कहां पीछे रहने वाले। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस नेता व पूर्व सीएम हरीश रावत भी इसके समर्थन में आ गए है। वहीं आम आदमी पार्टी भी इसके समर्थन में नजर आ रही है। मुद्दा गर्माया तो सत्तारुढ बीजेपी सरकार के नए नवेले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कहने लगे हैं कि वे इस मुद्दे पर गंभीर हैं और इस पर चर्चा करेंगे।

दूसरा जनता से जुड़ा मुद्दा है मुफ्त बिजली का

चुनाव 2022 में होना है लेकिन पार्टिया अभी से वादे करने लगी है। इन दिनों प्रदेश में मुफ्त बिजली का वादा किया जा रहा है। सत्तारूढ़ बीजेपी, विपक्षी पार्टी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मुफ्त बिजली देने की बात कर रहे है। बीजेपी ने 100 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया है तो वहीं पूर्व सीएम हरीश रावत ने 200 युनिट बिजली देने का वादा किया है। आम आदमी पार्टी भी मुफ्त बिजली पर खुलकर बैटिंग कर रही है और पार्टी ने 300 युनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया है।

तीसरा रोजगार का वादा

रोजगार का मुद् हर चुनाव में गर्म रहता है। इस बार भी रोजगार के बड़े- बड़े वादे राजनीतिक दल कर रहे हैं। नए नवेले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंग धामी ने आते ही रोजगार पर फोकस किया है औऱ साथ ही ये भी भरोसा दिलाया गया है कि सरकार ने रोजगार से जुड़े जितने भी वादे किए है वह सब पूरे किए जाएंगे। वहीं विपक्षी पार्टियां भी रोजगार के मुद्दे पर मैदान में हैं। रही बात युवाओं की तो रोजगार की मांग तो युवा शुरुआत से ही करते आ रहे हैं लेकिन ये अलग बात है कि रोजगार पर किए गए सरकारी वादे अक्सर वादे ही रह जाते हैं, ऐसे में इस बार रोजगार का मुद्दा काफी अहम रहने वाला है, देखना ये होगा कि जनता किस पर भरोसा करती है।

चौथा मुद्दा मुफ्त पानी का

चुनाव में यह वादा भी जनता को अपनी तरफ खींचने के लिए किया जा रहा है। मुफ्त बिजली के बाद पानी भी निशुल्क देने का वादा काम करेगा की नही ये तो वक्त ही बताएगा।

चुनाव में राजनीतिक दल वादे तो बड़े- बड़े करते हैं लेकिन अक्सर ये वादे- वादे ही रह जाते हैं। इस बार के चुनाव में भी जाहिर है वादों की लंबी फेरहिस्त नेता जनता के सामने लेकर जाएंगे और उन्हें पूरा करने का भरोसा दिलाएंगे लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जागरुक हो चुकी जनता किसके वादे पर भरोसा करेगी क्योंकि ये जनता भी जानती है कि चुनावी वादों और दावों की असल सच्चाई क्या है और उनका क्या हश्र होता है।

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