उत्तराखंड | शक्तिमान घोड़े की मौत मामले में गणेश जोशी पर आया फैसला

करीब एक महीने से भी ज्यादा समय शक्तिमान घोड़ा जिंदगी और मौत से लड़ा। इस बीच अमरीका से नकली पैर मंगवाकर भी लगवाया गया था। लेकिन शक्तिमान घोड़े की जान नहीं बचाई जा सकी थी। 20 अप्रैल 2016 को इलाज के दौरान शक्तिमान ने दम तोड़ दिया।
 
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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को लेकर बड़ी खबर है। शक्तिमान प्रकरण में तत्कालीन बीजेपी विधायकगणेश जोशी, योगेंद्र रावत समेत पांच आरोपियों को सीजेएम कोर्ट ने बरी कर दिया है।

आपको बता दें कि इन सभी पर 14 मार्च 2016 को देहरादून में तत्कालीन कांग्रेस सरकार खिलाफ विधानसभा कूच के दौरान पुलिस के घोड़े शक्तिमान की टांग तोड़ने का आरोप था। इस मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थी और शक्तिमान घोड़े की टांग तोड़ने के आरोप में इनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठी थी। इस मामले में तत्कालीन विधायक गणेश जोशी को गिरफ्तार भी किया गया था। इसके बाद उन्हें कई दिन सुद्धोवाला जेल में भी बिताने पड़े थे।

इस घटना के बाद करीब एक महीने से भी ज्यादा समय शक्तिमान घोड़ा जिंदगी और मौत से लड़ा। इस बीच अमरीका से नकली पैर मंगवाकर भी लगवाया गया था। लेकिन शक्तिमान घोड़े की जान नहीं बचाई जा सकी थी। 20 अप्रैल 2016 को इलाज के दौरान शक्तिमान ने दम तोड़ दिया।

गुरुवार को कोर्ट ने पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण पांचों आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया है। वहीं कोर्ट के फैसले के बाद कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने बार एसोसिएशन के दफ्तर में मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।

क्या है पूरा मामला ?

देहरादून में 14 मार्च 2016 को बजट सत्र के दौरान भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ विधानसभा तक रैली निकाली थी। इस दौरान पुलिस कर्मियों ने बीजेपी प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। भाजपा नेताओं- कार्यकर्ताओं की पुलिस से तीखी झड़प हुई थी। आरोप है कि इस दौरान भाजपा विधायक गणेश जोशी ने पुलिस की लाठी छीनकर उन्हीं पर बरसाना शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस का घोड़ा शक्तिमान घायल हो गया था और गणेश जोशी पर शक्तिमान के पैर में लाठी मारने का आरोप लगा। पुलिस ने जोशी के खिलाफ बलवे और मारपीट के अलावा पशु क्रूरता अधिनियम का मामला दर्ज कराया था। इस मामले की सीबीसीआईडी जांच के आदेश भी दिए गए थे।

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