उत्तराखंड | नेता प्रतिपक्ष क्यों नही बनना चाहते प्रीतम सिंह ? जानिए कहां फंसा है पेंच

उत्तराखंड कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर फैसला नहीं हो पाया है। डॉ. इंदिरा हृद्येश के निधन के बाद से ही नेता प्रतिपण के नाम पर फैसला लंबित है।
 
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देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर फैसला नहीं हो पाया है। डॉ. इंदिरा हृद्येश के निधन के बाद से ही नेता प्रतिपण के नाम पर फैसला लंबित है।

दिल्ली में कांग्रेस आलाकमन के साथ प्रदेश कांग्रेस नेताओं की बैठक में भी इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है, मतलब साफ है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर कांग्रेस में घमासान है।

आपको बता दें कि नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी को लेकर इससे पहले जब पार्टी के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव के आवास पर बैठकों का दौर चला था तो पार्टी नेता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए। अंत में विधायकों ने एक लाइन का प्रस्ताव पारित करते हुए नेता प्रतिपक्ष का फैसला पार्टी आलाकमान पर छोड़ दिया गया।

अब लगातार चार दिन तक दिल्ली में आलाकमान के संग प्रदेश कांग्रेस नेताओं की बैठक हो चुकी है लेकिन किसी एक नाम पर एक राय नहीं बन पा रही है। सूत्रों के अनुसार नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृय्देश के निधन के एक महीने के बाद भी कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष का नाम तय नहीं कर पा रही है क्योंकि पार्टी के नेताओं में गुटबंदी चरम पर है।

उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी के नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश की मृत्यु के बाद कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के दो ही मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। इनमें एक हरीश रावत और दूसरे मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह हैं। इसी बीच इन दोनों नेताओं के बीच गुटबाजी की खबरें भी आ रही हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि गुटबाजी के कारण अब तक 10 विधायकों में से कांग्रेस पार्टी नेता प्रतिपक्ष नहीं चुन पाई है।

अभी प्रीतम सिंह उत्तराखंड के कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं लेकिन सूत्रों की अगर मानें तो हरीश रावत खेमा चाहता है कि उनका कोई करीबी राज्य का प्रदेश अध्यक्ष बने। हरीश रावत के खेमे की तरफ से  कांग्रेस आलाकमान को यही सुझाव दिया जा रहा है कि प्रीतम सिंह को नेता प्रतिपक्ष बना दिया जाना चाहिए लेकिन प्रीतम सिंह सीएलपी नहीं बनना चाहते हैं वह प्रदेश अध्यक्ष ही बने रहना चाहते हैं।

दरअसल विधानसभा चुनाव में किसी भी राज्य के अध्यक्ष की भूमिका अहम होती है इसलिए चुनावों से चंद महीने पहले प्रीतम सिंह यह कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते हैं, हरीश रावत भी यह बात बखूबी जानते हैं इसलिए चुनावों से चंद महीने पहले वह चाहते हैं कि उनका कोई करीबी इस पद पद पर काबिज हो जाए।

गुरुवार को सोनिया गांधी ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को मिलने के लिए बुलाया था, मुलाकात के बाद हरीश रावत ने कहा कि उनकी उत्तराखंड के विषय में सोनिया गांधी से चर्चा हुआ है।

बहरहाल उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में सिर्फ 6 महीने का वक्त है, ऐसे में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस एक तरफ तो सत्ता में वापसी का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष के नाम पर पार्टी में घमासान मचा हुआ है, ऐसे में देखना ये होगा कि कैसे कांग्रेस एकजुट होकर आगामी विधानसभा चुनाव पूरी ताकत से लड़ पाएगी, जब एक पद के लिए ही पार्टी नेताओं में गहरे मतभेद नजर आ रहे हैं।

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