क्या कुंभ बना कोरोना का हॉटस्पॉट ? 30 दिन में 15 हजार लोग हुए संक्रमित

अप्रैल से 30 अप्रैल तक चले कुंभ के दौरान 15 हज़ार से ज्यादा कोविड के मामले हरिद्वार जिले से आए, जिसमें शहर का योगदान सबसे ज्यादा रहा। अधिकारियों की माने तो आधा करोड़ श्रद्धालुओं ने हरिद्वार कुंभ के दौरान गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई।
 
क्या कुंभ बना कोरोना का हॉटस्पॉट ? 30 दिन में 15 हजार लोग हुए संक्रमित

हरिद्वार (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड में कोरोना तेजी से पैर पसार रहा है। प्रदेश में कोरोना के कुल मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदेश में एक बार फिर कोरोना का बहुत बड़ा विस्फोट हुआ है।

शनिवार को प्रदेश भर में कोरोना के 5493 मामले सामने आए। इसी के साथ प्रदेश में कुल मरीजों की संख्या 186014 पहुंच गई है। वहीं 107 संक्रमित मरीजों की मौत हुई। राजधानी देहरादून में हर रोज कोरोना का विस्फोट हो रहा है। शनिवार को राजधानी देहरादून में कोरोना का बहुत बड़ा विस्फोट हुआ है। 2266 केस राजधानी देहरादून में सामने आए है। देहरादून के बाद अगर कोई जिला सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित है तो वो है हरिद्वार। शनिवार को हरिद्वार में 578 केस सामने आए हैं।

1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक चले कुंभ के दौरान 15 हज़ार से ज्यादा कोविड के मामले हरिद्वार जिले से आए, जिसमें शहर का योगदान सबसे ज्यादा रहा। अधिकारियों की माने तो आधा करोड़ श्रद्धालुओं ने हरिद्वार कुंभ के दौरान गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई। अधिकारियों का दावा है अकेले अप्रैल में 50 लाख लोगों ने हरिद्वार कुंभ में अपनी आमद दर्ज कराई। वहीं 14 जनवरी को जब सूर्य ने मकर संक्रांति में प्रवेश किया, तब से लेकर अप्रैल अंत तक करीब 91 लाख लोगों ने हरिद्वार का रुख किया। हालांकि जानकार इन सरकारी आंकड़ों से इत्तेफाक नहीं रखते। IG (कुंभ) संजय गुंज्याल इस बात को लेकर संतोष जताते हैं कि हरिद्वार कुंभ पहली बार बिना किसी दुर्घटना के संपन्न हो गया।

कुंभ के दौरान देश में कोरोना तेजी से फैला। इसका असर हरिद्वार में देखा गया। इसी दौरान कोविड के चलते तीन महामंडलेश्वरों की मौत भी हुई और सैकड़ों संत पॉजिटिव हुए। खुद अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे। इस सबके बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोआगे आना पड़ा और उन्होंने संतो से अपील की कि अब आगे का कुंभ संकेतिक तौर पर ही मनाया जाए। पीएम की अपील का असर हुआ और जूना सबसे बड़े जूना अखाड़े ने कुंभ से रवानगी घोषित की। इससे पहले निरंजनी अखाड़े ने भी कुंभ से जाने की घोषणा कर दी थी।

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