उत्तराखंड के 98 शहरों का होगा कायाकल्प, 2041-45 के विजन के साथ तैयार हो रही महायोजना

 

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड में शहरों के सुनियोजित और दीर्घकालीन विकास की दिशा में राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश के 98 छोटे-बड़े शहरों के लिए महायोजनाएं (मास्टर प्लान) तैयार की जा रही हैं। इन योजनाओं को वर्ष 2041 और 2045 के विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में तैयार हो रही इन महायोजनाओं में आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ संस्थानों की मदद ली जा रही है। सरकार का फोकस शहरों में बेहतर भूमि उपयोग, यातायात व्यवस्था, अवैध निर्माण पर नियंत्रण, ड्रेनेज, आपदा प्रबंधन और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर है।

अमृत योजना के तहत 30 शहर शामिल

कुल 98 महायोजनाओं में अमृत-1 के तहत 7 और अमृत-2 के तहत 23 शहरों को शामिल किया गया है। अमृत-1 में देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, रुद्रपुर, काशीपुर, नैनीताल और हल्द्वानी शामिल हैं। वहीं अमृत-2 के तहत कोटद्वार, श्रीनगर, पौड़ी, जसपुर, नगला, खटीमा, किच्छा, बाजपुर, सितारगंज, गदरपुर, रामनगर, मंगलौर, लक्सर, टनकपुर, गोपेश्वर, ऋषिकेश, डोईवाला, विकासनगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, उत्तरकाशी और टिहरी को शामिल किया गया है।

65 नगर निकायों के लिए भी तैयार होगी योजना

अमृत योजनाओं के अलावा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत 7 क्लस्टरों में 65 नगर निकायों के लिए भी महायोजनाएं तैयार की जा रही हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री की घोषणाओं के तहत तीन अन्य महायोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

GIS आधारित मास्टर प्लान से बदलेगी प्लानिंग

उत्तराखंड में तैयार की जा रही इन महायोजनाओं की प्रमुख विशेषता GIS (भौगोलिक सूचना प्रणाली) आधारित प्लानिंग है। इसके जरिए शहरों और आसपास के क्षेत्रों का तकनीकी एवं समग्र आकलन किया जाएगा। GIS आधारित योजना से भूमि उपयोग को बेहतर तरीके से निर्धारित करने, अवैध निर्माण पर नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन, ड्रेनेज सिस्टम और आपदा प्रबंधन में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार, उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां द्वितीय और तृतीय श्रेणी के नगर निकायों के लिए भी GIS आधारित मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं।

पहाड़ी शहरों के विकास पर विशेष जोर

महायोजनाओं में पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकास की रणनीति तैयार की जा रही है। इसमें पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक अवसर पैदा करने, बेहतर सड़क और सामाजिक सुविधाएं विकसित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

विशेषज्ञ संस्थानों की ली जा रही मदद महायोजनाओं को तैयार करने के लिए राज्य सरकार देश के प्रतिष्ठित संस्थानों की विशेषज्ञता का उपयोग कर रही है। इनमें स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) नई दिल्ली, SPA भोपाल, NIT कालीकट, NIT सूरत और MNIT जयपुर प्रमुख रूप से शामिल हैं।

नियोजित विकास पर फोकस

प्रदेश के आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार के मुताबिक, मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप महायोजनाओं में शहरों की मौजूदा जरूरतों के साथ भविष्य की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा गया है। इन योजनाओं के जरिए विकास कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश के सुनियोजित और दीर्घकालीन शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए मास्टर प्लान तैयार किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, ये योजनाएं ट्रैफिक जाम, अवैध निर्माण और अव्यवस्थित शहरीकरण से निपटने में मदद करेंगी और लोगों को बेहतर सड़कें एवं अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेंगी।