जुलाई की बारिश ने दिलाई सितंबर आपदा की याद: मूसलाधार बारिश से कई इलाकों में आफत, 10 साल का रिकॉर्ड टूटा
देहरादून (Uttarakhand Post) देहरादून में जुलाई के आखिरी दिनों में हुई मूसलाधार बारिश ने पिछले वर्ष सितंबर में आई भीषण आपदा की खौफनाक यादों को फिर से ताजा कर दिया है।
लगातार हो रही भारी बारिश, कड़कड़ाती बिजली और बादलों की गर्जना से शहर और आसपास के इलाकों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। कई निचले और संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा जैसी स्थिति बनने से स्थानीय लोगों में डर का माहौल व्याप्त है।
मूसलाधार बारिश से नदियां उफान पर, निचले इलाकों में जलभराव
सोमवार से शुरू हुआ रुक-रुक कर भारी बारिश का दौर जारी रहने के कारण दून की सभी नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं।
-
निचले इलाकों में भारी जलभराव के चलते लोगों के घरों और दुकानों में पानी घुस गया, जिससे जनसामान्य को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
-
बारिश के साथ-साथ तेज गर्जना और बिजली गिरने की घटनाओं ने लोगों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
मालदेवता में 233.0 मिमी बारिश, 10 साल का रिकॉर्ड टूटा
देहरादून के पिछले 10 वर्षों के मानसूनी आंकड़ों पर नजर डालें तो इस अवधि में इतनी भयावह बारिश दर्ज नहीं की गई थी।
-
अकेले मालदेवता क्षेत्र में बीते 24 घंटों में रिकॉर्ड 233.0 मिमी बारिश दर्ज की गई।
-
इससे पहले वर्ष 2024 में 3 जुलाई को सर्वाधिक 129.9 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
-
(देहरादून के ऑल-टाइम रिकॉर्ड की बात करें तो 25 जुलाई 1966 को शहर में सर्वाधिक 487.0 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।)
पिछले साल सितंबर का रिकॉर्ड
बीते वर्ष 15-16 सितंबर को हुई मूसलाधार बारिश ने शहर के कई इलाकों में भीषण तबाही मचाई थी, जिसने 101 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया था। उस दौरान सहस्रधारा क्षेत्र में रिकॉर्ड 264.0 मिमी बारिश हुई थी (इससे पहले 3 सितंबर 1924 को 212.6 मिमी बारिश हुई थी)।
मौसम विभाग ने पहाड़ी और निचले इलाकों के निवासियों को जलभराव तथा भूस्खलन के खतरे को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है।