उत्तराखंड | आपदा से निपटेंगे महिला एवं युवक मंगल दल, दिया जा रहा है खास प्रशिक्षण

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) विषम भौगोलिक परिस्थति वाले उत्तराखण्ड को विभिन्न प्रकार की आपदाओं का सामना करना पड़ता है। जाहिर सी बात है कि अकस्मात् घटने वाली किसी भी आपदाओं में सबसे पहले बचाव एवं राहत कार्य स्थानीय लोगों द्वारा चलाया जाता है। लेकिन प्रशिक्षित लोगों की कमी और खोज-बचाव के उपकरणों की अनुपलब्धता के कारण
 

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) विषम भौगोलिक परिस्थति वाले उत्तराखण्ड को विभिन्न प्रकार की आपदाओं का सामना करना पड़ता है। जाहिर सी बात है कि अकस्मात् घटने वाली किसी भी आपदाओं में सबसे पहले बचाव एवं राहत कार्य स्थानीय लोगों द्वारा चलाया जाता है। लेकिन प्रशिक्षित लोगों की कमी और खोज-बचाव के उपकरणों की अनुपलब्धता के कारण उनके प्रयास फलीभूत नहीं हो पाते।

इसी तथ्य को संज्ञान लेेते उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण (यू.एस.डी.एम.ए.) द्वारा विजन-2020 के तहत राज्य में पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से महिला एवं युवक मंगल दलों को आपदा प्रबन्धन व खोज-बचाव में प्रशिक्षित किये जाने के लिये विस्तृत रूपरेखा तैयार की गयी। महिला एवं युवक मंगल दलों की प्रशिक्षण अवधि 05 दिन जबकि विद्यालय स्तर पर आयोजित होने वाले आपदा जागरूकता कार्यक्रमों की अवधि 01 रखा गया है।

महिला एवं युवक मंगल दलों का पहला चरण सफलतापूर्वक सम्पन्न होने के उपरान्त दूसरा चरण मानसून अवधि के बाद विभिन्न जनपदों में चलाया जा रहा है जिनमें देहरादून एवं हरिद्वार जनपदों ने मानसून उपरान्त इस अवधि में प्रशिक्षण प्रदान किये जाने की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी है। शेष जनपदों द्वारा अक्टूबर से नवम्बर के बीच में इन प्रशिक्षणों का प्रारम्भ किया जायेगा। शासन एवं राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण द्वारा निरन्तरता में इन प्रशिक्षणों की समीक्षा की जा रही है।

प्रशिक्षण की महत्ता को इस बात से ही स्वीकारा जा सकता है कि इसमें सेवा निवृत्त व सैन्य पृष्टभूमि के व्यक्तियों द्वारा भी अपनी सहभागिता दिखाये जाने हेतु आग्रह किया है।हाल ही में सचिव, आपदा प्रबन्धन अमित सिंह नेगी एवं प्रभारी सचिव, आपदा प्रबन्धन एस. ए. मुरूगेशन ने युवक एवं महिल मंगल दलों के प्रशिक्षणों को सफल एवं व्यापक पैमाने पर आयोजित किये जाने के लिये जनपदों में अधिकतम प्रशिक्षणों को किये जाने का लक्ष्य दिया गया है ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण जन इनमें अपनी सहभागिता निभाये ताकि आपदा की स्थिति में बचाव कार्य कम समय में सफलतापूर्वक किया जा सके।

इस विषय पर यू.एस.डी.एम.ए. की अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिद्विम अग्रवाल ने कहा कि किसी गांव का समुदाय ही घटना स्थल पर सही समय में सबसे पहले पहुंच कर अपने परिवार एवं परिचतों की जिन्दगी बचाता है। इनकों सक्षम बनाना उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण की प्राथमिकता है। जिस प्रकार से वर्तमान समय में उधमसिंह नगर एवं हरिद्वार में विभाग द्वारा 200-200 आपदा मित्र तैयार किये गये हैं जो कि आपदा की स्थिति में कैज्यूलिटि को कम करने में सहायक हैं। उसी प्रकार से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आम जनता के लिये महत्वपूर्ण है।

उल्लेखनीय है कि प्रथम चरण में न्याय पंचायत स्तर पर यू.एस.डी.एम.ए. द्वारा खोज, बचाव व प्राथमिक चिकित्सा के अन्तर्गत 612 न्याय पचायतों के 15,300 स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित कर चुका है।अब विभाग महिला एवं युवक मंगल दलों को भी खोज एवं बचाव की विधा में पारंगत करने की सोच रहा है। इसके लिये जिला आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण (डी.डी.एम.ए.) द्वारा पंजीकृत स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से महिला एवं युवक मंगल दलों को विकासखण्डवार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जबकि चयनित स्वयं सेवी संस्थाओं के संसाधन व्यक्तियों का 02 दिवसीय ओरियेन्टेशन आपदा प्रबन्धन विभाग द्वारा किया जा रहा है।

प्रशिक्षणों की समाप्ति पर प्रशिक्षण से सम्बन्धित रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करवायी जा रही है जिनका अद्यतन डेटा उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण की आधिकारिक वैबसाईट पर अपलोड किया जा रहा है। प्रशिक्षण से सम्बन्धित प्रशासनिक एवं मूल्यांकन कार्य राज्य एवं जिला स्तरीय समन्वयन समितियों द्वारा किया जाता है। अतिरिक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम के मूल्यांकन हेतु ब्लाॅक स्तर पर खण्ड विकास अधिकारी की अध्यक्षता में त्रिस्तरीय समिति का गठन किया गया है। कार्यक्रमों के संचालन में प्राप्त फीडबैक व प्रगति की समीक्षा किये जाने हेतु राज्य समन्वय समिति की बैठकें समय-समय पर आयोजित होती रहती हैं।

शासन द्वारा अपने इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में स्थानीय स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी सुनिश्चित किये जाने को प्रमुखता दी गयी है। इस बावत जिलाधिकारियों को विधायक, ब्लांक प्रमुख के साथ ही ग्राम प्रधानों को भी कार्यक्रम में उनके स्तर से सहयोग प्राप्त हो रहा है। ग्राम प्रधानों के पास राज्य वित्त आयोग से प्राप्त हो रही सहायता राशि में से प्रशिक्षित समूहों हेतु लाउड हैलर, सर्च लाईट, प्राथमिक चिकित्सा किट, रस्सियां व अन्य खोज बचाव उपकरण जिन्हें स्थानीय स्तर पर आवश्यक समझा जाये, खरीदे जाने के निर्देश निर्गत किये गये हैं।

इस प्रकार के प्रशिक्षणों में होने वाले खर्च का वहन स्टेट डिजास्टर रिस्पाॅन्स फन्ड के क्षमता विकास मद से वहन किया जायेगा। यदि और धनराशि की जरूरत हुयी तो प्रस्ताव जिलाधिकरी के माध्यम से शासन को उपलब्ध करवाया जायेगा। इस मुहिम के द्वारा यू.एस.डी.एम.ए. का मुख्य उद्देश्य है कि उत्तराखण्ड समुदाय को आपदाओं से लड़ने के लिये तैयार करना तथा क्षमता विकल्प जागरूकता, प्रशिक्षण के माध्यम से आपदा में होने वाली क्ष्ति को कम करना है।

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