बाबा नीम करौली के दर्शन के लिए अब रजिस्ट्रेशन जरूरी?
देहरादून(उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। बाबा नीम करौली महाराज के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भविष्य में चारधाम यात्रा की तर्ज पर ऑनलाइन प्री-रजिस्ट्रेशन कराना पड़ सकता है। इसके तहत श्रद्धालुओं की संख्या कैंची धाम की क्षमता के अनुसार निर्धारित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं की आस्था पर रोक लगाना नहीं, बल्कि सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी क्षेत्र में भीड़, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है। कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत के अनुसार, श्रद्धालुओं की संख्या का पहले से आकलन करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
कैंची धाम में बढ़ती भीड़ बनी चुनौती
पिछले कुछ समय से कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। सामान्य वीकेंड पर यहां करीब 20 से 25 हजार श्रद्धालु पहुंचते हैं, जबकि लंबे वीकेंड के दौरान यह संख्या बढ़कर 35 से 40 हजार तक पहुंच रही है।
बीती 2 अक्टूबर को करीब 36 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने से भवाली-कैंची मार्ग पर लगभग दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया था। इससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। बढ़ती भीड़ के कारण अब मंदिर परिसर के साथ आसपास की सड़कों और यातायात व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है।
प्रतिदिन 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं की क्षमता पर विचार
प्रशासन कैंची धाम की कैरिंग कैपेसिटी यानी प्रतिदिन श्रद्धालुओं को संभालने की क्षमता के आधार पर व्यवस्थाएं विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत रोजाना करीब 20 से 25 हजार श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखकर व्यवस्था बनाने की कोशिश की जा रही है।
प्रस्तावित योजना के अनुसार, ऑनलाइन पंजीकरण के माध्यम से प्रशासन को पहले से पता चल सकेगा कि किस दिन कितने श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने वाले हैं। भीड़ अधिक होने की आशंका वाले दिनों में निर्धारित क्षमता के अनुसार प्रवेश नियंत्रित करने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। हालांकि, पंजीकरण व्यवस्था लागू होने की अंतिम तारीख और इसके विस्तृत नियमों को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
होटल और धर्मशाला की बुकिंग भी हो सकती है जरूरी
नई व्यवस्था में श्रद्धालुओं के ठहरने की क्षमता को भी ध्यान में रखने की योजना है। इसके तहत होटल, धर्मशाला और सराय में पहले से बुकिंग जैसी व्यवस्था को पंजीकरण से जोड़ने पर विचार किया जा सकता है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के अचानक पहुंचने से ठहरने, पार्किंग, भोजन, पानी और अन्य जरूरी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। प्रशासन भीड़ प्रबंधन को केवल मंदिर तक सीमित रखने के बजाय यातायात, पर्यटन और स्थानीय सुविधाओं से जोड़कर देख रहा है।
मंदिर में प्रवेश और निकासी की व्यवस्था होगी अलग
कैंची धाम मंदिर परिसर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रवेश और निकासी के रास्तों को अलग-अलग करने की तैयारी भी की जा रही है। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर एक ही स्थान पर भीड़ जमा होने और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति से बचने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।
अलग प्रवेश और निकासी व्यवस्था से श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है। इससे दर्शन के दौरान भीड़ का दबाव कम करने और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने में भी सहायता मिलेगी।
ओवररेटिंग रोकने के लिए दुकानों और होटलों पर निगरानी
कैंची धाम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच प्रशासन ने होटल, दुकानों और भोजनालयों में निर्धारित दरों से अधिक पैसे वसूलने की शिकायतों पर भी ध्यान दिया है। कारोबारियों को रेट लिस्ट प्रदर्शित करने के निर्देश दिए जाने की योजना है, ताकि श्रद्धालुओं को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।
प्रशासन का मानना है कि धार्मिक पर्यटन से स्थानीय कारोबार को फायदा मिलता है, लेकिन श्रद्धालुओं से मनमाने दाम वसूलने की शिकायतों पर रोक लगाना भी जरूरी है।
शिप्रा नदी के आसपास भीड़ और पिकनिक पर सख्ती
कैंची धाम के समीप बहने वाली शिप्रा नदी के आसपास बढ़ती भीड़ को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। नदी किनारे पिकनिक और अनियंत्रित जमावड़े से स्वच्छता, सुरक्षा और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
इसका उद्देश्य धार्मिक स्थल के आसपास के प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखना और क्षेत्र में साफ-सफाई बनाए रखना है।
सोशल मीडिया और धार्मिक पर्यटन से बढ़ी लोकप्रियता
बाबा नीम करौली महाराज का कैंची धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के बीच पहले से ही प्रसिद्ध है। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया, धार्मिक पर्यटन और छुट्टियों के दौरान यात्रा करने के बढ़ते चलन ने यहां आने वाले लोगों की संख्या में और इजाफा किया है। हाल में 'हनुमान अंश' फिल्म के बाद भी कैंची धाम की लोकप्रियता को लेकर चर्चा हुई है।
हालांकि, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ क्षेत्र की सड़कों, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर दबाव भी बढ़ा है।
स्थानीय लोगों को जाम से राहत दिलाना भी प्राथमिकता
कैंची धाम नैनीताल और अल्मोड़ा के बीच प्रमुख मार्ग पर स्थित है। इस सड़क का इस्तेमाल केवल मंदिर आने वाले श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि स्थानीय निवासी और अन्य जिलों की ओर जाने वाले यात्री भी करते हैं।
सड़क पर लंबा जाम लगने से स्कूल, अस्पताल, नौकरी और कारोबार जैसे जरूरी कामों के लिए आने-जाने वाले लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में प्रस्तावित पंजीकरण और भीड़ नियंत्रण व्यवस्था से यातायात को व्यवस्थित करने और स्थानीय लोगों की समस्याएं कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, कैंची धाम में प्रस्तावित नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच दर्शन, यातायात और सुरक्षा प्रबंधन को बेहतर बनाना है। यदि ऑनलाइन पंजीकरण और क्षमता आधारित प्रवेश व्यवस्था लागू होती है, तो श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले योजना बनानी पड़ सकती है। फिलहाल, व्यवस्था को लेकर अंतिम दिशा-निर्देश और लागू होने की तारीख की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।