उत्तराखंड में बेटियों के पहले सैनिक स्कूल की राह में चार साल से अड़ंगा, अब जिलों से मांगे गए प्रस्ताव
देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) सैन्य परंपरा और बड़ी संख्या में सैनिक परिवारों के लिए पहचाने जाने वाले उत्तराखंड में बेटियों को सैन्य शिक्षा से जोड़ने की पहल पिछले चार साल से फाइलों में अटकी हुई है। प्रदेश में बालिकाओं के लिए पहला सैनिक स्कूल खोलने का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है। अब शिक्षा विभाग ने मामले को आगे बढ़ाने के लिए सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों से नए सिरे से प्रस्ताव तैयार करने को कहा है।
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प्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने 1 जुलाई 2022 को सचिव विद्यालयी शिक्षा को बालिका सैनिक स्कूल की स्थापना के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 11 जुलाई 2022 को शासन ने शिक्षा महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा को पत्र भेजकर राज्य में बालिका सैनिक स्कूल की स्थापना के लिए स्पष्ट प्रस्ताव मांगा था। हालांकि, शासन और मंत्री के निर्देश के बावजूद प्रस्ताव तैयार कर शासन को नहीं भेजा जा सका।
चार साल बाद फिर शुरू हुई कवायद
करीब चार साल बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद प्रसाद सिमल्टी ने इस मामले में नए सिरे से कार्रवाई शुरू की है। 21 जुलाई 2026 को जारी निर्देश में उन्होंने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से जिले की आवश्यकता के अनुसार बालिका एवं अन्य सैनिक स्कूलों की स्थापना के संबंध में कार्रवाई करने को कहा है। शिक्षा निदेशक के निर्देश के मुताबिक, जिलों से प्रस्ताव मिलने के बाद उन्हें शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद ही बालिका सैनिक स्कूल की स्थापना की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
बेटियों को मिल सकता है सेना में करियर का बेहतर अवसर
राज्यकर विभाग से सेवानिवृत्त ज्वाइंट कमिश्नर एसपी नौटियाल का कहना है कि उत्तराखंड में बालिका सैनिक स्कूल खोलने के मामले में पिछले चार वर्षों से शासन और विभाग के बीच प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया चलती रही, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
उनका कहना है कि बेटियां आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन सेना में महिला अधिकारियों की भागीदारी अभी भी सीमित है। ऐसे में उत्तराखंड में बालिका सैनिक स्कूल की स्थापना होने से बेटियों को सैन्य शिक्षा हासिल करने और सेना में अधिकारी के रूप में करियर बनाने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
IMA में पहली बार नौ महिला कैडेट पास आउट
इस बीच भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के इतिहास में इस साल एक नया अध्याय जुड़ा। जून में अकादमी से कुल 515 कैडेट पास आउट हुए, जिनमें 481 भारतीय और 34 विदेशी कैडेट शामिल थे। खास बात यह रही कि पहली बार नौ महिला कैडेटों ने नियमित और कठिन सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया और युवा सैन्य अधिकारियों के रूप में भारतीय सेना का हिस्सा बनीं। यह घटनाक्रम देश में सैन्य क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
अब जगह और आवश्यकता के आधार पर तैयार होंगे प्रस्ताव
माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद प्रसाद सिमल्टी के अनुसार, निदेशालय को शासन से इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है। इसके आधार पर सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को स्थानीय आवश्यकता के अनुसार प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। बालिका सैनिक स्कूल और अन्य सैनिक स्कूलों के संबंध में जिलों से प्रस्ताव मिलने के बाद उन्हें शासन को भेजा जाएगा। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि चार साल से लंबित इस प्रस्ताव को इस बार कितनी तेजी से आगे बढ़ाया जाता है और उत्तराखंड में बेटियों के लिए पहला सैनिक स्कूल कब आकार लेता है।