ग्लोबल वार्मिंग थी ‘केदारनाथ त्रासदी’ की एक वजह : मुख्यमंत्री हरीश रावत

केदारनाथ त्रासदी का उत्तराखण्ड के अन्दर नदियों मे हो रहे विकास कार्यो का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई ताल्लुक नहीं है, बल्कि इसका एक कारण ग्लोबल वार्मिंग भी है। कुछ वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि केदारनाथ त्रासदी जंगलों के कटान के कारण हुआ है, जबकि यह तथ्य गलत है। नई दिल्ली में केदारनाथ
 

केदारनाथ त्रासदी का उत्तराखण्ड के अन्दर नदियों मे हो रहे विकास कार्यो का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई ताल्लुक नहीं है, बल्कि इसका एक कारण ग्लोबल वार्मिंग भी है। कुछ वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि केदारनाथ त्रासदी जंगलों के कटान के कारण हुआ है, जबकि यह तथ्य गलत है। नई दिल्ली में केदारनाथ टूरिज्म समिट-2016 में “केदारनाथ-द न्यू इंजन फॉर टूरिज्म ग्रोथ” विषय पर आयोजित सेमिनार में ये बात कही। साथ ही मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड का ग्रीन कवरेज नेशनल औसत से काफी ज्यादा है। हमने ग्रीन कवर को लगभग 6 प्रतिशत बढ़ाया है और उत्तराखण्ड ने अपने 70 प्रतिशत हिस्से में जंगलों को बचा कर रखा है। उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है, जो पेड़ लगाने के लिये बोनस दे रहा है। हरीश रावत ने बताया कि उत्तराखंड सरकार ने हमारा वृक्ष हमारा धन एक अनूठी योजना शुरू की है, जो गांव के लोगों को आर्थिकी से जोड़ने की अभिनव पहल है। इस योजना से गांव में विकास के साथ-साथ पलायन की समस्या भी कम होगी।

मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ ही केन्द्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने कार्यक्रम में ‘हिलमेल’ पत्रिका और केदारनाथ पुनर्निर्माण पर बनी लघु फिल्म का भी विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आयोजन संस्था की ओर से मुख्य प्रधान सचिव (मुख्यमंत्री) राकेश शर्मा, सचिव अमित नेगी, सचिव शैलेश बगोली, जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग डॉ. राघव लंगर, नेहरू पर्वातारोहण संस्थान के कर्नल अजय कोठियाल, अभिनेता हेमन्त पाण्डेय, पत्रकार सुशील बहुगुणा, पत्रकार विकास भदौरिया को हिल रत्न पुरस्कार तथा उत्तराखण्ड की पारम्परिक टोपी पहनाकर सम्मानित किया।