ईरान-अमेरिका संघर्ष: क्या हार चुका है सुपरपावर? जानें कैसे ईरान ने पलटी पूरी बाजी

 

नई दिल्ली (उत्तराखंड पोस्ट) पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भू-राजनीतिक विशेषज्ञ अभिजीत चावड़ा ने शालिनी कपूर तिवारी के पॉडकास्ट में दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका और इजरायल के गठबंधन के खिलाफ एक रणनीतिक जीत (Strategic Victory) हासिल कर ली है। उनके अनुसार, वर्तमान युद्ध की स्थिति ने अमेरिका की साख को भारी चोट पहुँचाई है और ईरान इस क्षेत्र के नए 'हेजेमन' (वर्चस्वशाली शक्ति) के रूप में उभरा है।
 

ईरान की सैन्य जीत और अमेरिका की 'बेइज्जती'

चावड़ा का तर्क है कि अमेरिका और इजरायल मिलकर भी ईरान को झुकाने या वहां सत्ता परिवर्तन (Regime Change) करने में विफल रहे हैं। उन्होंने इसे अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी 'बेइज्जती' करार दिया है, जिसकी तुलना वियतनाम युद्ध की हार से की जा सकती है। उनके अनुसार, ईरान की 1 इंच जमीन भी कम नहीं हुई है, जबकि अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने और इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम काफी हद तक नष्ट हो चुका है।
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चीन को सबसे बड़ा फायदा

इस पूरे घटनाक्रम में चीन एक बड़े विजेता के रूप में उभरा है। ईरान की जीत का मतलब है कि चीन को ऊर्जा की आपूर्ति निर्बाध रूप से मिलती रहेगी, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान और चीन के बीच व्यापार डॉलर के बजाय युआन में हो रहा है, जो अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व के लिए खतरा है।

नेतन्याहू के लिए 'लाइफलाइन' था युद्ध

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बारे में चावड़ा ने कहा कि यह युद्ध उनके लिए एक 'लाइफलाइन' की तरह था ताकि वे अपने ऊपर चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों से बच सकें। लेकिन युद्ध में मिली नाकामी के बाद अब वे भारी राजनीतिक और कानूनी संकट में घिर सकते हैं।
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निष्कर्ष: अभिजीत चावड़ा के विश्लेषण के अनुसार, ईरान ने साबित कर दिया है कि उसे केवल परमाणु धमकियों या प्रतिबंधों से नहीं डराया जा सकता। शहादत की संस्कृति और मजबूत भौगोलिक स्थिति ने ईरान को एक अजेय क्षेत्रीय शक्ति बना दिया है