E20 पेट्रोल पर मानसून का खतरा! बारिश में नमी सोख रहा एथेनॉल, पंप मालिकों ने जताई चिंता
नई दिल्ली (उत्तराखंड पोस्ट) देशभर में E20 पेट्रोल को लेकर चर्चा लगातार तेज होती जा रही है। अब मानसून के मौसम में इस ईंधन को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि E20 में मौजूद एथेनॉल की नमी सोखने की क्षमता (Hygroscopic Nature) बारिश और तटीय इलाकों में ईंधन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
The Hindu की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई पेट्रोल पंप मालिकों ने बताया कि मानसून के दौरान वातावरण में मौजूद नमी E20 फ्यूल में मौजूद एथेनॉल द्वारा सोख ली जाती है। इससे ईंधन में पानी की मात्रा बढ़ने का खतरा रहता है, जो आगे चलकर बड़ी तकनीकी समस्या पैदा कर सकता है।
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क्या है 'फेज सेपरेशन' की समस्या?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अधिकांश पेट्रोल पंपों के अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक पारंपरिक पेट्रोल के लिए बनाए गए हैं, जबकि E20 जैसे अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए इनमें अतिरिक्त सावधानियों की जरूरत होती है।
यदि स्टोरेज टैंक में पानी की मात्रा 0.5 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो एथेनॉल पानी को अपने साथ मिलाकर टैंक की तली में बैठ जाता है। इस प्रक्रिया को 'फेज सेपरेशन' (Phase Separation) कहा जाता है। इसके बाद पेट्रोल ऊपर की परत में रह जाता है, जबकि नीचे पानी और एथेनॉल का मिश्रण जमा हो जाता है।
गाड़ियों पर क्या पड़ सकता है असर?
फेज सेपरेशन की स्थिति में वाहन में शुद्ध E20 की जगह पानी और एथेनॉल का मिश्रण पहुंच सकता है। इससे इंजन स्टार्ट होने में दिक्कत आ सकती है, गाड़ी चलते-चलते बंद हो सकती है या इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
यह समस्या खासतौर पर तटीय क्षेत्रों और अधिक नमी वाले इलाकों में गंभीर हो सकती है, जहां भूमिगत जलस्तर अधिक होता है। यदि स्टोरेज टैंक पूरी तरह सील न हों, तो उनमें नमी प्रवेश कर सकती है और ईंधन खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
जंग लगने का भी बढ़ सकता है खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की मौजूदगी के कारण माइल्ड स्टील से बने अंडरग्राउंड टैंक और पाइपलाइन में जंग लगने की संभावना भी बढ़ जाती है। इससे ईंधन की गुणवत्ता और वितरण प्रणाली दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
हालांकि, तेल कंपनियों का दावा है कि E20 फ्यूल की सप्लाई को ध्यान में रखते हुए कई पेट्रोल पंपों पर डिस्पेंसिंग यूनिट के सील और वॉशर को नियोप्रीन रबर जैसे बेहतर मैटेरियल से बदला गया है, ताकि इस तरह की समस्याओं को कम किया जा सके।
क्या घबराने की जरूरत है?
फिलहाल यह समस्या हर पेट्रोल पंप पर नहीं देखी गई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून और तटीय इलाकों में E20 फ्यूल के सुरक्षित भंडारण के लिए अतिरिक्त निगरानी और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता है। यदि स्टोरेज टैंक सही स्थिति में हों और नियमित जांच होती रहे, तो इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।