GDP की 7.8% Growth पर सुभाष गर्ग का सवाल—आखिर असली तस्वीर क्या है?

 

नई दिल्ली(उत्तराखंड पोस्ट) देश की आर्थिक विकास दर को लेकर जारी आंकड़ों पर पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि GDP की गणना में पुराने आंकड़ों के संशोधन और तुलना के आधार में बदलाव को समझना बेहद जरूरी है। उनके विश्लेषण के मुताबिक, घोषित 7.8 प्रतिशत की वास्तविक GDP वृद्धि दर को पुराने, मूल आंकड़ों के आधार पर देखने पर तस्वीर काफी अलग नजर आती है।

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GDP क्या है और इसकी गणना कैसे होती है?

GDP यानी Gross Domestic Product (सकल घरेलू उत्पाद) किसी देश में एक निश्चित अवधि के दौरान उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य संवर्धन को दर्शाता है। किसी वस्तु या सेवा को तैयार करने में इस्तेमाल किए गए इनपुट की लागत और अंतिम उत्पाद के मूल्य के बीच का अंतर Value Addition कहलाता है। अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में होने वाले इस मूल्य संवर्धन को जोड़कर देश की GDP का आकलन किया जाता है।

7.8% GDP Growth पर सुभाष गर्ग ने क्या कहा?

सरकार द्वारा संबंधित तिमाही के लिए 7.8 प्रतिशत GDP Growth का आंकड़ा जारी किया गया है। हालांकि, सुभाष गर्ग ने इस आंकड़े की गणना के आधार पर सवाल उठाते हुए एक वैकल्पिक गणित प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, यदि मौजूदा तिमाही के आंकड़े की तुलना पिछले वर्ष के उसी समय के मूल रूप से घोषित आंकड़े से की जाए, तो GDP Growth का आंकड़ा काफी कम दिखाई देता है।

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Nominal GDP और Real GDP में क्या अंतर है?

GDP के आंकड़ों को समझने के लिए Nominal GDP और Real GDP के बीच अंतर समझना जरूरी है।

Nominal GDP मौजूदा कीमतों पर अर्थव्यवस्था के उत्पादन का मूल्य बताती है, जबकि Real GDP में कीमतों या महंगाई के प्रभाव को हटाकर वास्तविक उत्पादन वृद्धि को मापने की कोशिश की जाती है। सुभाष गर्ग के विश्लेषण के अनुसार, मौजूदा तिमाही की Nominal GDP करीब ₹88 लाख करोड़ बताई गई। वहीं, पिछले वर्ष की समान तिमाही के आंकड़े को संशोधित करके करीब ₹80 लाख करोड़ किया गया।

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इस संशोधित आधार पर Nominal GDP Growth करीब 10.3 प्रतिशत बैठती है। इसमें लगभग 2.5 प्रतिशत महंगाई का प्रभाव घटाने के बाद Real GDP Growth 7.8 प्रतिशत दिखाई जाती है।

हालांकि, गर्ग का तर्क है कि यदि पिछले वर्ष का मूल रूप से घोषित करीब ₹86 लाख करोड़ का आंकड़ा तुलना के लिए लिया जाए, तो Nominal Growth लगभग 2.6 प्रतिशत रह जाती है। उनके हिसाब से 2.5 प्रतिशत महंगाई का प्रभाव हटाने पर वास्तविक वृद्धि लगभग शून्य के आसपास पहुंचती है।

GDP के पुराने आंकड़ों में संशोधन क्यों महत्वपूर्ण है?

GDP के आंकड़ों में समय के साथ संशोधन होना सांख्यिकीय प्रक्रिया का हिस्सा है। नए आंकड़े उपलब्ध होने, बेहतर डेटा स्रोत मिलने या राष्ट्रीय आय की गणना की पद्धति में बदलाव के कारण पुराने आंकड़ों को revise किया जा सकता है। लेकिन सुभाष गर्ग ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया है कि पुराने आंकड़ों में बड़े संशोधन का मौजूदा Growth Rate पर कितना प्रभाव पड़ता है।

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उनके विश्लेषण के मुताबिक, यदि पिछले वर्ष का आधार कम कर दिया जाता है तो मौजूदा वर्ष की तुलना में वृद्धि दर स्वाभाविक रूप से अधिक दिखाई दे सकती है। इसी आधार पर उन्होंने GDP Growth के आधिकारिक आंकड़े और पुराने मूल आंकड़ों से निकलने वाले आंकड़े के बीच अंतर की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

IMF के आंकड़ों पर भी उठे सवाल

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिति समझने के लिए IMF सहित विभिन्न संस्थाओं के GDP आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। सुभाष गर्ग के अनुसार, IMF देशों द्वारा उपलब्ध कराए गए आधिकारिक आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करता है। इसलिए किसी देश के GDP डेटा की मूल गणना और उसके संशोधनों को समझना अंतरराष्ट्रीय तुलना के लिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

रुपये और डॉलर में GDP का अंतर

भारत की GDP को रुपये में मापने और अमेरिकी डॉलर में मापने पर तस्वीर अलग हो सकती है। रुपये की विनिमय दर में बदलाव का असर डॉलर में व्यक्त GDP पर पड़ता है। इसलिए घरेलू अर्थव्यवस्था की वृद्धि को समझने के लिए रुपये में Real GDP Growth महत्वपूर्ण है, जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच आकार की तुलना में डॉलर-मूल्य वाली GDP का इस्तेमाल किया जाता है।

GDP Growth का आम लोगों पर कितना असर?

GDP में वृद्धि का अर्थ यह नहीं है कि समाज के हर वर्ग की आय उसी अनुपात में बढ़ रही है। अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों और आय वर्गों पर Growth का प्रभाव अलग-अलग हो सकता है। सुभाष गर्ग ने कृषि क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा है कि GDP में कृषि का योगदान करीब 15 प्रतिशत के आसपास है, जबकि बड़ी संख्या में लोग आज भी कृषि और उससे जुड़े कामों पर निर्भर हैं।

उनके विश्लेषण में किसानों की वास्तविक आय और GDP Growth के बीच के अंतर को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया है। उनका तर्क है कि केवल Headline GDP Growth Rate के आधार पर आम नागरिक, किसान और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की आर्थिक स्थिति का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता।

GDP के आंकड़ों को समझना क्यों जरूरी है?

GDP Growth किसी भी अर्थव्यवस्था की दिशा समझने का एक महत्वपूर्ण संकेतक है, लेकिन इसे समझने के लिए Nominal GDP, Real GDP, Inflation, Base Effect और Data Revisions जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी है।

सुभाष गर्ग का विश्लेषण इसी अंतर पर केंद्रित है—एक तरफ सरकार द्वारा प्रस्तुत 7.8 प्रतिशत GDP Growth का आंकड़ा है, जबकि दूसरी तरफ पुराने मूल आंकड़ों को आधार बनाकर की गई उनकी वैकल्पिक गणना है।

इसलिए GDP की वास्तविक तस्वीर समझने के लिए केवल एक Headline Growth Rate देखने के बजाय उसके पीछे इस्तेमाल किए गए आधार और गणना पद्धति को समझना भी जरूरी है।