15 दिनों में दो ग्रहण और बदलती दुनिया: मोदी का 'ग्रेसफुल रिटायरमेंट', योगी का उदय और पाकिस्तान के विखंडन की महाभविष्यवाणी!
नई दिल्ली (Uttarakhand Post) प्रख्यात ज्योतिषी अंकित अग्निहोत्री ने हाल ही में मशहूर पॉडकास्टर और सीनियर जर्नलिस्ट शालिनी कपूर तिवारी के साथ Podcast में भारत और वैश्विक परिदृश्य पर कई गंभीर भविष्यवाणियां की हैं, जो आने वाले समय में बड़े बदलावों की ओर इशारा करती हैं। उनके अनुसार, अगस्त से दिसंबर तक का समय बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है, जिसमें 15 दिनों के भीतर पड़ने वाले दो ग्रहण एक बड़े भौगोलिक और राजनीतिक परिवर्तन के संकेतक हैं।
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भारत में सत्ता और नेतृत्व परिवर्तन के संकेत: ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान समय प्रधानमंत्री मोदी के लिए कठिन रहने वाला है। भविष्यवाणी की गई है कि दिसंबर 2027 तक उनकी राहु की दशा सक्रिय होने के कारण, वे 'ग्रेसफुल रिटायरमेंट' ले सकते हैं या राष्ट्रपति पद जैसा कोई नया मार्गदर्शक पद संभाल सकते हैं।
योगी आदित्यनाथ की कुंडली अत्यंत प्रभावशाली: अंकित अग्निहोत्री के अनुसार, भारत के इतिहास में अविवाहित शासकों (जैसे नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और मोदी) ने लंबे समय तक शासन किया है और इस कड़ी में अगला नंबर योगी आदित्यनाथ का हो सकता है। उनकी सिंह लग्न की कुंडली और वर्तमान ग्रह दशाएं उन्हें भविष्य के प्रधानमंत्री पद के लिए एक प्रबल दावेदार बनाती हैं।
पाकिस्तान का विखंडन और ट्रंप की चुनौतियां: पड़ोसी देश पाकिस्तान के लिए 2027 तक का समय विनाशकारी बताया गया है। भविष्यवाणी के अनुसार, पाकिस्तान अपनी आंतरिक कलह, गृहयुद्ध और बलूच आंदोलनों के कारण टुकड़ों में बंट सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप मिड-टर्म चुनाव हारेंगे: वहीं अमेरिका के संदर्भ में, डोनाल्ड ट्रंप के मिड-टर्म चुनाव हारने और सीनेट द्वारा उनकी शक्तियों को सीमित किए जाने की संभावना जताई गई है। ईरान के बारे में यह कहा गया है कि उसका आधार (फाउंडेशन) बहुत मजबूत है और वह अमेरिका के दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेगा, बल्कि कड़ी टक्कर देगा।
आर्थिक मंदी और प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनीछ आर्थिक मोर्चे पर, भारत सहित पूरी दुनिया 'द ग्रेट डिप्रेशन' जैसी स्थिति की ओर बढ़ रही है। बैंकिंग सिस्टम में संकट और बेरोजगारी बढ़ने की आशंका के बीच, ज्योतिषी ने लोगों को 6 से 8 महीने का वित्तीय रनवे तैयार रखने और सोने (Gold) में निवेश करने की सलाह दी है।
प्राकृतिक आपदाएं: प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से, भारत के पश्चिमी भागों महाराष्ट्र, गुजरात और केरल में विनाशकारी भूकंप आने की संभावनाएं जताई गई हैं। इसके अलावा, मेडिकल सेक्टर पर भी वायरल संक्रमण या किसी नई महामारी के कारण भारी दबाव रह सकता है।
सड़कों पर उतरेगी जनता: आने वाले वर्ष में भारत में जनता का मुखर विरोध और आंदोलन जारी रहेंगे। छात्र, किसान और बेरोजगार युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर सकते हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि भारत में लोकतांत्रिक ढांचा स्थिर रहेगा और यहाँ श्रीलंका या बांग्लादेश जैसे हिंसक तख्तापलट के हालात नहीं बनेंगे।