गडकरी के खिलाफ किसने चलाया 'पेड कैंपेन'? E20 विवाद के पीछे की राजनीतिक साजिश का केंद्रीय मंत्री ने किया खुलासा
नई दिल्ली (Uttarakhand Post) केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल (E20) ईंधन को लेकर उनके खिलाफ चलाए जा रहे दुष्प्रचार पर कड़ा प्रहार किया है। शालिनी कपूर तिवारी (Shalini Kapoor Tiwari) के साथ खास Podcast में नितिन गडकरी ने उन पर लग रहे आरोपों पर खुलकर बात की। उनका कहना है कि इथेनॉल से गाड़ियों का एवरेज कम होने और इंजन में पानी आने की बात पूरी तरह से झूठी है और यह उनके खिलाफ एक 'पेड कैंपेन' (पैसे देकर चलाया गया अभियान) का हिस्सा था।
झूठा प्रचार और इन्फ्लुएंसर्स का इस्तेमाल- गडकरी ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पैसे देकर झूठी रील और वीडियो बनवाए गए, जबकि देश के मुख्य प्रिंट और टीवी मीडिया ने ऐसी कोई खबर नहीं छापी। उन्होंने साफ किया कि इथेनॉल से वाहनों को कोई नुकसान नहीं पहुंच रहा है। ऑटोमोबाइल कंपनियों (OEMs) और ARAI ने परीक्षण के बाद इसे सर्टिफिकेट दिया है, और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसके खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है।
22 लाख करोड़ रुपये बचाने और प्रदूषण कम करने की मुहिम- गडकरी ने बताया कि भारत हर साल फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) के आयात पर 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। उनका मुख्य लक्ष्य इस भारी-भरकम राशि को देश के बाहर जाने से रोकना और इसे देश की जनता की जेब में डालना है। इसके साथ ही, वह दिल्ली जैसे शहरों को प्रदूषण से मुक्त करना चाहते हैं, जहां फॉसिल फ्यूल के कारण जीवन 10 साल कम हो रहा है।
'अन्नदाता' अब बन रहा है 'ऊर्जा दाता'- मंत्री जी का विजन है कि देश का किसान केवल 'अन्नदाता' न रहकर 'ऊर्जा दाता', 'हाइड्रोजन दाता' और 'हवाई ईंधन दाता' बने। इथेनॉल के उत्पादन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों को भारी मुनाफा हो रहा है।
- केवल मक्के से इथेनॉल बनाने के फैसले से बिहार और यूपी के किसानों को ₹45,000 करोड़ का सीधा फायदा हुआ है।
- मक्के का भाव जो पहले ₹1200 प्रति क्विंटल था, वह इथेनॉल बनने के बाद ₹2700 तक पहुंच गया।
- अब पंजाब और हरियाणा में जलने वाली पराली (stubble) से बायो-बिटुमिन (डामर) और इथेनॉल बनाया जा रहा है, जिससे किसानों को पराली के ₹2500 प्रति टन मिल रहे हैं और दिल्ली का प्रदूषण भी कम हो रहा है।
निजी फायदे के आरोपों का कड़ा खंडन- अपने परिवार पर लगे आरोपों पर गडकरी ने बेबाकी से जवाब देते हुए कहा कि देश में इथेनॉल की 550 इंडस्ट्रीज हैं, जिनमें से उनके बेटों की केवल 5 हैं। उन्हें किसी की मेहरबानी से टेंडर नहीं मिला है। पेट्रोलियम मंत्रालय टेंडर निकालता है और भाव कैबिनेट में तय होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इथेनॉल नीति लागू होने से बहुत पहले ही उनकी शुगर फैक्ट्री इथेनॉल (अल्कोहल) बना रही थी।
अंत में, गडकरी ने इस दुष्प्रचार की तुलना अपने पुराने राजनीतिक अनुभवों से करते हुए कहा कि जब वह बीजेपी अध्यक्ष थे, तब भी उन्हें बदनाम करने के लिए ऐसा ही षड्यंत्र रचा गया था, जिसका कोई परिणाम नहीं निकला। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह वैकल्पिक ईंधन (अल्टरनेटिव फ्यूल) के जन्मदाता हैं और ऐसी झूठी बातों से डरकर अपने कदम पीछे नहीं हटाएंगे।