जमरानी बांध निर्माण में बड़ी चुनौती: चट्टान में 8 मीटर लंबा गैप मिला

 

हल्द्वानी(उत्तराखंड पोस्ट) उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी जमरानी बांध परियोजना के निर्माण कार्य के दौरान एक बड़ी तकनीकी चुनौती सामने आई है। बांध की दाहिनी ओर स्थित चट्टान में करीब 8 मीटर लंबा गैप (दरार) मिलने के बाद फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है। परियोजना अधिकारियों के अनुसार इस गैप का वैज्ञानिक परीक्षण और उपचार (ट्रीटमेंट) किए बिना आगे का निर्माण शुरू नहीं किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में करीब दो महीने का अतिरिक्त समय लग सकता है।

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53 मीटर खुदाई के बाद सामने आई दरार

परियोजना इकाई के मुताबिक बांध की डिजाइन ऊंचाई 765.6 मीटर से खुदाई शुरू की गई थी। जब खुदाई 53 मीटर नीचे 712 मीटर स्तर तक पहुंची, तब दाहिनी ओर की चट्टान में लगभग 8 मीटर लंबा गैप दिखाई दिया। इसके बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य तत्काल रोक दिया गया।

जियोफिजिकल सर्वे से होगी पूरी जांच

दरार मिलने के बाद विशेषज्ञों की टीम ने जियोफिजिकल (भू-भौतिकीय) सर्वे शुरू कर दिया है। इस सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि गैप चट्टान के भीतर कितनी गहराई और कितनी लंबाई तक फैला हुआ है। सर्वे रिपोर्ट आने में लगभग 10 से 12 दिन लग सकते हैं।परियोजना अधिकारियों ने केंद्रीय जल आयोग (CWC) को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है। आयोग के तकनीकी दिशा-निर्देशों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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ऐसे होगी चट्टान की 'सिलाई'

इंजीनियरों के अनुसार चट्टान के गैप का विशेष ट्रीटमेंट किया जाएगा। सबसे पहले दरार की लंबाई, चौड़ाई और गहराई का सटीक आकलन होगा।

  • यदि गैप छोटा हुआ तो उसे सीमेंट और कंक्रीट से भरकर मजबूत किया जाएगा।

  • यदि दरार अधिक बड़ी या गहरी निकली तो लोहे की सरिया और सीमेंट के बीम का इस्तेमाल कर चट्टान को आपस में जोड़ा जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रक्रिया से बांध की मजबूती और सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित की जाएगी।

3,808 करोड़ रुपये पहुंची परियोजना की लागत

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जमरानी बांध परियोजना को वर्ष 2018 में केंद्र सरकार से मंजूरी मिली थी। उस समय इसकी अनुमानित लागत 2,584.10 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 3,808 करोड़ रुपये हो गई है। परियोजना पूरी होने के बाद यहां करीब 10 किलोमीटर लंबी झील बनेगी। प्रस्तावित बांध की ऊंचाई 150 मीटर और लंबाई 450 मीटर होगी।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों को मिलेगा लाभ

जमरानी बांध से निकलने वाले पानी का 57 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश की सिंचाई के लिए उपयोग किया जाएगा, जबकि 43 प्रतिशत पानी उत्तराखंड के तराई और भाबर क्षेत्रों की सिंचाई में काम आएगा। इसके अलावा, हल्द्वानी शहर की लगभग 10.65 लाख आबादी को प्रतिदिन 117 एमएलडी पेयजल की आपूर्ति भी इसी परियोजना के माध्यम से की जाएगी।

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अधिकारियों ने क्या कहा?

जमरानी बांध परियोजना इकाई के उप महाप्रबंधक बीबी पांडेय ने कहा कि बांध निर्माण के दौरान चट्टानों में इस तरह के गैप मिलना असामान्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। जियोफिजिकल सर्वे और केंद्रीय जल आयोग के निर्देशों के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से ट्रीटमेंट करने के बाद ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू होगा।