बदरीनाथ चोरी कांड: सिर्फ एक मोहरा या बड़ा घोटाला? SIT खंगाल रही है 29 जून के फुटेज!

पुलिस अब तक 25 जून से 2 जुलाई तक के सीसीटीवी फुटेज खंगाल चुकी है। अब विशेष रूप से 29 जून की रिकॉर्डिंग की जांच की जा रही है, क्योंकि उस दिन 5 दान पात्रों की गिनती हुई थी। पुलिस को उम्मीद है कि इसमें चोरी से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
 

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चमोली (Uttarakhand Post) बदरीनाथ धाम में दान और चढ़ावे की चोरी के मामले में पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। मंदिर समिति के वैयक्तिक सहायक और गणना अधिकारी प्रमोद नौटियाल की गिरफ्तारी के बाद अब मंदिर से जुड़े अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

मुख्य खुलासे और जांच के बिंदु:

  • 29 जून के सीसीटीवी फुटेज पर नजर: पुलिस अब तक 25 जून से 2 जुलाई तक के सीसीटीवी फुटेज खंगाल चुकी है। अब विशेष रूप से 29 जून की रिकॉर्डिंग की जांच की जा रही है, क्योंकि उस दिन 5 दान पात्रों की गिनती हुई थी। पुलिस को उम्मीद है कि इसमें चोरी से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

  • अन्य अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल: पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि जब आरोपी खुलेआम भगवान नारायण का खजाना लूट रहा था, तब वहां मौजूद मंदिर समिति के अन्य जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मौन क्यों थे।

  • 8 बार हुई चोरी: जांच सूत्रों के अनुसार, 25 जून से 2 जुलाई के बीच ही आरोपी प्रमोद नौटियाल सीसीटीवी कैमरे में आठ बार दान राशि और कीमती उपहारों में हेराफेरी करते हुए कैद हुआ है। वह सोने-चांदी के सिक्के, शालिग्राम, केसर और 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां अपने मोबाइल और कपड़ों के पीछे छिपाकर ले जाता दिखा था।

  • बड़े घोटाले की आशंका: फिलहाल जांच केवल एक सप्ताह (25 जून से 2 जुलाई) तक सीमित है। आशंका जताई जा रही है कि यदि कपाट खुलने के समय (पीक यात्रा सीजन) से लेकर अब तक के पूरे फुटेज खंगाले जाएं, तो यह मामला एक बहुत बड़े घोटाले का रूप ले सकता है। इस संभावना से मंदिर समिति में हड़कंप मचा हुआ है।

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एसआईटी (SIT) का क्या कहना है? एसआईटी प्रभारी और पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज, साक्ष्यों और मौजूद लोगों के बयानों के आधार पर विवेचना की जा रही है। जांच के दौरान जो भी नए तथ्य सामने आ रहे हैं, उनका कानूनी परीक्षण हो रहा है। जांच आगे बढ़ने पर अन्य लोगों की संलिप्तता को लेकर भी कार्रवाई की जाएगी।

दान और गिनती की प्रक्रिया: मई और जून में तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ के कारण दान की गिनती लगभग हर दिन या हर दूसरे दिन होती थी। 25 जून के बाद भीड़ कम होने पर यह गिनती 3 से 4 दिनों में होने लगी। मंदिर के अंदर और बाहर मौजूद दान पात्रों में श्रद्धालु गुप्त दान के रूप में नकदी के अलावा सोने, चांदी और हीरे-जवाहरात जैसी कीमती वस्तुएं भी श्रद्धापूर्वक चढ़ाते हैं। अब पुलिस इस पूरी प्रक्रिया में हुई चूक और हेराफेरी की जड़ तक जाने का प्रयास कर रही है।