बदरीनाथ दान-चढ़ावा हेराफेरी: धामी बोले- 'ये गोहत्या और माता-पिता की हत्या जैसा जघन्य पाप, सरकार चुप नहीं बैठेगी'
"धार्मिक संस्थान के दान और चढ़ावे में चोरी करना गोहत्या या अपने ही माता-पिता की हत्या करने जैसा जघन्य और घोर पाप है। ऐसा घृणित कृत्य करने वाले को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यह एक अक्षम्य अपराध है और कानून इसके खिलाफ पूरी कठोरता से काम करेगा।"
देहरादून/हरिद्वार (Uttarakhand Post) विश्वप्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में दान-चढ़ावे की हेराफेरी के मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े रुख अख्तियार करते ही शासन से लेकर पुलिस प्रशासन तक हड़कंप मच गया है।
सीएम की तीखी नजरें होते ही महज 36 घंटे के भीतर मामले की उच्च स्तरीय जांच कमेटी के गठन से लेकर आरोपी कर्मचारी की गिरफ्तारी के लिए मुकदमा दर्ज करने तक की बड़ी कार्रवाई पूरी कर ली गई है।
हरिद्वार में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने अपने सख्त इरादे जाहिर करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि आस्था के केंद्रों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
'वित्तीय गड़बड़ी नहीं, यह सीधे तौर पर आस्था पर प्रहार है'
मुख्यमंत्री धामी ने इस मामले को बेहद घृणित बताते हुए कहा कि इसे महज एक सामान्य वित्तीय भ्रष्टाचार या क्लर्क की गलती मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। यह करोड़ों सनातनियों की आस्था के साथ खिलवाड़ है।
मीडिया से बातचीत के दौरान सीएम धामी ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा:
"धार्मिक संस्थान के दान और चढ़ावे में चोरी करना गोहत्या या अपने ही माता-पिता की हत्या करने जैसा जघन्य और घोर पाप है। ऐसा घृणित कृत्य करने वाले को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यह एक अक्षम्य अपराध है और कानून इसके खिलाफ पूरी कठोरता से काम करेगा।"
36 घंटे के भीतर एक्शन: सस्पेंशन से लेकर FIR तक
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद इस पूरे मामले में प्रशासनिक दृढ़ता की अनूठी मिसाल देखने को मिली है:
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तत्काल निलंबन: बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी - BKTC) के अध्यक्ष के वैयक्तिक सहायक (PA) प्रमोद नौटियाल को शुरुआती जांच में दोषी पाते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
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पुलिस केस दर्ज: निलंबन के ठीक अगले ही दिन पुलिस ने आरोपी कर्मचारी प्रमोद नौटियाल के खिलाफ बीएनएस (BNS) की धाराओं के तहत चोरी और आपराधिक विश्वासघात का मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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उच्च स्तरीय कमिटी: उत्तराखंड सरकार ने गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है, जिसे 15 दिनों के भीतर पूरी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का बढ़ा दायरा
प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में सरकार की इस त्वरित कार्रवाई को मुख्यमंत्री धामी की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। अब तक धामी सरकार भर्ती घोटालों, भू-माफियाओं और पेपर लीक करने वाले गिरोहों के खिलाफ सख्त एक्शन के लिए जानी जाती रही है। लेकिन यह पहली बार है जब सरकार ने किसी प्रमुख धार्मिक देवस्थान में हुई गड़बड़ी पर इतनी ही तेजी और आक्रामकता के साथ प्रहार किया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि देवभूमि के सम्मान और श्रद्धालुओं की श्रद्धा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी सिंडिकेट को सरकार उखाड़ फेंकेगी। आने वाले दिनों में गढ़वाल कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर मंदिर प्रबंधन की व्यवस्थाओं में बड़े और पारदर्शी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।