IIT रुड़की का 40 लाख का ड्रोन अचानक हुआ गायब,36 घंटे तक चला सर्च ऑपरेशन
हरिद्वार(उत्तराखंड पोस्ट) कुंभ मेले की तैयारियों के तहत डिजिटल मैपिंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा आईआईटी रुड़की का करीब 40 लाख रुपये कीमत का अत्याधुनिक ड्रोन 36 घंटे की तलाश के बाद बरामद कर लिया गया है। उड़ान के दौरान अचानक लापता हुआ यह ड्रोन मनसा देवी मंदिर की पहाड़ियों में जंगल के बीच झाड़ियों में पड़ा मिला। ड्रोन के लापता होने के बाद मामला चर्चा में आ गया था। उसकी तलाश में जुटे कर्मचारियों और पुलिस ने दूसरे ड्रोन तथा जीपीएस तकनीक की मदद से उसकी लोकेशन का पता लगाया।
कुंभ मेले की मैपिंग के दौरान लापता हुआ था ड्रोन
कुंभ मेले की तैयारियों के लिए डिजिटल मैपिंग समेत अन्य तकनीकी कार्यों के उद्देश्य से आईआईटी रुड़की से यह ड्रोन हरिद्वार लाया गया था। जानकारी के मुताबिक, दो दिन पहले उड़ान भरने के बाद ड्रोन अचानक लापता हो गया। उसकी आखिरी लोकेशन उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में मिली थी। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश शुरू की, लेकिन शुरुआती प्रयासों में ड्रोन का कोई पता नहीं चल पाया। ड्रोन की कीमत करीब 40 लाख रुपये होने के कारण मामला गंभीर हो गया। काफी तलाश के बावजूद सफलता नहीं मिलने पर पुलिस को भी इसकी सूचना दी गई।
दूसरे ड्रोन और GPS की मदद से मिली लोकेशन
करीब 36 घंटे तक तलाश जारी रहने के बाद कर्मचारियों ने लापता ड्रोन का पता लगाने के लिए दूसरे ड्रोन और जीपीएस तकनीक की मदद ली। इस तकनीकी सहायता से उसकी लोकेशन का पता लगाया गया। इसके बाद मनसा देवी मंदिर की पहाड़ियों में जंगल के बीच खोजबीन की गई, जहां ड्रोन झाड़ियों में पड़ा मिला। हालांकि, बरामदगी के समय ड्रोन टूटी-फूटी हालत में था। उसे सुरक्षित बरामद किए जाने के बाद उसकी तलाश में जुटे कर्मचारियों और पुलिस ने राहत की सांस ली।
शहर कोतवाली में दर्ज कराया गया था मुकदमा
ड्रोन के लापता होने के मामले में आईआईटी रुड़की के कर्मचारी शिवम नौटियाल की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई थी। शिकायत के आधार पर हरिद्वार की शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। नगर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा के मुताबिक, लापता ड्रोन को मनसा देवी की पहाड़ियों के जंगल से बरामद कर लिया गया है।
कुंभ की तैयारियों के लिहाज से अहम था ड्रोन
कुंभ मेले की तैयारियों में डिजिटल मैपिंग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में मैपिंग कार्य के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे महंगे और अत्याधुनिक ड्रोन का अचानक लापता होना अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बन गया था। करीब 36 घंटे की तलाश के बाद ड्रोन मिलने से राहत जरूर मिली है, लेकिन उसके उड़ान के दौरान लापता होने और क्षतिग्रस्त हालत में मिलने की परिस्थितियां मामले को चर्चा में बनाए हुए हैं।