आत्मरक्षा प्रशिक्षण को शिक्षा का एक अहम हिस्सा बनाया जाए: कैन्थूरा

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Almoraआत्मरक्षा प्रशिक्षण को शिक्षा का एक अहम हिस्सा बनाया जाय यह बात प्रदेश के राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजनी कैन्थूरा ने आज अल्मोड़ा में जी0जी0आई0सी0 में आयोजित घरेलू हिंसा से महिलाओं का सरंक्षण 2005 संगोष्ठी के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि बच्चों में बचपन से ही ऐसे संस्कार दिये जाय जिससे वे नारी की इज्जत करना सीखे और यह भी सिखाये कि हमें अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। वर्तमान समय में यदि नारियों की हालत पर नजर डाली जाय तो आधे से ज्यादा अखबार महिला शोषण और अत्याचारों से भरे पड़े है। नारी सशक्तीकरण और नारी मुक्ति के लिए हमें स्वयं आगे बढ़कर नारी को शोषण और अत्याचार से मुक्त करना होगा और सर्वप्रथम उसे शिक्षित करना होगा।

शिक्षा का अर्थ सिर्फ अक्षर ज्ञान ही नहीं बल्कि जीवन के हर पहलू को समझना होगा जिससे कि वे अपने अधिकारो को लेकर जागरूक हो। उन्होंने कहा कि महिलाओं के उत्पीड़न को रोकने के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य महिला आयोग को पर्याप्त अधिकार उपलब्ध कराये गये है जिसके तहत महिला आयोग द्वारा अधिक से अधिक शिकायतों का निस्तारण कर रहा है। इस संगोष्ठी में महिला उत्पीड़न, चुनौतिया और हल पर विस्तृत रूप से बताते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वयं जागरूक होकर आगे आना होगा और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठानी होगी यह तभी सम्भव होगा जब महिलायें अपने ग्राम, पड़ोस, क्षेत्र और जनपद स्तर पर महिलाओं के उत्थान हेतु गठित संस्थाओं से जुड़कर घरेलू हिंसा के प्रति सजग होकर आगे आयेंगी।

इस अवसर पर महिला आयोग की सदस्य सचिव श्रीमती सुजाता ने महिला आयोग के गठन से लेकर महिला आयोग की गतिविधियों पर प्रकाश डाला और कहा कि जनपद अल्मोड़ा जो हर क्षेत्र में आगे रहता है। महिला उत्पीड़न सम्बन्धी मामलो में यहाॅ की महिलायें हमेश सजग होकर आगे रहती है। इस अवसर पर महिला संस्था की रीता दुर्गापाल, सुनीता पाण्डे और महिला आयोग के विधि सलाहकार बी0एन0 सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हमें महिलाओं के अधिकार कर्तव्य के प्रति जानकारी रखनी होगी साथ ही समाज में नारी उत्पीड़न और घरेलू हिंसा के प्रति जनजागरूकता फेलानी होगी। एस0एस0जे0 परिसर की डा0 इला शाह ने कहा कि नारी निकेतन, बालिका निकेतन में जो महिलायें रहती है उन्हें व्यवसायिक प्रशिक्षण देने के साथ ही सरकारी नौकरियों में 01 प्रतिशत का आरक्षण दिलाये जाने पर विचार किया जाय ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर स्वालम्बन की ओर आगे बढ़ सकेंगी।

इस कार्यक्रम में राजकीय बालिका इण्टर कालेज की छात्राओं व बाल विकास की सेविकाओं द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये।