भूकंप के झटकों से थर्राया उत्तराखंड, लोग सहमे

ReportEarthquakeउत्तराखंड के चार जिल पिथौरागढ़, बागेश्वर, चमोली एवं उत्तरकाशी गुरुवार सुबह 9:30 बजे भूकंप के झटकों से थर्रा उठे। झटके इतने भयानक थे कि डर के मारे लोग अपने- अपने घरों से बाहर निकल आए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7.2 मापी गई। भूकंप का केन्द्र केन्द्र बिन्दु जनपद बागेश्वर के नांगलकुड में बताया गया। राज्य आपात परिचालन केन्द्र में भूकंप की सूचना मिलते ही राज्य आपात परिचालन केन्द्र से सभी वरिष्ठ अधिकारियों व विभागों के नोडल अधिकारियों को सूचनाएं दी गई। साथ ही जनपद चमोली, बागेश्वर, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ में भी अलर्ट जारी किया गया।

सूचना मिलने के 10 से 20 मिनट के अंदर भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य शुरु कर दिया गया। भूकंप में गंभीर रूप से घायलों को हैलीकाप्टर से निकटम अस्पतालों में पहुंचाया गया।

भूकंप के झटके कब आए ? पता ही नहीं चला और वो भी 7-2 तीव्रता का भूकंप ? शायद यही सोच रहे होंगे आप !

चलिए आपको बताते हैं कि आखिर भूकंप कब और क्यों आया ? दरअसल भूकंप जैसी आपदा आने की स्थिति में इससे कैसे निपटा जाए ? कैसे जान माल के नुकसान को कम किया जा सके इसको परखने के लिए प्रदेश के चार जिलों में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। ठीक उसी तरह, जैसे वास्तव में उत्तराखंड भूकंप के झटकों से कांप गया हो।

उत्तराखण्ड सरकार और राष्ट्रीय आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण (एन.डी.एम.ए.) के संयुक्त तत्वाधान में प्रदेश के चार जिलों में भूकम्प का पूर्वाभ्यास किया गया। यह मॉक ड्रिल आपदाओं से सम्बन्धित प्रतिवादन के आई.आर.एस. (इन्सीडेन्ट रिस्पान्स सिस्टम) पद्धति पर आयोजित किया गया, जिसमें प्रत्येक जिले में एक आर.ओ. (रिस्पान्सबल आफिसर) एक आई.सी. (इन्सीडेन्ट कामाण्डर) तीन अन्य अधिकारी यथा- नियोजन प्रभारी, लॉजिस्टिक प्रभारी एवं आपरेशन प्रभारी एवं उनसे सम्बन्धित स्टाफ को सम्मिलित किया गया। इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा प्रबन्धन योजना की जानकारी रखना, योजना के अनुरूप कार्य करना एवं योजना में कमियों का चिन्हीकरण कर भविष्य में ठीक करने के साथ-साथ आपदा के दौरान समय पर किस प्रकार प्रतिवादन सुनिश्चित हो उसके लिए तैयारी करना था।

मॉक ड्रिल के दौरान देहरादून में भी चार जिलों के सहयोग के लिए परेड ग्राउण्ड में स्टेजिंग एरिया बनाया गया था, जिसमें सेना, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, होमगार्डस, पुलिस, पीएसी, सिविल डिफेंस, सभी मुख्य नोडल विभागों एवं स्वास्थ्य विभाग के टीमें भी शामिल हुई।

एक बजे तक चली इस मॉक ड्रिल के बाद एनडीएमए और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के मध्य एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें पूर्वाभ्यास की समीक्षा की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करने के साथ ही सुझाव भी दिए। सचिव दिलीप जावलकर, जो चीफ लॉजिस्टिक सेक्शन के प्रभारी थे, ने एनडीएमए के सदस्यों को बताया कि इस प्रकार की स्थिति में कैसे और बेहतर तरीके से कार्य किया जा सकता है। प्रभावित क्षेत्रों से जिन चीजो की मांग की जाती है, उनकी पूर्ति किस प्रकार से की जा सकती है। साथ ही राज्य सरकार के स्तर पर विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कैसे बनाया जा सकता है। एनडीएमए के सदस्य ले. जन. एनसी मारवाह ने बताया कि एनडीएमए हर प्रकार के सहयोग के लिए तैयार है। राज्य सरकार द्वारा जिस भी प्रकार की सहायता की मांग की जायेगी, उसे उपलब्ध कराया जाएगा।

बैठक में एनडीएमए के सदस्यों द्वारा बताया कि भूकंप जैसी स्थिति में संचार तंत्र, बिजली और अन्य अवस्थापना सुविधाओं के ध्वस्त होने पर अन्य वैकल्पिक उपायों पर विचार किया जाना होगा। इसके लिए पूर्व से ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। एनडीएमए के सदस्य मेजर जनरल वीके दत्ता ने बताया कि आज यह पूर्वाभयास कार्यक्रम काफी सफल रहा है। इसमें सभी अधिकारियों को बेहतर कार्य किया गया है, इससे हमें अनुभव मिलता है कि भविष्य में आपदा की स्थिति में किस प्रकार से रणनीति के तहत कार्य किया जाए जिससे आपदा को न्यूनीकरण करने में सहायक हो। उत्तराखण्ड राज्य में किया गया पूर्वाभ्यास अन्य राज्यों के लिए मॉडल राज्य के रूप में रखा जाएगा।

उत्तराखण्ड सरकार ने वर्ष 2013 की आपदा के बाद काफी सुधार किया है। आपदा से निपटने के लिए बेहतर तकनीक और तैयारियों का स्तर अन्य राज्यों से ऊंचा है। राज्य सरकार ने अच्छा काम किया है। अभी तक इस प्रकार के पूर्वाभ्यास जिला स्तर पर ही किए जाते थे। राज्य स्तर पर 4 जिलों में एक साथ ऐसा पूर्वाभ्यास पहली बार किया जा रहा है।

सचिव आपदा प्रबंधन अमित नेगी ने बताया कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद राज्य सरकार द्वारा काफी प्रयास किये गये है। इस प्रकार के पूर्वाभ्यास से हमें अपनी तैयारियों को अपडेट करने का अवसर मिलता है। इस प्रकार के प्रकरण से निपटने के लिए जनजागरूता अभियान भी संचालित किए जाएंगे। इसके लिए सामुदायिक रेडियों का भी सहयोग लिया जा रहा है। साथ ही भारत सरकार से डॉप्लर रडार और सेटेलाइट फोन के लिए भी अनुमति मांगी गई है, जिस पर शीघ्र ही कार्यवाही की जायेगी। भारत सरकार से अनुमति मिलते ही 26 सैटेलाइट फोन खरीदे जाएंगे।