धू-धू कर जल रहे हैं उत्तराखंड के जंगल, 6 की मौत, NDRF ने संभाली कमान

532

Untitled42गर्मी के चलते भड़की आग में उत्तराखंड के सभी 13 जिलों के जंगल चपेट में आ चुके हैं। आलम ये है कि जंगल में लगी आग आस-पास के गांवों और सड़कों तक पहुंच गई है। जंगल की आग में झुलसकर अब तक 6 लोगों की मौत की भी ख़बर है। जानकारी के अनुसार कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों में करीब 1890.92 हेक्टेअर से ज्यादा का जंगल तबाह हो गया।

बेकाबू होती आग पर जल्द काबू पाने के लिए अब एनडीआऱएफ की मदद ली जा रही है। एनडीआरएफ की टीमें आग पर काबू पाने में जुट गई हैं। वहीं शासन ने राज्य के सभी वन कर्मियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी हैं। मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि एनडीआरएफ की ये टुकडियां और विशेषज्ञ दल गढ़वाल एवं कुमाऊं के ऐसे क्षेत्रों में तैनात की जायेंगी जो वनाग्नि से सर्वाधिक प्रभावित हैं। ये टुकडियां और दल प्रभावित क्षेत्र में प्रभावी रूप से तत्काल बचाव कार्य संचालित करेंगे।

मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि आगामी सात दिनों के लिए संभावित फायर पॉइंटस एवं वन क्षेत्र की स्थिति व नाम वन विभाग की वेबसाइट पर वन मुख्यालय में स्थापित सूचना प्रौद्योगिकी एवं जियोइन्फोर्मेटिक्स केन्द्र द्वारा प्रतिदिन अपलोड की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में जिलेवार वनाग्नि की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की सूची तथा आगामी 15 दिनों के लिए मौसम के पूर्वानुमान की सभी सूचनायें वन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

मुख्य सचिव ने कहा कि वनाग्नि की घटनाओं के सूचना प्रसारण एवं रोकथाम हेतु वॉट्सअप एवं आपात कालीन सेवा-108 के नम्बर पहले से ही संचालित है। वनाग्नि की घटनाएं प्रकाश में आने पर कोई भी व्यक्ति संबंधित जिले के जिलाधिकारी या प्रभागीय वनाधिकारी को दे सकता है।

प्रमुख वन संरक्षक (रिसर्च) और वनाग्नि के लिये नोडल अफसर बीपी गुप्ता ने बताया कि फरवरी में वनों में आग लगने की शुरुआत होने के बाद से प्रदेश में इस साल अब तक कुल 922 घटनायें हो चुकी हैं और इनमें एक मां-बेटा सहित पांच व्यक्तियों की मृत्यु हो गयी और सात अन्य घायल हो गये।