BJP-कांग्रेस के इन दिग्गजों को उत्तराखंड की जनता ने नकारा

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में इस बार कई दिग्गजों को जनता ने औंधे मुंह गिरा दिया है। इन दिग्गजों में राज्य में महज 11 सीटें जीतने वाले कांग्रेसियों की संख्या अधिक है। चुनाव से पहले बड़े – बड़े दावे करने वाले ये दिग्गज अपनी सीट तक नहीं बचा पाए। दो जगह से चुनाव लड़ रहे मुख्यमंत्री हरीश रावत को दोनों ही सीटों से चुनाव हार गए। अब ख़बरें एक क्लिक पर इस लिंक पर क्लिक कर Download करें Mobile App –https://play.google.com/store/apps/details?id=app.uttarakhandpost

दिग्गज जिनको झेलनी पड़ी हार

किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण में हरीश रावत | किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव लड़ रहे हरीश रावत पर कांग्रेस की नैया को पार लगाने का दारोमदार था। हरीश रावत कांग्रेस की नैया तो पार नहीं लगा पाए उल्टा उनकी खुद की नैया डूब गई। हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा विधानसभा में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

 

रामनगर में रंजीत रावत | मुख्यमंत्री हरीश रावत के प्रधान सलाहकार रणजीत रावत पिछली बार सल्ट विधानसभा से चुनाव हार गए थे। इस बार रंजीत रावत ने रोमनगर विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमाई लेकिन उनकी किस्मत इस बार भी उनके साथ नहीं थी। लिहाजा यहां भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

कोटद्वार में सुरेन्द्र नेगी कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र नेगी ने पिछले चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीसी खंडूरी को मात देकर खूब वाहवाही बटोरी थी। लेकिन इस बार नेगी का जादू कोटद्वार में नहीं चला और उन्हें कांग्रेस से बागी होकर भाजपा से चुनाव लड़ने वाले हरक सिंह रावत के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

धर्मपुर में दिनेश अग्रवाल | कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल भी धर्मपुर विधानसभा सीट पर अपनी जीत के प्रति पूरी तरह आश्वसत थे लेकिन जनता ने अग्रवाल को हार का स्वाद चखा दिया। इस सीट पर भाजपा के विनोद चमोली ने अग्रवाल को मात दी।

विकासनगर में नवप्रभात | कांग्रेस सरकार के एक और मंत्री नवप्रभात को विकासनगर सीट पर हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के मुन्ना सिंह चौहान ने नवप्रभात की जीत के सपने को चकनाचूर कर दिया।

टिहरी में दिनेश धनै | पीडीएफ कोटे से कांग्रेस सरकार में मंत्री दिनेश धनै भी अपनी सीट नहीं बचा पाए। पिछली बार निर्दलीय चुनाव जीतने वाले धनै अपनी जीत के प्रति आशांवित थे लेकिन वे भाजपा उम्मीदवार को पार नहीं पा सके।

देवप्रयाग में मंत्री प्रसाद नैथानी | पीडीएफ कोटे से कांग्रेस सरकार में मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी को भी हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ने वाले नैथानी जीत हासिल करना तो दूर भाजपा उम्मीदवार को टक्कर तक नहीं दे पाए।

रानीखेत में अजय भट्ट |  भाजपा ने राज्य में प्रचंड जीत हासिल की लेकिन इस केसरिया हवा में भी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट चुनाव नहीं जीत पाए। इसे इत्तफाक कहें या फिर अजय भट्ट की बदकिस्मती कि जब-जब भट्ट चुनाव हारते हैं तो भाजपा बहुमत में आती है और जब-जब वे चुनाव जीतते हैं तो भाजपा बहुमत से दूर रह जाती है।

सहसपुर में किशोर उपाध्याय | कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी सहसपुर विधानसभा सीट पर जीत का स्वाद नहीं चख पाए। कांग्रेस के बागी आर्येंद्र शर्मा की बगावत किशोर पर भारी पड़ गई। आर्येंद्र ने अच्छे वोट हासिल कर लिए, नतीजा किशोर को हार का मुंह देखना पड़ा और भाजपा ने ये सीट जीत ली।

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