रमेश भट्ट के सुरों में बिखरा पहाड़ी अंदाज, लांच के साथ ही ट्रेलर ने मचाई धूम

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) बुधवार को वरिष्ठ पत्रकार और वर्तमान में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट का एक और अवतार लोगों के सामने आया। इस बार वे पर्दे के पीछे नहीं बल्कि पर्दे के आगे नजर आए, वह भी गायक और अभिनेता के रूप में। गाना भी किसी और का नहीं बल्कि रूहानी सुरों के सम्राट लोकगायक गोपाल बाबू गोस्वामी का।

यूं तो भट्ट को जानने वाले उनकी लोकगीत गाने की विधा को वर्षों से जानते हैं पर अधिसंख्य लोग उनकी इस प्रतिभा से वाकिफ नहीं थे। ऐसे में उनका ये अवतार कई लोगों को चौंकाने वाला रहा।

बुधवार सुबह गीत और इसका वीडियो ट्रेलर रमेश भट्ट ने अपनी फेसबुक वॉल पर शेयर किया। कुछ ही घंटों में इसे हजारों की तादाद में लोगों ने देखा। दरअसल जितने सुंदर इस गीत के बोल हैं उतना ही सुंदर इसका फिल्मांकन भी हुआ है। गीत का ट्रेलर देखकर ही समझ आ जाता है कि बेहतरीन तरीके से शूट किया गया है।

इस वीडियो गीत को पहली बार एक ऐसा गीत के लॉन्च होने का श्रेय दिया जा सकता है जिसमें आपको संपूर्ण उत्तराखंड दर्शन हो जाएंगे। इस गीत का टाइटल है ‘जय जय हो देवभूमिÓ। उत्तराखंड के मशहूर लोकगायक स्वर्गीय गोपाल बाबू गोस्वामी द्वारा रचित इस गीत को नए सुर दिए हैं वरिष्ठ टीवी पत्रकार और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने। गीत में संगीत संजय कुमोला ने दिया है जबकि इसका वीडियो निर्देशन अरविंद नेगी ने किया है। गीत में अभिनय खुद रमेश भट्ट ने किया है।

हिमालय और यहां के जीवन के अद्भुत नजारों का मिश्रण | गीत के फिल्मांकन में उत्तराखंड के अध्यात्म, धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन के साथ साथ सौंदर्य की बेहतरीन कवरेज की गई है। पहली ही नजर में देखने और सुनने में गीत अपने मूल भव के साथ दर्शकों पसंद आ रहा है। गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार बावर के बेहतरीन सीन इस गीत में है। चारों धामों के साथ साथ गीत में तमाम छोटे-बड़े सिद्धपीठों और पर्यावरणीय संतुलन का भी का सजीव चित्रण है। इसमें उच्च हिमालयी क्षेत्र और यहां के जीवन के अद्भुत नजारों का भी मिश्रण है। यह वीडियो गीत जहां प्रवासी पर्वतीय लोगों को रिवर्स पलायन का संदेश देता है वहीं विश्व को देवभूमि के सजीव दर्शन भी कराता है।

छह मिनट में संपूर्ण देवभूमि के दर्शन | अगर आपको भी उत्तराखंड के संपूर्ण दर्शन सिर्फ 6 मिनट में करने हैं तो आप इसे जरूर देख सकते हैं। कानफोडू संगीत और तेज डांसिंग मूव के गीतों के इस दौर में जब ‘जय जय हो देवभूमि, जय जय हो मातृभूमिÓ के स्वर सुनाई पड़ते हैं तो महसूस होता है पहाड़, उसका सौन्दर्य, आध्यात्म और रूहानी सकून।

रमेश भट्ट कहते हैं,”मंचों पर मैं उत्तराखंड के लोकगीत वर्षों से गाता आया हूं। ये पहला मौका है जब किसी गीत को प्रोफेशनल तरीके से स्टूडियो में गाया है। इसका फिल्मांकन कर संगीत इंडस्ट्री में लॉन्च किया जा रहा है। सबसे पहले मेरी श्रद्धांजलि स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी जी को। वे हमेशा मेरे प्रेरणास्रोत रहे हैं। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मीरा गोस्वामी जी का भी बहुत बहुत आभार, जिन्होंने मुझे इस रचना को गाने की अनुमति दी। मैं गीत के फिल्मांकन और सहयोग के लिए पटवाल फिल्म्स का भी कृतज्ञ हूं। भरोसा है आप सबको ये पसंद आएगा।”

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