उत्तराखंड | डीएम के घर के लिए नहीं मिल रहा कुक, ये है परेशानी

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) देहरादून में डीएम आवास के लिए साउथ इंडियन कुक ढूंढना पीआरडी विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। विभाग में फिलहाल अभी कोई ऐसा कुक नहीं है जो साउथ इंडियन व्यंजन बनाने में निपुण हो। दरअसल, डीएम सी रविशंकर मूलरूप से दक्षिण भारत से हैं। उनकी स्थानीय भाषा मलयालम है।जिला युवा
 
उत्तराखंड | डीएम के घर के लिए नहीं मिल रहा कुक, ये है परेशानी

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) देहरादून में डीएम आवास के लिए साउथ इंडियन कुक ढूंढना पीआरडी विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। विभाग में फिलहाल अभी कोई ऐसा कुक नहीं है जो साउथ इंडियन व्यंजन बनाने में निपुण हो।

दरअसल, डीएम सी रविशंकर मूलरूप से दक्षिण भारत से हैं। उनकी स्थानीय भाषा मलयालम है।जिला युवा कल्याण एवं पीआरडी विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि डीएम के परिवार के सदस्य मलयालम भाषा में ही बात करते हैं।

जो कुक लाते हैं उसकी स्थानीय भाषा परिवार के सदस्य समझ नहीं पाते हैं। अब तक दो-तीन कुक इसी वजह से काम छोड़ चुके हैं। विभागीय अधिकारी कुक की तलाश में जुटे हैं। उत्तराखंड | डीएम के घर के लिए नहीं मिल रहा कुक, ये है परेशानी

साउथ इंडियन व्यंजनों में आम तौर पर डोसा, इडली, सांभर जैसे आम व्यंजन ही कुकों को बनाने आते हैं, जबकि इसके अलावा भी दर्जनों अन्य व्यंजन भी होते हैं, जिन्हें सिखाना बड़ी चुनौती है।

फिलहाल, पीआरडी विभाग बाहर से साउथ इंडियन कुक की खोज कर रहा है, जिसे मलयालम का ज्ञान हो। साथ ही उसे कुछ अंग्रेजी भी आती हो, ताकि अंग्रेजी को कॉमन भाषा के रूप में भी प्रयोग में लाया जा सके।

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