उत्तराखंड | CBI की दो बातों से डरे पूर्व सीएम हरीश रावत, जताया गिरफ्तारी का डर!

हल्द्वानी (उत्तराखंड पोस्ट) पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को कथित स्टिंग मामले में अपनी गिरफ्तारी का डर सता रहा है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि खुद हरीश रावत ने इस कथित स्टिंग और इसकी जांच कर रही सीबीआई को लेकर अपने फेसबुक पेज पर एक लंबा – चौड़ा पोस्ट लिखा है।

नीचे पढ़िए हरीश रावत ने अपने फेसबुक पेज पर क्या लिखा-

मैं अपने कुल देवता, ईष्ट देवता का नाम लेकर नैनीताल की ओर प्रस्थान कर रहा हूं। सीबीआई के दोस्तों की जानकारी के लिये बता दूं कि, मैं कल भी नैनीताल में ही रहूंगा। सीबीआई की दो बातों से बड़ा डर लगता है, एक तो वो बहुधा यह कह देते हैं कि, गिरफ्तारी से व्यक्ति भाग रहा है या पूछताछ से भाग रहा है और दूसरा ईडी के सहयोग से दुनियां भर में लोगों के एकाउन्ट बता देते हैं, तो मैं दो बातें स्पष्ट करना चाहता हूं, एक तो मैं अब जहां रहूंगा जिस दिन, वहां की लोकेशन देता रहूंगा। दूसरा मेरे वहीं खाते हैं, मेरे पास वहीं एकाउन्ट हैं, जो मैंने इनकम टैक्स या चुनाव लड़ते वक्त चुनाव आयोग को प्रस्तुत किये हैं, कोई भी जांच कर लें, सम्पत्ति घटी होगी, बड़ी भी होगी। मेरा किसी देश में कोई एकाउन्ट नहीं है।

हरीश रावत ने आगे लिखा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद, मैंने अपना पासपोर्ट भी रिन्यू नहीं करवाया है। नैनीताल मैं, आप सबके भरोसे जा रहा हॅू, मेरे पास बड़े वकील खड़ा करने के लिये साधन नहीं है, इसलिये अपने दोस्तों से काम चला रहा हूं और मुझे न्याय व न्यायालय पर भरोसा है और उससे कई गुना अधिक भरोसा लोकतंत्र के न्याय पर है, जिसके आप स्वामी हैं।

आप यह जरूर देखें कि, इस तथाकथित स्टिंग में, मैं क्या कुछ रूपये का आदान-प्रदान कर रहा हूं? भाव-दाव कर रहा हॅू? आवश्यकता बता रहा हॅू? नहीं ना, हमको तो आप इतने विधायक दे दीजिये, जब कोई आपसे बात करता है, मन की बात उगलवाने के लिये भी आप कुछ कहते हैं और यही तो सरकार गिराने के लिये षड़यंत्र हुआ था, उस षड़यंत्र के विषय में, मुझे उत्सुकता हो सकती है और वो उत्सुकता सही साबित भी हुई, स्टिंगकर्ता ने स्वयं बताया है कि, मेरी सरकार एक साजिशन गिराई गई है और उस साजिश के सूत्रधार का नाम भी बताया है और यह भी कहा कि, लेन-देन भी हुआ है। यह स्वभाविक है, जो विधायक भाजपा में सम्मिलित हुये, वे कोई महात्मा गांधी जी के अनुयायी नहीं थे, उनमें से एक विधायक तो वो थे जिनके विषय में स्वंय स्टिंगकर्ता ने कहा है कि, फलां-फलां व्यक्ति ही सारी सैटिंग करता था, अर्थात मुख्यमंत्री के घर में एक सैटर बैठा हुआ था, उसने स्वयं ही उसका नाम सैटर कहा है। एक षड़यंत्र था, खूबसूरत षड़यंत्र था, एक सामान्य उत्तराखण्डी व्यक्ति के तौर पर, दूसरे की भावनाओं का आदर करने का जन्मजात गुण होने के कारण, मैं षड़यंत्रकारियों के ट्रैक में आ गया। आप सबका आर्शीवाद रहा, मां नन्दा-सुनन्दा, पाषाण देवी मां का आर्शीवाद रहा, तो ये सारा स्टिंग षड़यंत्र सिद्ध होगा और षड़यंत्रकारी बेनकाब होंगे।

हरीश रावत आगे ये भी कहते हैं कि मैंने कभी यह दावा नहीं किया कि, मुझसे कोई गलत काम नहीं हुआ होगा, मगर मैं इतना अवश्य कहना चाहता हॅू, मैंने आपकी कीमत पर कोई, किसी तरीके का, अपनी सेवा के बदले, पैसे का भाव-दाव नहीं किया, न मेरे किसी परिवार के निकटस्त व्यक्ति ने किया है। इधर राज्य में कई और स्टिंग भी हुये हैं, जिनमें सत्ता के निकटस्त लोगों के, निकटस्त जो आज भी निकटस्त बने हुये हैं, काम के बदले दाम वसूल रहे हैं।

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