…तो इस सीट से विधानसभा चुनाव में ताल ठोक सकते हैं हरीश रावत !

मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने विधानसभा चुनाव लड़ने पर हालांकि खुद साफ कर चुके हैं कि वे पार्टी हाईकमान के आदेशानुसार चुनाव लड़ेंगे। रावत ने कहा था कि पार्टी हाईकमान जिस सीट से कहेगा वो वहीं से चुनाव लड़ेंगे। लेकिन इसके बाद भी रावत की चुनावी सीट को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

धारचूला विधानसभा से मौजूदा विधायक हरीश रावत के इस बार कुमाऊं मंडल की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावना कम ही दिखाई देती है। पिथौरागढ़ जिले की जिस धारचूला विधानसभा से वह विधाय़क हैं, वहां पर उनके लिए सीट छोड़ने वाले हरीश धामी सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। धामी यहां से खुद को कांग्रेस प्रत्याशी बताते हुए चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं। जो ईशारा करता है कि रावत इस बार धारचूला से मैदान में नहीं उतरेंगे।

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वहीं कुमाऊं की दो और सीटों रामनगर व खटीमा से रावत के चुनाव लड़ने की चर्चाएं थी लेकिन इस सीट पर मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार रणजीत रावत सक्रिय दिखाई दे रहे हैं जबकि खटीमा सीट से मुख्यमंत्री के पुत्र वीरेंद्र रावत सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। जिससे ये संकेत मिल रहे हैं कि रामनगर और खटीमा से भी हरीश रावत के चुनाव लड़ने की संभावना बहुत कम ही है।

ऐसे में अंदर की खबर ये है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत गढ़वाल मंडल की केदारनाथ विधानसभा सीट से ताल ठोक सकते हैं। इसके पीछे एक वजह से भी बताई जा रहा है कि केदारनाथ सीट से कांग्रेस की पिछली बार जीती विधायक शैला रानी रावत बागी होकर भाजपा में शामिल हो चुकी हैं और दूसरी केदारनाथ में हुआ विकास कार्य और मुख्यमंत्री बनने के बाद रावत के ताबड़तोड़ केदारनाथ के दौरे। अपने कार्यकाल में रावत ने इस क्षेत्र में 33 दौरे किए, जिनमें से 28 केवल केदारनाथ धाम के ही थे। हालांकि, इसके पीछे उनका तर्क केदारनाथ यात्रा को पटरी पर लाने की कवायद रहा। लेकिन जिस तरह से रावत ने यहां रुचि दिखाई उससे इन संभावनाओं को बल मिला है कि विस चुनाव में वह केदारनाथ सीट से दांव खेल सकते हैं।

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बहरहाल चुनावी मौसम में चर्चाओं का बाजार गर्म है औऱ इस पर कयास भी खूब लगाए जा रहे हैं लेकिन मुख्यमंत्री हरीश रावत किस सीट पर जोर आजमाईश करेंगे ये तो कांग्रेस की उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद ही साफ हो पाएगा।