कोरोना काल में ‘अविरल’ धारा, 70 साल के बुजुर्ग ने पेश की अनोखी मिसाल

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) कोरोना काल में जहां एक तरफ लोग अलग-अलग तरह की मुश्किलों से जूझ रहे हैं और लॉकडाउन के दौरान डिप्रेशन जैसी बीमारी का डर बढ़ रहा है, वहीं सत्तर साल के एक बुजुर्ग ने एक अनोखी मिसाल पेश की है। सेवानिवृत्त अजय कुमार मल्लिक को बचपन से ही कविताएं लिखने का शौक
 
कोरोना काल में ‘अविरल’ धारा, 70 साल के बुजुर्ग ने पेश की अनोखी मिसाल

देहरादून (उत्तराखंड पोस्ट) कोरोना काल में जहां एक तरफ लोग अलग-अलग तरह की मुश्किलों से जूझ रहे हैं और लॉकडाउन के दौरान डिप्रेशन जैसी बीमारी का डर बढ़ रहा है, वहीं सत्तर साल के एक बुजुर्ग ने एक अनोखी मिसाल पेश की है।

सेवानिवृत्त अजय कुमार मल्लिक को बचपन से ही कविताएं लिखने का शौक था। वह अपनी डायरियों में कविताएं लिखा करते थे। लेकिन लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपनी सभी रचनाओं को संकलित कर एक किताब की शक्ल दे दी।

मल्लिक ने ‘अविरल’ नाम से अपना यह कविता संग्रह छपवाया है, जिसे महाराष्ट्र के नॉवेल नगेट्स प्रकाशन ने छापा है। यह कविता संग्रह अमेजन, फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है। किंडल पर इसका ई-बुक पढ़ा जा सकता है।

कोरोना काल में ‘अविरल’ धारा, 70 साल के बुजुर्ग ने पेश की अनोखी मिसाल

 

मल्लिक ने इस प्रकाशन को अपने जीवन भर की संचित निधि बताया है और कहा है कि जीवन इसी तरह हर हाल में अविरल चलते रहने का नाम है और यही उनके काव्य संग्रह का संदेश भी है।

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