जिनके बयान पर मचा है बवाल, आखिर कौन हैं वो सैम पित्रोदा ? जानिए सब कुछ

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नई दिल्ली (उत्तराखंड पोस्ट) सिख दंगों को लेकर ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा के बयान पर बवाल मचा हुआ है। मोदी ने तक सैम पित्रोदा का नाम लेकर अपनी रैली के मंच से कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। विवाद बढ़ता देख शुक्रवार शाम को सैम पित्रोदा ने अपने बयान को लेकर माफी मांग ली औऱ कहा कि जो बयान मैंने दिया वो पूरी तरह तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। मेरी हिंदी अच्छी नहीं है। मेरा मतलब था- जो हुआ वो बुरा हुआ। मैं अपने दिमाग में ‘बुरा’ का अनुवाद नहीं कर पाया।

आपको बता दें कि शुक्रवार को बीजेपी पर हमला बोलते हुए 1984 के सिख दंगों पर पित्रोदा ने कह डाला कि 84 में हुआ तो हुआ लेकिन आपने पांच सालों में क्या किया।

इससे पहले भी उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले पर एक विवादित बयान में कहा था कि कुछ लोगों की गलती की सजा पूरे पाकिस्तान को देना ठीक नहीं है। सैम पित्रोदा के बयान को लेकर खूब बवाल मचा लेकिन आप जानते हैं कि आखिर सैम पित्रोदा आखिर हैं कौन ?

भारतीय संचार क्रांति के पिता कहे जाने वाले सत्यनारायण गंगाराम पित्रोदा (डॉ. सैम पित्रोदा) का जन्म 1942 में ओडिशा के तिलागढ़ में हुआ था। सैम के दादा बढ़ई और लोहार का काम करते थे। उनका परिवार ओडिशा से आकर गुजरात बस गया था और महात्मा गांधी से बहुत ज्यादा प्रभावित था। सैम ने वडोदरा की महाराजा सैय्याजीराव यूनिवर्सिटी से फिजिक्स ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स में मास्टर्स किया। इसके बाद वह इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स की पढ़ाई के लिए यूएस चले गए। सैम पित्रोदा के नाम पर तकनीक क्षेत्र के कई पेटेंट भी कराए। सैम ने टेलिकम्युनिकेशन्स और कंप्यूटिंग में शोधकार्य भी किया।

सैम पढ़ाई खत्म करने के बाद वह ओक इलेक्ट्रिक कंपनी में काम करने लगे। यहीं पर उनका नाम सत्यनारायण से सैम पित्रोदा हो गया। कंपनी में चेक जारी करते वक्त उनका नाम सुविधा के लिए छोटा कर दिया गया था।

1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निमंत्रण पर सैम पित्रोदा भारत लौटे। 1987 में उन्हें प्रधानमंत्री राजीव गांधी का सलाहकार नियुक्त किया गया। राजीव गांधी सैम पित्रोदा से प्रभावित थे और उन्हें भारत के विदेशी और घरेलू टेलिकम्युनिकेशन के क्षेत्र में क्रांति लाने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई। देश में PCO (पब्लिक कॉल ऑफिसेस) लाने के पीछे सैम पित्रोदा की ही दिमाग था।

2009 में भारत सरकार ने उन्हें भारतीय रेलवे की एक विशेषज्ञ कमिटी का अध्यक्ष बनने के लिए आमंत्रित किया। अक्टूबर 2009 में उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार नियुक्त किए गए। अगस्त 2010 में ‘राष्ट्रीय अन्वेषण परिषद’ का चेयरमैन बनाया गया।

सैम पित्रोदा को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का भी काफी करीबी माना जाता है और उन्हें राहुल गांधी का गुरु तक कहा जाता है।

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